पटना: सफाई व्यवस्था में बदलाव, प्राइवेट एजेंसी अब संभालेगी कमान; हर महीने 18.4 करोड़ बचाने का दावा
सांकेतिक तस्वीर
पटना नगर निगम कचरा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक नया मास्टर प्लान तैयार कर रहा है. इस योजना के तहत, कचरा उठाव का जिम्मा एक निजी एजेंसी को सौंपा जाएगा, जिससे निगम को हर महीने करोड़ों की बचत होने की उम्मीद है. हालांकि, कर्मचारियों के समायोजन पर अभी पेंच फंसा हुआ है.
Patna Nagar Nigam : पटना. राजधानी में घर-घर से कचरा उठाने और सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पटना नगर निगम नया मास्टर प्लान तैयार कर रहा है. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत शहर में कचरा उठाव का पूरा काम एक निजी एजेंसी को सौंपने की तैयारी है. निगम का आकलन है कि एजेंसी के आने के बाद हर माह करीब 18.4 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है.
नई व्यवस्था लागू होने पर नगर निगम को कचरा उठाव के लिए नए वाहन खरीदने की जरूरत नहीं होगी. एजेंसी को ही कचरा उठाने और उससे जुड़ी पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी दी जाएगी. फिलहाल सफाई व्यवस्था पर निगम को हर माह करीब 30 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं. वहीं, प्रस्तावित योजना के तहत चार वर्षों में करीब 555.32 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है.
हालांकि, इस योजना के लिए पहले जारी किया गया टेंडर फिलहाल रद्द कर दिया गया है. नगर निगम का मानना है कि इतने बड़े बदलाव से पहले जनप्रतिनिधियों की सहमति जरूरी है. अब प्रस्ताव को पहले सशक्त स्थायी समिति और इसके बाद नगर निगम की बोर्ड बैठक में रखा जाएगा.
बोर्ड बैठक के बाद ही दोबारा जारी होगा टेंडर
नगर निगम की बोर्ड बैठक में सभी 75 वार्डों के पार्षदों से प्रस्ताव को लेकर सुझाव लिये जाएंगे. सफाई व्यवस्था, खर्च, कर्मचारियों की स्थिति और निजी एजेंसी की जिम्मेदारी से जुड़े सभी पहलुओं पर चर्चा होगी.
जनप्रतिनिधियों की सहमति बनने के बाद ही निजी एजेंसी के चयन के लिए नया टेंडर जारी किया जाएगा. निगम की कोशिश है कि नई व्यवस्था लागू करने से पहले उससे जुड़े सभी व्यावहारिक और वित्तीय पहलुओं को स्पष्ट कर लिया जाए, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो.
कर्मचारियों के समायोजन पर फंसा पेंच
टेंडर रद्द करने की बड़ी वजह नगर निगम में काम कर रहे सफाई कर्मचारियों के वेतन और उनके समायोजन से जुड़ा मामला भी है. वर्तमान में निगम में तीन तरह के कर्मचारी काम कर रहे हैं. इनमें 4,822 आउटसोर्स कर्मी, 647 स्थायी कर्मचारी और 3,816 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी शामिल हैं.
हाल में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की हड़ताल के बाद उनके मानदेय और महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का आश्वासन दिया गया था. इसके बाद कर्मचारियों से जुड़ा निगम का सालाना खर्च करीब 163 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.
अब बोर्ड बैठक में यह तय किया जाना है कि मौजूदा कर्मचारियों के वेतन और प्रबंधन की जिम्मेदारी नगर निगम अपने स्तर से संभालेगा या फिर नई निजी एजेंसी को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी. इस मामले में स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही टेंडर की प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाएगी.
375 सेक्टर में होगा कचरा उठाव
प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत पटना नगर निगम के सभी 75 वार्डों को शामिल किया जाएगा. शहर को कुल 375 सेक्टर में बांटकर नियमित रूप से कचरा उठाने की योजना है. एजेंसी को घरों के साथ-साथ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से भी रोजाना कचरा उठाने की जिम्मेदारी दी जाएगी.
आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के दायरे में शहर के करीब 4 लाख 4 हजार 509 घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल होंगे. इनमें 3 लाख 42 हजार से अधिक रिहाइशी मकान, हॉस्टल और अपार्टमेंट हैं. इसके अलावा 61 हजार से ज्यादा दुकानों और अन्य व्यावसायिक संस्थानों से भी कचरा उठाया जाएगा.
इनमें अस्पताल, होटल, मॉल, सरकारी कार्यालय और पेट्रोल पंप जैसी जगहें भी शामिल हैं. निगम की योजना के मुताबिक सभी चिन्हित जगहों से नियमित रूप से कचरा उठाया जाएगा, जिससे शहर में कचरा जमा होने की समस्या को कम किया जा सके.
छोटे मकानों की संख्या सबसे ज्यादा
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में शामिल संपत्तियों में सबसे ज्यादा संख्या छोटे मकानों की है. शहर में 2.07 लाख से अधिक ऐसे मकान हैं, जिनका क्षेत्रफल 100 वर्गमीटर तक है.
नयी व्यवस्था में घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से कचरा उठाने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने पर जोर दिया जा रहा है. निगम का उद्देश्य है कि कचरा उठाव के लिए एक ऐसी व्यवस्था तैयार हो, जिसमें नियमितता के साथ निगरानी और जवाबदेही भी तय की जा सके.
एजेंसी आने से खर्च घटाने की तैयारी
पटना नगर निगम की ओर से प्रस्तावित निजी एजेंसी मॉडल का मुख्य उद्देश्य सफाई व्यवस्था को बेहतर करने के साथ निगम के खर्च को कम करना है. निगम के आकलन के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था की तुलना में नई व्यवस्था से हर महीने करीब 18.4 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है.
हालांकि, एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपने से पहले कर्मचारियों के भविष्य, वेतन भुगतान, वाहनों की व्यवस्था और सभी 75 वार्डों में नियमित कचरा उठाव जैसे मुद्दों पर फैसला होना बाकी है. बोर्ड बैठक में जनप्रतिनिधियों की राय के बाद ही आगे की तस्वीर साफ होगी.
फिलहाल टेंडर रद्द होने के बाद निगम खर्च और कर्मचारियों की संख्या का विस्तृत आकलन कर रहा है. सशक्त स्थायी समिति और बोर्ड बैठक से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद ही निजी एजेंसी के लिए नया टेंडर जारी किया जाएगा. इसके बाद ही यह तय होगा कि राजधानी की सफाई व्यवस्था में प्रस्तावित नया मॉडल कब से लागू होगा और इससे निगम को वास्तविक रूप से कितनी आर्थिक बचत मिलती है.
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लेखक के बारे में
By हिमांशु देव
हिमांशु देव सितंबर 2023 से पटना में प्रभात खबर से जुड़कर प्रिंट और डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. कला, साहित्य-संस्कृति, नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़ी खबरों पर प्रमुखता से काम किया है. महिला, युवा और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना प्राथमिकता में शामिल है. व्यक्तिगत तौर पर किताबें पढ़ना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है.
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