बिहार से ज्यादा केरल, पंजाब की माइग्रेशन दर

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बिहार से ज्यादा केरल, पंजाब की माइग्रेशन दर

डीएमआइ), पटना में बुधवार को माइग्रेशन, मोबिलिटी एंड वेलबिइंग (प्रवासन, गतिशिलता व कल्याण) विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया.

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पटना.

विकास प्रबंधन संस्थान (डीएमआइ), पटना में बुधवार को माइग्रेशन, मोबिलिटी एंड वेलबिइंग (प्रवासन, गतिशिलता व कल्याण) विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया. इसमें मानव विकास संस्थान, नयी दिल्ली के विजिटिंग प्रोफेसर व देश के जाने-माने माइग्रेशन विशेषज्ञ प्रो राम बी भगत ने प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि माइग्रेशन और विकास एक-दूसरे का पर्याय है. विकास और बेहतर अवसर की तलाश में जन्म स्थान को छोड़ना स्वभाविक प्रक्रिया है. यदि आबादी को अपने जन्म स्थान पर बेहतर अवसर की संभावना दिखेगी, तो वह लौटती भी है. इसका सबसे बेहतर उदाहरण द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप के देशों में बड़ी संख्या में दूसरे देशों में रहने वाले लोगों का अपने देश लौटना कहा जा सकता है. बिहार और देश में युवा आबादी अधिक है, जिसके कारण माइग्रेशन भी अधिक होगा. देश में कई राज्यों का माइग्रेशन रेट (प्रवासन दर) बिहार से अधिक है. दिल्ली, केरल, हरियाणा, पंजाब आदि तेज विकास वाले राज्यों का माइग्रेशन रेट बिहार से अधिक है. बिहार की जनसंख्या अधिक है, इस कारण पलायन करने वाले संख्या में अधिक दिखते हैं. स्वागत सत्र में प्रो सूर्यभूषण ने अतिथि का परिचय कराते हुए कहा कि प्रो भगत अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (आइआइपीएस), मुंबई में प्रवासन और शहरी अध्ययन विभाग में दो दशक तक प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रहे हैं. मौके पर निदेशक प्रो देबीप्रसाद मिश्रा, डीन एकेडमिक प्रो शंकर पूर्व, प्रो गौरव मिश्रा, प्रो श्रीधर तेलीदेवरा आदि मौजूद थे. आनलाइन माध्यम से भी कई संस्थानों के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी कार्यक्रम से जुड़े.

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