खराब होने लगे बिचड़े, खेतों में पड़ गयी दरार

मॉनसून की बेरूखी से किसानों की चिंता बढ़ गयी है. बारिश के अभाव में धान के बिचड़े खराब हो रहे हैं और बिचड़े डाले गये खेतों में दरार पड़ गये हैं.
प्रतिनिधि, मसौढ़ी
मॉनसून की बेरूखी से किसानों की चिंता बढ़ गयी है. बारिश के अभाव में धान के बिचड़े खराब हो रहे हैं और बिचड़े डाले गये खेतों में दरार पड़ गये हैं. करीब 80 प्रतिशत किसान रोहिणी नक्षत्र में धान का बिचड़ा खेतों में डाल दिये हैं. पर बिचड़े डाले गये खेत में दरार पड़ने लगा है. कृषि कार्यालय के अनुसार, अब तक 160 एम एम बारिश हो जानी चाहिए थी, लेकिन नाम मात्र की भी बारिश नहीं हुई है. अदरा नक्षत्र शुरू होते-होते प्रत्येक वर्ष 20 से 25 प्रतिशत तक धान की हो जाने वाली बुआई इस वर्ष शुरू भी नहीं हो पायी है. कुछ किसान अपनी खेतों की जुताई कर बारिश के इंतजार में बैठे हैं. मसौढ़ी के मलमाचक निवासी उपेन्द्र कुमार, नूरा निवासी मृत्युंजय कुमार, संजय कुमार एवं सतीस कुमार, चपौर निवासी बबलू सिंह, धनरूआ के कोल्हाचक निवासी धर्मवीर प्रसाद, नदवां निवासी नीरज शर्मा, पुनपुन के पारथू निवासी सुधीर कुमार, चांदेडीह निवासी निपु सिंह समेत अन्य किसानों ने बताया कि बारिश नहीं होने से धान के फसल की बुआई की शुरुआत तक नहीं हो पायी है. हालात ऐसे हैं कि धान के बिचड़े बचाने में किसानों को मुश्किलों का सामना करना पर रहा है. पानी के अभाव में पौधे सूख रहे हैं और खेतों में दरार पड़ गयी है.
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