वैशाली-सारण से पटना में शामिल जमीन पर बने 259 मकानों पर चलेगा बुलडोजर, गंगा किनारे की सरकारी जमीन खाली कराएगा प्रशासन

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बुलडोजर एक्शन की सांकेतिक तस्वीर

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Bihar News: वैशाली और सारण से पटना जिले में शामिल की गई गंगा किनारे की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है. 259 मकान मालिकों को नोटिस जारी किया गया है. 5 अगस्त को सुनवाई होगी, जिसके बाद अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी.

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Bihar News: पटना में गंगा किनारे भद्रघाट से कंगन घाट तक सरकारी जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराने की तैयारी शुरू हो गई है. जिला प्रशासन ने इस जमीन पर बने 259 मकानों के मालिकों को नोटिस जारी किया है. सभी को अपनी जमीन पर दावेदारी के साक्ष्य के साथ 5 अगस्त को सुनवाई में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है. सुनवाई के बाद अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जाएगी.

5 अगस्त को होगी सुनवाई

पटना सिटी के अंचलाधिकारी (सीओ) 5 अगस्त को सुबह 11 बजे से मामले की सुनवाई करेंगे. जिन लोगों को नोटिस भेजा गया है, उन्हें जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज पेश करने होंगे. सुनवाई के बाद सीओ आदेश जारी करेंगे. इसके आधार पर जिला प्रशासन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करेगा.

54 बाउंड्रीवाल पर भी प्रशासन की नजर

प्रशासन के अनुसार इस इलाके में 54 बाउंड्रीवाल भी बनाई गई हैं. हालांकि, इन्हें बनाने वालों की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है. ऐसे लोगों के लिए आम सूचना जारी की गई है. उनसे भी सुनवाई के दिन उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया है.

2021 में पटना जिले में शामिल हुई थी यह जमीन

गंगा के दक्षिणी किनारे स्थित इस भूमि पर पहले सारण और वैशाली जिले का प्रशासनिक नियंत्रण था. लेकिन क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के कारण निगरानी और प्रशासनिक कार्यों में दिक्कत होती थी. इसे देखते हुए राज्य सरकार ने नवंबर 2021 में बड़ा फैसला लिया.

सरकार ने सारण की 3,212 एकड़ और वैशाली की 331.5 एकड़ जमीन को पटना जिले में शामिल कर दिया. इस क्षेत्र में जेपी सेतु, पहलेजा घाट और कंगन घाट के आसपास की जमीन भी शामिल है.

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पहले भी चला था अतिक्रमण हटाने का अभियान

जमीन पटना जिले में आने के बाद प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया था. उस दौरान बड़ी संख्या में कच्चे निर्माण हटाए गए थे. कुछ पक्के निर्माण भी पटना हाईकोर्ट के आदेश पर तोड़े गए थे.

हालांकि, जमीन पर दावा करने वाले कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे. इसके बाद तोड़फोड़ की कार्रवाई रोक दी गई थी.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फिर शुरू हुई प्रक्रिया

अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी है. अशोक कुमार सिन्हा बनाम भारत सरकार एवं अन्य मामले में 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था. इसके बाद बिहार सार्वजनिक भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1956 के तहत नोटिस जारी कर संबंधित लोगों को सुनवाई का मौका दिया जा रहा है. सुनवाई पूरी होने के बाद अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जाएगी.

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अभिनंदन पांडेय

लेखक के बारे में

By अभिनंदन पांडेय

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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