खुशी अपहरण मामले में हुई सिर्फ कागजी कार्रवाई, एसएसपी मुजफ्फरपुर पर भड़का कोर्ट, केस सीबीआई को सौंपा

CBI Investigation: पटना हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर के खुशी कुमारी अपहरण मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है. कोर्ट ने पुलिस की ढिलाई और सबूत छिपाने की कोशिश पर नाराजगी जताते हुए एसएसपी को दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने और जल्द से जल्द सीबीआई को सारे दस्तावेज मुहैया कराने का आदेश दिया है.
CBI Investigation: पटना हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर जिले के राजन साह की 6 वर्षीय बेटी खुशी कुमारी के चर्चित अपहरण मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया है. जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अब इस कांड की निष्पक्ष जांच केंद्रीय एजेंसी से कराना जरूरी है. कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह जल्दी कार्रवाई कर बच्ची को खोजने के लिए कदम उठाये.
पुलिसकर्मियों पर होगी कार्रवाई
हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर के एसएसपी को भी सख्त निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने कहा है कि मामले में जिन पुलिसकर्मियों की लापरवाही सामने आई है, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए. एसएसपी को आदेश दिया गया है कि इस केस से जुड़े सभी दस्तावेज, साक्ष्य और रिकॉर्ड सीबीआई को सौंपे जाएं. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सीबीआई और सीएफएसएल नई दिल्ली के निदेशक को भी पक्षकार बनाने का निर्देश दिया था. इससे पहले एसएसपी जयंतकांत ऑनलाइन माध्यम से कोर्ट में उपस्थित हुए थे.
वकील ने कोर्ट में क्या बताया
वकील ओम प्रकाश कुमार ने कोर्ट को बताया कि मुजफ्फरपुर पुलिस की ओर से अब तक सिर्फ कागजी कार्रवाई की गई है. उन्होंने कहा कि लगभग तीन महीने से पॉलीग्राफी टेस्ट का हवाला देकर जांच को आगे नहीं बढ़ाया गया. वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि एक ऑडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है, जिसमें संदिग्ध राहुल कुमार की आवाज होने का दावा किया गया है और वह खुशी के बारे में जानकारी रखता है.
कोर्ट ने पहले आदेश दिया था कि ऑडियो क्लिप एसएसपी को दी जाए और उसकी पुष्टि कर आगे कार्रवाई की जाए. लेकिन एसएसपी द्वारा दाखिल शपथ पत्र में उस ऑडियो का कोई जिक्र नहीं किया गया.
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पूरा मामला जानिए
यह मामला 16 फरवरी 2021 को पांच वर्षीय खुशी के अपहरण से जुड़ा है. घटना के बाद से अब तक बच्ची का कोई सुराग नहीं मिल सका है. खुशी के पिता राजन साह मुजफ्फरपुर पुलिस की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निष्पक्ष जांच और बच्ची की जल्द बरामदगी की मांग की थी.
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि 14 अक्टूबर 2022 तक सभी कागजात सीबीआई को उपलब्ध कराए जाएं और सीबीआई के वकील को सुनवाई में उपस्थित रहने को कहा था. कोर्ट ने माना कि स्थानीय पुलिस से मामले का उद्भेदन संभव नहीं है और जांच सीबीआई को सौंप दी.
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लेखक के बारे में
By Paritosh Shahi
परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.
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