पटना में सेटेलाइट टाउनशिप का विरोध: भूमि रजिस्ट्री शुरू करने और टाउनशिप योजना वापस लेने की मांग तेज

सेटेलाइट टाउनशिप का विरोध करते लोग
Patna News: पटना के संपतचक प्रखंड मुख्यालय में किसानों ने सेटेलाइट टाउनशिप योजना और भूमि निबंधन पर रोक के विरोध में धरना दिया. किसानों ने सरकार से भूमि रजिस्ट्री बहाल करने और कृषि भूमि को अधिग्रहण से बचाने की मांग की.
Patna News: (अजीत कुमार की रिपोर्ट) पटना जिले के संपतचक प्रखंड मुख्यालय परिसर में बुधवार को पाटलिपुत्र सेटेलाइट टाउनशिप एवं भूमि निबंधन पर राज्य सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में किसानों ने एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया. धरना कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. धरना से पहले किसानों ने संपतचक के प्रमुख मार्गों पर विशाल जुलूस निकाला. प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित सेटेलाइट टाउनशिप योजना तथा भूमि की रजिस्ट्री पर लगी रोक को वापस लेने की मांग की.
जमीन बचाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले प्रदर्शन
धरना कार्यक्रम का आयोजन जमीन बचाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी देवकुमार सिंह ने की, जबकि संचालन जितेंद्र सिंह ने किया. किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से उपजाऊ कृषि भूमि पर संकट उत्पन्न हो गया है. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनकी सहमति के बिना भूमि से जुड़े फैसले लिए जा रहे हैं. किसानों ने इसे उनके अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की.
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन होगा तेज
धरना को संबोधित करते हुए पूर्व मुखिया उमेश सिंह, संजीव शरद उर्फ गुड्डू सिंह, रामकेवल सिंह, संजय सिंह एवं अरविंद सिंह ने कहा कि किसान अपनी जमीन की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे. वक्ताओं ने सरकार से 55-45 प्रतिशत भूमि पूलिंग व्यवस्था और भूमि अधिग्रहण से जुड़े निर्णयों पर पुनर्विचार करने की मांग की. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.
कृषि भूमि बचाने और रजिस्ट्री शुरू करने की मांग
धरनार्थियों ने मांग की कि प्रस्तावित टाउनशिप के लिए चिन्हित उपजाऊ कृषि भूमि को कृषि विकास के लिए सुरक्षित रखा जाए. साथ ही बंद भूमि रजिस्ट्री को तत्काल शुरू किया जाए और भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्स्थापन से जुड़े मामलों में वर्ष 2013 के कानून का पूरी पारदर्शिता के साथ पालन सुनिश्चित किया जाए.
नारों के साथ दिखाई एकजुटता
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने “जमीन हमारी, अधिकार हमारा” और “किसान विरोधी नीतियां वापस लो” जैसे नारों के साथ अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया. किसानों ने कहा कि वे अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे.
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लेखक के बारे में
By निखिल अनुराग
मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.
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