IGIMS ने रचा इतिहास, बायोकेमिस्ट्री लैब को मिला NABL प्रमाणन, बिहार का पहला सरकारी संस्थान बना

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IGIMS NABL Accreditation : पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) की जैव रसायन प्रयोगशाला को राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) से प्रत्यायन प्राप्त हुआ है. यह उपलब्धि बिहार के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए एक मील का पत्थर है.
पटना से आनंद तिवारी की रिपोर्ट
IGIMS NABL Accreditation : पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. संस्थान की जैव रसायन प्रयोगशाला (क्लीनिकल बायोकेमिस्ट्री लैबोरेटरी) को राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) से प्रत्यायन प्राप्त हुआ है. इसके साथ ही आईजीआईएमएस बिहार सरकार का पहला सरकारी स्वास्थ्य संस्थान बन गया है, जिसकी बायोकेमिस्ट्री लैब को यह राष्ट्रीय मान्यता मिली है.
करीब 100 जांचों को मिली राष्ट्रीय स्तर की मान्यता
एनएबीएल प्रत्यायन के तहत जैव रसायन प्रयोगशाला में होने वाली लगभग 100 प्रकार की जांचों को गुणवत्ता मानकों के अनुरूप मान्यता मिली है. यह किसी भी सरकारी चिकित्सा संस्थान की प्रयोगशाला के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है. इससे प्रयोगशाला की कार्यप्रणाली राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो गई है.
जांच रिपोर्ट की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ेगी
एनएबीएल मान्यता मिलने के बाद प्रयोगशाला में की जाने वाली सभी जांचों की सटीकता, विश्वसनीयता और पुनरुत्पादकता सुनिश्चित होगी. विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बीमारी के सही और समय पर निदान में प्रयोगशाला जांच की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. बेहतर गुणवत्ता वाली रिपोर्ट मिलने से चिकित्सकों को इलाज से जुड़े निर्णय लेने में अधिक सहायता मिलेगी.
मरीजों को मिलेगा सीधा लाभ
आईजीआईएमएस प्रशासन के अनुसार, इस उपलब्धि का सबसे बड़ा लाभ मरीजों को मिलेगा. गुणवत्ता नियंत्रित और मानकीकृत प्रक्रियाओं के तहत जांच होने से रोगों की समय पर पहचान, सटीक निदान और बेहतर उपचार सुनिश्चित होगा. साथ ही रोगी सुरक्षा के मानकों में भी सुधार होगा. मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की रिपोर्ट राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक विश्वसनीय मानी जाती है.
वर्षों की मेहनत के बाद मिली सफलता
संस्थान प्रशासन ने बताया कि यह उपलब्धि चिकित्सकों, वैज्ञानिकों, तकनीकी अधिकारियों और प्रयोगशाला कर्मियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है. गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली, उपकरणों के नियमित अंशशोधन, आंतरिक एवं बाह्य गुणवत्ता नियंत्रण तथा मानकीकृत प्रक्रियाओं को लागू करने के बाद प्रयोगशाला को यह प्रतिष्ठित मान्यता मिली है.
संस्थान प्रशासन ने जताई खुशी
इस उपलब्धि पर संस्थान के निदेशक प्रो. डॉ. बिंदे कुमार, उपनिदेशक प्रशासन प्रो. डॉ. विभूति सिन्हा और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. मनीष मंडल ने प्रसन्नता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि यह सफलता पूरी प्रयोगशाला टीम की प्रतिबद्धता और गुणवत्ता के प्रति समर्पण का परिणाम है. जैव रसायन विभाग की प्रो. डॉ. रेखा कुमारी, प्रो. डॉ. रवि शेखर, तकनीकी अधिकारी डॉ. श्वेता कुमारी, डॉ. अर्चना भारती सहित पूरी टीम ने इसे संस्थान के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया.
क्या है एनएबीएल?
राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) भारत सरकार के क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) के अंतर्गत कार्य करने वाली संस्था है. यह देशभर की प्रयोगशालाओं का वैज्ञानिक, तकनीकी और गुणवत्ता मानकों के आधार पर मूल्यांकन कर उन्हें मान्यता प्रदान करती है. एनएबीएल प्रत्यायन इस बात का प्रमाण होता है कि संबंधित प्रयोगशाला की जांच रिपोर्टें सटीक, विश्वसनीय और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हैं.
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