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Patna News : इंसान को बदलने की राजनीति करते थे जेपी, कभी नहीं लड़े चुनाव: हरिवंश

Updated at : 11 Jan 2025 1:34 AM (IST)
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Patna News : इंसान को बदलने की राजनीति करते थे जेपी, कभी नहीं लड़े चुनाव: हरिवंश

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने पुनर्प्रकाशित रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा संपादित पुस्तक ‘जयप्रकाश की विचारधारा’ का विमाेचन किया. उन्होंने कहा कि जेपी ने युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया, ताकि वे बेहतर इंसान बन सकें.

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संवाददाता, पटना : राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि रामवृक्ष बेनीपुरी जैसा विलक्षण व्यक्ति, चिंतक, लेखक भारत में कम हुए हैं. वहीं, जब जन्म के बाद आंखें खुलीं और थोड़ी से चेतना हुई, तो जिसको देखा, वो थे जयप्रकाश नारायण थे. वह शुक्रवार को जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान में रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा संपादित पुस्तक ‘जयप्रकाश की विचारधारा’ का विमाेचन करने के बाद संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि गांव में हम दोनों के घर एक जगह ही हैं. जेपी इंसान को बदलने की राजनीति करते थे. उन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा और न ही कभी सदन में गये. वह नये समाज के निर्माण के लिए काम कर रहे थे. उन्होंने कभी किसी की आलोचना नहीं की. जेपी ने युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया, ताकि वे बेहतर इंसान बन सकें और बेहतर इंसान ही एक अच्छे समाज का निर्माण कर सकता है.

नीतीश कुमार आज भी जेपी के अनुयायी बने हुए हैं

हरिवंश ने कहा कि जेपी जातीय, आर्थिक व लैंगिक संतुलन के पुरोधा थे. आंदोलन से बहुत लोग निकले, लेकिन सीएम नीतीश कुमार आज भी उनके अनुयायी बने हुए हैं. उन्होंने बिहार में जातीय, आर्थिक व लैंगिक न्याय का जो संतुलन बनाया, उसका परिणाम यह है कि बिहार निरंतर विकास कर रहा है. बिहार में जहां जेपी के गांव से पटना आने में दो-दो दिन लग जाते थे, वहीं अब पूरे बिहार से लोग आसानी से कम समय में पटना पहुंच जाते हैं. पूर्व शिक्षा मंत्री रामचंद्र पूर्वे ने कहा कि गांधी मैदान में 13 अप्रैल, 1946 को जेपी के लिए जितना बड़ा जनसमूह उमड़ा, उतनी बड़ी जनसभा आज तक नहीं देखी गयी. इस पुस्तक के पुनर्प्रकाशन को लेकर बेनीपुरी के नाती राजीव महंत ने भी कहा कि यह उनके लिए गर्व का पल है.

जेल से जेपी को भगाने में बेनीपुरी की भूमिका को याद किया

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बिहार विधानसभा के उपसभापति प्रो रामवचन राय ने कहा कि इस पुस्तक के पुनर्प्रकाशन से एक खोई हुई रोशनी लौट आयी है. उन्होंने जेल से जेपी को भगाने में बेनीपुरी की भूमिका को याद किया और जेपी के प्रति उनके समर्पण की चर्चा की. वहीं, संस्थान के निदेशक डॉ नरेंद्र पाठक ने कहा कि यह पुस्तक 1948 में प्रकाशित हुई थी और अब इसकी पुनर्प्रकाशन से आम लोग जेपी की कृतियों से परिचित हो सकेंगे. मंच संचालन लेखक मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने किया. मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ संजय पासवान, शिक्षा विभाग के सचिव बैजनाथ यादव, डॉ रेखा कुमारी, दीपक कुमार सिंह, प्रो वीरेंद्र झा, डॉ मधुबाला, डॉ विद्यार्थी विकास, भैरव लाल दास, मिथिलेश, रजनीश उपाध्याय, अरुण नारायण, धीरज कुमार सिंह व अन्य मौजूद थे.

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