कैंपस : इ-शिक्षा पोर्टल पर पटना जिले में 3500 में मात्र 856 निजी स्कूलों ने ही कराया रजिस्ट्रेशन

Updated at : 23 May 2024 7:23 PM (IST)
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कैंपस : इ-शिक्षा पोर्टल पर पटना जिले में 3500 में मात्र 856 निजी स्कूलों ने ही कराया रजिस्ट्रेशन

राज्य के सभी निजी स्कूलों को इ-शिक्षा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा. अगर वे इ-शिक्षा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं करते हैं, तो उनके द्वारा स्टूडेंट्स को जारी किया जाने वाला टीसी मान्य नहीं होगा.

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-बिना रजिस्ट्रेशन वाले निजी स्कूलों का टीसी मान्य नहीं-फर्जी टीसी जारी करने वाले निजी स्कूलों पर कार्रवाई की तैयारी, हो सकती है प्राथमिकी

संवाददाता, पटना

राज्य के सभी निजी स्कूलों को इ-शिक्षा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा. अगर वे इ-शिक्षा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं करते हैं, तो उनके द्वारा स्टूडेंट्स को जारी किया जाने वाला टीसी मान्य नहीं होगा. अगर टीसी जारी करते हैं, तो वह अपराध की श्रेणी में माना जायेगा. विभाग उन पर फर्जी टीसी जारी करने के आरोप में निजी स्कूल के संचालकों को पर प्राथमिकी भी कर सकता है. रजिस्ट्रेशन नहीं कराने वाले निजी स्कूलों पर शिक्षा विभाग कार्रवाई करेगा. पटना जिला शिक्षा कार्यालय के अनुसार जिले में पहली से लेकर आठवीं तक की पढ़ाई करने वाले 35 सौ स्कूल संचालित हो रहे है, जिनमें से मात्र 856 निजी स्कूलों ने ही इ-शिक्षा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया है. विभाग का कहना है कि पटना जिले में गली-मुहल्ले में नर्सरी से लेकर आठवीं तक की पढ़ाई करने वाले निजी स्कूल संचालित किये जा रहे हैं. इन स्कूलों में न तो जगह होता है और न ही बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई व्यवस्था. स्कूल करकट में संचालित किये जा रहे हैं. इनके पास बच्चों के खेलने के लिए परिसर भी नहीं है. अभिभावकों को भ्रमित कर बच्चों को नामांकन करा लिया जाता है. ऐसे स्कूल टीसी जारी करने के अधिकारी नहीं है. क्योंकि इनके पास सरकार द्वारा जारी रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं होता है.

पटना सिटी के एक बच्चे का नवोदय विद्यालय में नहीं हो पाया नामांकन

जिला शिक्षा कार्यालय के अधिकारी बताते हैं कि कुछ दिन पहले पटना सिटी के निजी स्कूल में पढ़ रहे पांचवीं कक्षा के बच्चे ने नवोदय विद्यालय में कक्षा छह में नामांकन के लिए प्रवेश परीक्षा दी थी. वह प्रवेश परीक्षा में पास भी कर गया. उक्त निजी विद्यालय ने बच्चे को पांचवीं कक्षा का टीसी जारी कर दिया. नवोदय विद्यालय में नामांकन के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी का हस्ताक्षर चाहिए था. जब उक्त निजी स्कूल की सूची इ-शिक्षा पोर्टल पर देखी गयी, तब उसका नाम कहीं नहीं मिला. स्कूल की लापरवाही के कारण बच्चे का नवोदय विद्यालय में नामांकन नहीं हो पाया. इस तरह के सैकड़ों निजी स्कूल हैं जो बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं.

पहले पता करें शिक्षा विभाग से स्कूल रजिस्टर्ड है या नहीं

जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे निजी स्कूलों पर कार्रवाई की जायेगी. अभिभावक से अपील है कि वे बच्चों का नामांकन कराने से पहले उक्त निजी स्कूल के बार में पता कर लें कि वह विभाग से रजिस्टर्ड है या नहीं.

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