Flood in Bihar: बाढ़ में बहकर आनेवाले हिरनों की होने लगी तस्करी, मोटी रकम में खरीद रहे हैं शिकारी

Updated at : 30 Jul 2020 11:01 AM (IST)
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Flood in Bihar: बाढ़ में बहकर आनेवाले हिरनों की होने लगी तस्करी, मोटी रकम में खरीद रहे हैं शिकारी

Flood in Bihar गंडक नदी में आयी बाढ़ में दुर्लभ किस्म के हिरण बह कर गोपालगंज के दियारा इलाके में आ रही है. वन विभाग की ओर से तत्काल कार्रवाई नहीं कर पाने के कारण बाढ़ के इस तबाही में हिरणों की तस्करी शुरू हो गयी है

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गोपालगंज : गंडक नदी में आयी बाढ़ में दुर्लभ किस्म के हिरण बह कर गोपालगंज के दियारा इलाके में आ रही है. वन विभाग की ओर से तत्काल कार्रवाई नहीं कर पाने के कारण बाढ़ के इस तबाही में हिरणों की तस्करी शुरू हो गयी है. तस्करी कर हिरणों को यूपी एवं बिहार के बड़े शहरों में पहुंचायी जा रही. ऐसे में इस इलाके में तस्कर और शिकारी एक्टिव हो गए है. एक सप्ताह के अंदर तस्करों ने 30 हिरणों का तस्करी किया है.

हैरान करने वाली बात यह है कि ग्रामीण सूचना देते हैं तो पुलिस व वन विभाग के अधिकारी पहुंचते ही नहीं है. जानकार बताते हैं कि 20 से 50 हजार तक में हिरणों को बेचा जा रहा. शिकारी हिरण के मीट का आनंद लेने के बाद सिंह और उसके खाल को भी बेंच रहे है. बता दे कि सदर प्रखंड के सिहोरवां में गंडक नदी में बह कर आये 15-16 की संख्या में आयी हिरणों को गांव के लोगों ने बचाया. इसकी जानकारी भी वन विभाग को ग्रामीणों ने दी. उसके बाद उसे संरक्षित करने का कोई उपाय नहीं किया गया.

हिरणों के शौकिन किसी भी कीमत पर उसे खरीद रहे है. हिरण खरीदने वाले कार लेकर दियारा में पहुंच जा रहे. यहां सस्ते मूल्य पर हिरण खरीदकर शहरों में बेंच रहे है. हिरण को पालने वाले भी जमींदार व शौकिन किस्म के लोग हिरण को खरीदकर संरक्षित कर रहे. अपने घरों पर हिरणों को पालने का भी काम हो रहा. जबकि, हिरणों को पालने पर भी भारत सरकार की ओर से प्रतिबंध लगाया गया है. गंडक नदी में बह कर आये 20 हिरणों को वन विभाग ने किया संरक्षित कर उनको वाल्मीकिनगर व्याघ्र परियोजना को पहुंचाया जा चुका है. हिरणों को संरक्षित करने के लिए 24 घंटे एक वाहन तैयार रहता है. जहां से सूचना मिलती है वहीं पहुंचा जा रहा. डीएफओ अभिषेक कुमार सिंह ने कहा है कि बाढ़ में बहकर आये हिरण को अगर कोई मारता है या तस्करी करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.

क्या है कानून ?

हिरणों पर हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1972 में भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम बनाया गया है. इसका मकसद वन्य जीवों के अवैध शिकार, मांस और खाल के व्यापार पर रोक लगाना. इसमें वर्ष 2003 में संशोधन किया गया जिसका नाम भारतीय वन्य जीव संरक्षण (संशोधित) अधिनियम 2002 रखा दिया गया. इसमें दंड और और जुर्माना को और भी कठोर कर दिया गया है.

सांभर प्रजाति के है हिरन

गंडक के तेज बहाव में बहकर आये हिरण सांभर प्रजाति के बताये जा रहे हैं. जो वाल्मिकीनगर व्याघ्र परियोजना में में सर्वाधिक पाये जाते है. इसके अलावे नेपाल के तराई क्षेत्रों में भी इनकी संख्या पायी जाती है. गंडक नदी में बह कर आये दो हिरणों की कुत्तों के हमले में घायल होने से मौत हो गयी. महारानी, व बैकुंठपुर में हिरणों की मौत की वन विभाग के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि किया है.

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