Bihar News: बिहार के इन कपड़ों की खूब हो रही ऑनलाइन बिक्री, तमिलनाडु तक गई बिहारी गमछे की पहुंच

Bihar News: बिहार खादी के कपड़े अब सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहे, बल्कि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से देशभर में पहुंच रहे हैं. खासकर दक्षिण भारत के तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटका और केरल में खादी उत्पादों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. बिहारी गमछा, सिल्क साड़ियां और अन्य पारंपरिक कपड़े अब ऑनलाइन खरीद-दारों के बीच हिट बन गए हैं, जिससे बिहार खादी की बिक्री में रिकॉर्ड में तेजी देखी जा रही है.
Bihar News: बिहार राज्य खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बिहार खादी के उत्पाद अब देशभर में आसानी से उपलब्ध हैं. इस प्लेटफार्म के जरिए खादी उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री में बढ़ोतरी देखी जा रही है, और खासकर दक्षिण भारत के राज्यों में इनकी मांग ने नई ऊंचाइयों को छुआ है. बिहार खादी के ई-कॉमर्स टीम के मोहम्मद अफजल आलम ने बताया कि दक्षिण क्षेत्र ने कुल बिक्री में सबसे बड़ा योगदान दिया है, जिसका हिस्सा 34% रहा. इस क्षेत्र में तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटका और केरल के लोग प्रमुख रूप से खादी उत्पाद ऑनलाइन खरीद रहे हैं.
उत्तर और पूर्व भारत में भी खादी की लोकप्रियता
दक्षिण भारत के बाद, उत्तर भारत में बिहार खादी के उत्पादों की बिक्री का हिस्सा 28% रहा. इसमें बिहार और उत्तर प्रदेश सबसे आगे हैं, जहां लोग पारंपरिक खादी के कपड़े और अन्य उत्पाद खरीदने में खासा रुचि दिखा रहे हैं. पूर्व भारत में बिक्री का हिस्सा 10% रहा, जिसमें पश्चिम बंगाल ने सबसे अधिक खादी उत्पाद खरीदे. इस क्षेत्र में खादी के प्रति लोगों की रुचि धीरे-धीरे बढ़ रही है और यह दर्शाता है कि पारंपरिक वस्त्र अब यहां भी पसंद किए जा रहे हैं.
पश्चिम भारत में बढ़ती मांग
पश्चिम भारत में बिहार खादी उत्पादों की मांग 15% रही. खासकर महाराष्ट्र में ऑनलाइन बिक्री सबसे अधिक रही. लोग बिहारी गमछा, सिल्क साड़ियां और अन्य पारंपरिक खादी उत्पादों को खरीदकर अपने जीवनशैली में खादी को शामिल कर रहे हैं. इस बढ़ती मांग से यह साफ़ होता है कि खादी सिर्फ एक वस्त्र नहीं, बल्कि अब फैशन और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन गई है.
बिहारी गमछे और सिल्क साड़ियों की बढ़ी डिमांड
बिहारी गमछा और सिल्क साड़ियां ऑनलाइन खरीदारों के बीच सबसे अधिक पसंदी जाने वाले उत्पाद बन चुके हैं. राज्य सरकार द्वारा खादी के प्रचार-प्रसार और ब्रांडिंग के प्रयासों ने इसे और लोकप्रिय बनाया है. इन प्रयासों की वजह से लोग पारंपरिक खादी वस्त्रों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल कर रहे हैं, और यह दिखाता है कि खादी अब केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि संस्कृति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गई है.
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By JayshreeAnand
कहानियों को पढ़ने और लिखने की रुचि ने मुझे पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. सीखने और समझने की इस यात्रा में मैं लगातार नए अनुभवों को अपनाते हुए खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करती हूं. वर्तमान मे मैं धार्मिक और सामाजिक पहलुओं को नजदीक से समझने और लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हूं.
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