पीएचसी परिसर के पीछे फेंकी सरकारी दवा

Published by : VIPIN PRAKASH YADAV Updated At : 07 Jun 2025 12:11 AM

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patna news: खगौल. राज्य सरकार जहां एक ओर स्वास्थ्य पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है. ताकि गरीब, जरूरतमंदों को दवा व इलाज समय पर मिल सके लेकिन सरकार के सारे प्रयास विफल साबित हो रहे हैं.

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खगौल. राज्य सरकार जहां एक ओर स्वास्थ्य पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है. ताकि गरीब, जरूरतमंदों को दवा व इलाज समय पर मिल सके लेकिन सरकार के सारे प्रयास विफल साबित हो रहे हैं. इसका जीता जागता उदाहरण नगर के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खगौल में देखने को मिला. जहां स्वास्थ्य उपकेन्द्र में रखी हजारों रुपये मूल्य की सरकारी दवा फेंक दी गयी. पीएचसी परिसर के पीछे सिरफ, टेबलेट, ओआरएस का घोल सहित कई तरह की दवा फेंकी मिली. सवाल यह उठता है कि मरीजों के बीच बांटे जाने वाली दवा आखिरकार फेंकी क्यों गयी. जबकि इस ग्रामीण इलाके में कितने गरीब जरूरतमंद दवा व इलाज के लिए तरसते हैं. क्या स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी इतने संवेदनहीन हो गये की मरीजों के बीच दवा बांटने की फुर्सत नहीं है. इस बारे में प्रभारी चिकित्सक डॉ अनुपमा सिन्हा से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि आशा ने दवा फेंक दी थी सीवीटीवी में यह देखा गया है. दवा फेंकने वाली आशा को शोकॉज किया गया है.

बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट में काम शुरू

दानापुर. दैनिक प्रभात खबर में 31 मई की छपी खबर टेक्नीशियन के अभाव में बंद पड़ा है ऑक्सीजन प्लांट का असर दिखने लगा है. शुक्रवार को अनुमंडलीय अस्पताल के बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट में टेक्नीशियन द्वारा कार्य शुरू किया गया है और प्लांट को चालू किया जा रहा है. एक-दो जगह पाइप लीकेज को ठीक किया जा रहा है. टेक्नीशियन ने बताया कि ऑक्सीजन प्लांट की टेस्टिंग की जा रही है शनिवार से अस्पताल के सभी भवनों में ऑक्सीजन पाइप लाइन से शुरू हो जायेगा. बता दें कि पिछले कोरोना काल में अनुमंडलीय अस्पताल में लगाया गया ऑक्सीजन प्लांट बंद पड़ा था. आज तक टेक्नीशियन को पदस्थापित नहीं किया गया है. रखरखाव के अभाव में ऑक्सीजन प्लांट धूल फांक रहा है प्लांट के अंदर नये बेड धूल फांक रहे हैं. बताया जाता है कि ऑक्सीजन प्लांट करीब 250 एलपीएम का लगाया गया है. ऑक्सीजन प्लांट से इमरजेंसी से ओपीडी व वार्डों में पाइप लाइन बिछाया गया है, लेकिन चालू नहीं किया गया है. इस संबंध में अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ नीभा मोहन से मोबाइल पर संपर्क किया तो मोबाइल बंद था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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