Patna News: प्लास्टिक लौटाओ, इनाम पाओ! पटना में लगी स्मार्ट मशीनें, बोतल के बदले मिलेंगे ग्रीन प्वाइंट और कूपन

Patna News: प्लास्टिक लौटाओ, इनाम पाओ! पटना में लगी स्मार्ट मशीनें, बोतल के बदले मिलेंगे ग्रीन प्वाइंट और कूपन
Patna News : यह व्यवस्था न केवल प्लास्टिक कचरे को रीसायकल करेगी, बल्कि लोगों को स्वच्छता मिशन में सक्रिय भागीदार भी बनाएगी. बोतलें अब सिर्फ कचरा नहीं रहेंगी, बल्कि इनाम कमाने का मौका बनेंगी.
Patna News : शहर को प्लास्टिक कचरे से छुटकारा दिलाने और लोगों को स्वच्छता में भागीदार बनाने के लिए पटना नगर निगम ने एक अनोखी पहल शुरू की है. अब अगर आप इस्तेमाल की हुई प्लास्टिक बोतल या कैरी बैग मशीन में डालेंगे, तो बदले में आपको मिलेंगे ग्रीन प्वाइंट और कूपन—जिन्हें आप बाद में ऑनलाइन या स्टोर पर कैश की तरह इस्तेमाल कर सकेंगे.
इस्तेमाल की हुई प्लास्टिक बोतलें देने पर मिलेंगे पैसे
शहर को प्लास्टिक कचरे से मुक्त कराने और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए पटना नगर निगम एक नयी पहल कर रहा है. शहर में पांच जगहों पर रिवर्स वेंडिंग मशीन (आरवीएम) लगायी जायेंगी. ये मशीनें लोगों से इस्तेमाल की हुई प्लास्टिक बोतलें और कैरी बैग वापस लेंगी और बदले में उन्हें कुछ प्रोत्साहन राशि या ग्रीन प्वाइंट दिये जायेंगे.
नगर आयुक्त अनिमेष कुमार पराशर ने बताया कि शुरुआती चरण में जेपी गंगा पथ पर दो, मौयालोक कॉम्प्लेक्स व पटना चिड़ियाघर के गेट नंबर एक- एक और बोरिंग रोड चौराहे पर एक आरवीएम मशीन लगेगी. इन मशीनों का रखरखाव मेसर्स बायोक्रक्स प्राइवेट लिमिटेड करेगा, जो तीन साल की वारंटी और उसके बाद वार्षिक रखरखाव की सुविधा भी देगा.
इस तरह काम करेगी रिवर्स वेडिंग मशीन
आरवीएम अत्याधुनिक डिवाइस है. लोग खाली बोतल इस मशीन में डालेंगे, मोबाइल नंबर डालेंगे और मशीन रीसाइकिल होने वाली बोतलों की संख्या के आधार पर उन्हें प्रोत्साहन राशि देगी. एक बोतल पर मिलेगा एक ग्रीन अंक व पांच अंक पर एक कूपन दिया जायेगा. यह उनके मोबाइल नंबर से जुड़े अकाउंट में जमा हो जायेगा, जिसे बाद में ऑनलाइन या स्टौर पर भुनाया जा सकता है. मशीन में क्रशर भी लगा है, जो बोतलों को तुरंत छोटा कर देता है.
हर साल 52 हजार लीटर तक पानी की होगी बचत
निगम के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विशेषज्ञ अरविंद कुमार ने बताया कि इस मशीन से हर साल 42 टन तक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन नहीं होगा.. वहीं, 700 लीटर तक अतिरिक्त ईंधन जलने से बचेगा और रीसाइकिलिंग में 52 हजार लीटर तक पानी की बचत होगी.
यह प्रक्रिया पारदर्शी होगी, जिसमें जमा हुए कचरे की ऑनलाइन ट्रैकिंग भी हो सकेगी. इसमें इंटरनेट ऑफ थिंग्स का इस्तेमाल किया गया है, जो डाटा साझा व निगरानी में मदद करती है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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