PHOTOS: 800 साल पुरानी बावली पर सूखाए जा रहा है गोबर के उपले, तस्वीरों में देखें संरक्षण का इंतजार कर रहा पटना का यह ऐतिहासिक धरोहर

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पटना सिटी की 800 साल पुरानी यह सात मंजिला ऐतिहासिक बावली आज उपेक्षा का शिकार है. संरक्षण के अभाव में इसकी कई मंजिलें मिट्टी में दब गई हैं और इसका गौरव धूमिल हो रहा है. तस्वीरों में देखें इस अनमोल धरोहर की दयनीय स्थिति.
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800 साल पुराने ‘बोली कुआं का हाल बेहाल

पटना सिटी की 800 साल पुरानी यह सात मंजिला ऐतिहासिक बावली आज उपेक्षा का शिकार है. संरक्षण के अभाव में इसकी कई मंजिलें मिट्टी में दब गई हैं और इसका गौरव धूमिल हो रहा है. तस्वीरों में देखें इस अनमोल धरोहर की दयनीय स्थिति.

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पटना सिटी में इतिहास की अनमोल निशानी
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PC-संजीव कुमार

पटना सिटी में इतिहास की अनमोल निशानी

पटना सिटी के सबलपुर मोहल्ले में करीब 800 साल पुरानी ऐतिहासिक बावली आज भी मौजूद है. 12वीं-13वीं शताब्दी की मानी जाने वाली यह सात मंजिला सीढ़ीदार बावली कभी जल प्रबंधन और स्थापत्य कला का शानदार उदाहरण रही होगी. आज संरक्षण के अभाव में इसकी हालत खराब होती जा रही है.

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सात मंजिला बावली, अब सिर्फ तीन मंजिल तक पहुंची
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सात मंजिला बावली, अब सिर्फ तीन मंजिल तक पहुंची

बावली के भीतर जाने के लिए बगल में सीढ़ीनुमा रास्ता बना है. स्थानीय लोगों के अनुसार, कभी इन सीढ़ियों से सात भूमिगत मंजिलों तक पहुंचा जा सकता था. फिलहाल मिट्टी और मलबे के कारण केवल तीसरी मंजिल तक ही जाना संभव है.

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गंगा का जलस्तर घटने पर दिखती हैं दबी मंजिलें
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PC-संजीव कुमार

गंगा का जलस्तर घटने पर दिखती हैं दबी मंजिलें

स्थानीय लोगों के मुताबिक बावली की नीचे की चार मंजिलें मिट्टी और मलबे में दब गई हैं. अप्रैल-मई में गंगा का जलस्तर कम होने पर इसका ज्यादा हिस्सा दिखाई देता है. बरसात में जलभराव के कारण सिर्फ ऊपरी मंजिल नजर आती है.

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बोली कुआं’ पर सूख रहा गौरव
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बोली कुआं’ पर सूख रहा गौरव

बोली कुआं’ का गौरव सूखाया जा रहा है. यह ऐतिहासिक बावली कभी अपनी सात मंजिला संरचना, अनोखी वास्तुकला और जल प्रबंधन की विरासत के लिए पहचानी जाती थी, लेकिन आज यह उपेक्षा की मार झेल रही है. यहां गौरव सूखाया जाता है.

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झाड़-झंखाड़ और कचरे से घिरा
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PC-संजीव कुमार

झाड़-झंखाड़ और कचरे से घिरा

बावली के आसपास झाड़-झंखाड़ और कचरा जमा है. साफ-सफाई और नियमित देखरेख के अभाव में पूरा परिसर उपेक्षित नजर आता है. ऐतिहासिक धरोहर होने के बावजूद यहां संरक्षण की कमी साफ दिखाई देती है.

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पत्थर पर उकेरी आकृति भी उपेक्षित
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PC-संजीव कुमार

पत्थर पर उकेरी आकृति भी उपेक्षित

बावली के बाहर पड़ा करीब तीन फीट का शिलाखंड भी उपेक्षा का शिकार है. इस पर ज्यामितीय आकृति बनी हुई है. स्थानीय लोगों और पुरातत्व से जुड़े जानकारों के बीच इसकी पहचान को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं.

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ऐतिहासिक नक्काशी मिटने के कगार पर
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PC-संजीव कुमार

ऐतिहासिक नक्काशी मिटने के कगार पर

बावली की वास्तुकला में मौजूद कई पुराने अलंकरण अब दिखाई नहीं देते. समय और देखरेख की कमी के कारण ऐतिहासिक नक्काशी लगातार खराब हो रही है. बचे हुए निशानों को सुरक्षित रखने की जरूरत है.

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बारिश में और बिगड़ जाती है हालत
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PC-संजीव कुमार

बारिश में और बिगड़ जाती है हालत

बरसात के दौरान बावली में जलभराव बढ़ जाता है. इससे नीचे का हिस्सा और ज्यादा ढक जाता है. स्थानीय लोगों के अनुसार गर्मियों की तुलना में बारिश के मौसम में बावली का काफी कम हिस्सा दिखाई देता है.

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संरक्षण का इंतजार कर रही है धरोहर
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संरक्षण का इंतजार कर रही है धरोहर

करीब आठ सदियों पुरानी सबलपुर बावली आज अपने संरक्षण की बाट जोह रही है. टूटती दीवारें, मलबे में दबी मंजिलें, झाड़-झंखाड़ और बिखरे ऐतिहासिक अवशेष इसकी बदहाली की तस्वीर दिखाते हैं. समय रहते संरक्षण नहीं हुआ तो यह ऐतिहासिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए सिर्फ तस्वीरों में रह सकती है.

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रागिनी शर्मा

लेखक के बारे में

By रागिनी शर्मा

वर्तमान में मैं, रागिनी शर्मा पटना स्थित प्रभात खबर डिजिटल की टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं. यहां मैं बिहार के विभिन्न जिलों से जुड़ी अहम खबरों, राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर काम कर रही हूं. मेरा उद्देश्य हर खबर को सरल, सटीक और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक न सिर्फ जानकारी प्राप्त करें बल्कि उससे जुड़ाव भी महसूस करें और डिजिटल पत्रकारिता को और अधिक सार्थक बनाया जा सके.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही मैंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. अपने कॉलेज के समय में हिंदुस्तान के साथ इंटर्नशिप के दौरान मुझे पहली बार वेब पोर्टल पर खबर लिखने और डिजिटल न्यूज राइटिंग का व्यावहारिक अनुभव मिला. इसी दौरान मैंने न्यूज़ लेखन, हेडलाइन स्ट्रक्चर और डिजिटल स्टोरी प्रेजेंटेशन की बुनियादी समझ विकसित की.

इसके बाद वर्ष 2025 में पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरा करने के साथ ही मैंने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की. डिजिटल मीडिया में मेरी पहली भूमिका फर्स्ट बिहार झारखंड के साथ रही, जहाँ मैंने एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग के माध्यम से बिहार के जमीनी मुद्दों को कवर किया. इस दौरान मैंने राज्य की राजनीति, सामाजिक सरोकारों और आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग की.

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