वर्दी की आड़ में ड्रग्स का धंधा: 25 करोड़ के स्मैक कांड में फरार बिहार पुलिस का सिपाही रांची से गिरफ्तार

Published by : Abhinandan Pandey Updated At : 21 May 2026 7:09 PM

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सांकेतिक तस्वीर

25 करोड़ रुपये के स्मैक कांड में फरार मुख्य मास्टरमाइंड और बिहार पुलिस के सिपाही ऋषिकेश क्रांतिकारक उर्फ अनीश को पुलिस ने रांची से गिरफ्तार किया. वह पुलिस वर्दी की आड़ में तस्करी करवाता था. जांच में पटना और यूपी से जुड़े बड़े ड्रग नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसका संचालन जेल से हो रहा था.

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Patna News: (शुभम कुमार की रिपोर्ट) 25 करोड़ रुपये के भारी-भरकम स्मैक कांड में लंबे समय से फरार चल रहे सिंडिकेट के मुख्य मास्टरमाइंड और सिपाही ऋषिकेश क्रांतिकारक उर्फ अनीश को पुलिस ने झारखंड के रांची से गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार आरोपित मूल रूप से नवादा जिले का निवासी है और बिहार पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात था. गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे कड़े सुरक्षा घेरे में न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है.

खाकी की आड़ में सुरक्षित चलती थी तस्करी

सड़क मार्ग से जब भी स्मैक की बड़ी खेप एक जगह से दूसरी जगह भेजी जाती थी, तब ऋषिकेश खुद पुलिस की वर्दी पहनकर तस्करी की गाड़ी में साथ रहता था. खाकी वर्दी सामने होने के कारण पुलिस जांच और नाकेबंदी के दौरान गाड़ियां बिना किसी चेकिंग के आसानी से निकल जाती थीं. इसी वीआइपी सुरक्षा का फायदा उठाकर यह सिंडिकेट करोड़ों रुपये के काले कारोबार को अंजाम दे रहा था.

ट्रांसफर के बाद से ही चल रहा था फरार

ऋषिकेश क्रांतिकारक पहले गया जिले में पदस्थापित था. जुलाई 2025 में प्रशासनिक आधार पर उसका ट्रांसफर भागलपुर के लिए किया गया था. लेकिन उसने नए स्थान पर अपनी आमद दर्ज नहीं कराई और विभागीय नियमों को ताक पर रखकर फरार हो गया. पुलिस ने जब पटना के आलमगंज और रामकृष्ण नगर स्थित ठिकानों पर छापेमारी की, तो वहां से आरोपित सिपाही के बैंक दस्तावेज, चेकबुक और कई सर्विस रिकॉर्ड बरामद हुए, जिससे इस रैकेट में उसकी सीधी संलिप्तता के पुख्ता सबूत मिले.

बेऊर जेल में बंद कुख्यात दादा के हाथ में पूरे नेटवर्क का रिमोट

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे रैकेट का रिमोट कंट्रोल पटना के बेउर जेल में बंद एक कुख्यात अपराधी के हाथ में था, जिसे इस नेटवर्क में दादा के नाम से जाना जाता है. इस काले कारोबार का जाल सिर्फ पटना तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार उत्तर प्रदेश और बिहार की जेलों से भी जुड़े हुए हैं. पूछताछ में सामने आया है कि स्मैक तैयार करने के लिए रॉ मटेरियल (कच्चा माल) उत्तर प्रदेश के मुगलसराय और गाजीपुर से मंगाया जाता था. इसके बाद पटना के आलमगंज और रामकृष्ण नगर इलाकों में इसकी प्रोसेसिंग की जाती थी और फिर उसे बाजार में सप्लाई किया जाता था. इस माल को लाने और ले जाने के लिए ट्रेन, सड़क मार्ग और कूरियर सेवाओं का इस्तेमाल होता था.


पहले भी हो चुकी हैं इस केस में गिरफ्तारियां

पटना के आलमगंज थाना कांड संख्या 294/26 के तहत दर्ज इस मामले में पुलिस पहले भी बड़ी कार्रवाई कर चुकी है. इस केस में समस्तीपुर के रहने वाले जितेंद्र कुमार और जहानाबाद के नीतीश कुमार को भारी मात्रा में स्मैक के साथ गिरफ्तार कर पहले ही जेल भेजा जा चुका है. इसके अलावा पटनदेवी इलाके के राहुल यादव समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ भी नामजद प्राथमिकी दर्ज है.

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अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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