Patna News : आइजीआइएमएस साथी की मौत के बाद भड़के एमबीबीएस छात्र, पांच घंटे इमरजेंसी ठप, डायरेक्टर के आवास को घेरा

Edited by ANAND TIWARY
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सड़क हादसे में घायल आइजीआइएमएस के एमबीबीएस छात्र की मौत के बाद साथी छात्रों ने निदेशक के आवास को घेर कर जम कर हंगामा व तोड़फोड़ की. इससे छह ऑपरेशन टालने पड़े और इमरजेंसी में 50 से अधिक मरीजों का इलाज नहीं हो सका.

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संवाददाता, पटना : आइजीआइएमएस में एक एमबीबीएस छात्र की मौत के बाद साथी छात्रों ने गुरुवार को हंगामा करते हुए निदेशक आवास को घेर लिया. नाराज छात्र निदेशक प्रो. डॉ बिंदे कुमार पर हादसे में घायल छात्र को अस्पताल में भर्ती नहीं करने व बदसलूकी का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन करने लगे. छात्रों ने बताया कि मृत छात्र अभिनव पांडे के पिता सुजीत कुमार पांडे पटना में ही आर्थिक अपराध इकाई में इंस्पेक्टर हैं. अभिनव दो भाई व एक बहन में सबसे बड़ा था. सड़क दुर्घटना के बाद अभिनव को अस्पताल लाने के लिए एंबुलेंस की मांग की गयी, तो उस समय भी एंबुलेंस नहीं मिला. जैसे-तैसे गंभीर हालत में उसे आइजीआइएमएस लाया गया, लेकिन इमरजेंसी में बेड नहीं मिला. इसके बाद पास के पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान देर रात 2:30 बजे उसकी मौत हो गयी. नाराज छात्रों ने निदेशक आवास के पास हंगामा करते हुए तोड़फोड़ की.

इमरजेंसी में नहीं हुआ इलाज, 50 से अधिक मरीज बिना भर्ती लौटे

नारेबाजी कर रहे छात्रों के समर्थन में रेजीडेंट डॉक्टर भी आ गये. रेजिडेंट डॉक्टरों ने इमरजेंसी में कामकाज ठप कर दिया. करीब पांच घंटे तक इमरजेंसी में इलाज नहीं हुआ. करीब 50 गंभीर मरीजों को बिना इलाज कराये लौटना पड़ा. यहां तक कि जूनियर डॉक्टरों ने ओटी में भी कार्य बहिष्कार कर दिया, जिससे छह से अधिक सर्जरी टालनी पड़ी. हंगामे के चलते गंभीर मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा.

तीन दिनों से निजी अस्पताल भर्ती था छात्र, फिर भी इमरजेंसी में नहीं दिया गया बेड

छात्रों ने बताया कि अभिनव बीते तीन दिनों से पारस अस्पताल में भर्ती था. इस दौरान आइजीआइएमएस में बेड के लिए परिजनों के साथ कई बार हमने संपर्क किया, इसके बावजूद बेड नहीं दिया गया. छात्रों का आरोप है कि अस्पताल में दलाली और सिफारिश के आधार पर बेड उपलब्ध कराये जाते हैं. आम छात्रों को न तो प्राथमिकता मिलती है और न ही समय पर इलाज. प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह भी कहा कि निजी अस्पताल में जब मौत हो गयी, तो शव को घर ले जाने के लिए संस्थान से एंबुलेंस की मांग की गयी, लेकिन एंबुलेंस नहीं दिया गया.

12 घंटे तक आवास में बंद रहे निदेशक, प्रदर्शन के बाद भी नहीं आये बाहर

साथी छात्र की मौत की खबर सुन कर एमबीबीएस व पीजी के सभी छात्र देर रात से ही परिसर में जुटने लगे. अहले सुबह तीन बजे तक छात्रों ने निदेशक आवास को घेर लिया. छात्रों ने बताया कि छात्र की मौत की सूचना देने के लिए पहले पांच सीनियर छात्र निदेशक के आवास पहुंचे. लेकिन, सुरक्षाकर्मी ने जाने से मना कर दिया. इसके बाद छात्रों ने आवास के टेलीफोन पर फोन किया. काफी देर के बाद निदेशक डॉ बिंदे बाहर आये. लेकिन, उन्होंने छात्र को पहचानने से मना कर दिया. यहां तक कि उन्होंने किसी तरह की मदद करने से इन्कार कर दिया. इससे नाराज छात्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया. आक्रोशित छात्रों को देख कर निदेशक खुद को आवास में बंद कर लिया और करीब 12 घंटे तक बाहर नहीं निकले. इस दौरान शास्त्रीनगर के थानाप्रभारी अमन कुमार, संस्थान के फैकल्टी डॉक्टर, डीएसपी साकेत कुमार और मजिस्ट्रेट के साथ अन्य सभी डॉक्टर निदेशक को बाहर आने के लिए काफी प्रयास कर रहे थे. इसके बावजूद वह बाहर नहीं निकले.

कैंपस में पुलिस बल तैनात, तैयार कर रखा था वाटर कैनन

अस्पताल कैंपस में तनाव के माहौल को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किये गये. एसडीपीओ साकेत कुमार भी कैंपस में पहुंचे उन्होंने भी छात्रों का समझाने का प्रयास किया. स्थानीय प्रशासन पूरी घटना पर नजर बनाये हुए था. छात्रों की ओर से तोड़फोड़ होते देख वाटर कैनन पहुंचा, जिसे तैयार करके रखा गया था.

निदेशक इस्तीफे की मांग पर अड़े रहे छात्र, बारिश हुई तो लौटे

आक्रोशित छात्रों ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय आकर हमसे बात करें, जो होगा, उनके सामने होगा. उन्होंने संस्थान के निदेशक के इस्तीफे की मांग की. वहीं, दोपहर करीब तीन बजे फैकल्टी डॉक्टरों का आश्वासन मिलने व बारिश होने के बाद छात्र निदेशक आवास से लौट गये.

अज्ञात वाहन के टक्कर मारने से जख्मी हुआ था अभिनव

दुर्घटना के मामले में पिता सुजीत पांडेय के फर्दबयान के आधार पर ट्रैफिक थाना, गांधी मैदान में अज्ञात वाहन पर केस दर्ज किया गया है. फर्दबयान के अनुसार, सात अप्रैल की सुबह करीब सात बजे वह बेटे अभिनव के साथ बोरिंग रोड से बेली रोड की ओर जा रहे थे. बाइक को अभिनव चला रहा था और वह पीछे बैठे हुए थे. इसी दौरान हड़ताली मोड़ अंडरपास के पास अज्ञात वाहन ने ठोकर मार दी. इस हादसे में घायल उनके बेटे की इलाज के क्रम में 10 अप्रैल को अस्पताल में मौत हो गयी. इधर, ट्रैफिक थानाध्यक्ष ने बताया कि अज्ञात वाहन के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को शव सौंप दिया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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