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पिछड़ापन दूर करने को विशेष सहायता दे वित्त आयोग

Updated at : 20 Jun 2024 2:20 AM (IST)
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पिछड़ापन दूर करने को विशेष सहायता दे वित्त आयोग

16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढिया और आयोग की पूरी टीम के समक्ष बुधवार को नालंदा विश्वविद्यालय में बिहार का पक्ष आद्री की सदस्य सचिव डॉ अस्मिता गुप्ता और आइआइटी पटना के प्रो नलिन भारती ने रखा.

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संवाददाता,पटना 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढिया और आयोग की पूरी टीम के समक्ष बुधवार को नालंदा विश्वविद्यालय में बिहार का पक्ष आद्री की सदस्य सचिव डॉ अस्मिता गुप्ता और आइआइटी पटना के प्रो नलिन भारती ने रखा. डॉ गुप्ता ने बिहार के ऐतिहासिक और भौगोलिक कारकों का हवाला देते हुए कहा कि बिहार के एक पिछड़ा राज्य है. इसका पिछड़ापन दूर करने के लिए वित्त आयोग को विशेष प्रावधान करना चाहिए.उन्होंने नीति आयोग के इनडेक्स का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार के विकास के लिए विशेष आर्थिक सहायता की भी जरूरत है.राज्य की गरीबी दूर करने के लिये बड़े स्तर पर पब्लिक निवेश होना चाहिए.इस दिशा में आयोग को सोचना चाहिए. आद्री की सदस्य सचिव ने 15वें वित्त आयोग द्वारा की कई अनुशंसाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार को मिलने वाली ग्रांट इन एड में कमी आयी है.वन क्षेत्र और 2011 के जनगणना के आधार पर बिहार के लिए प्रावधान करना कतर्ह उचित नहीं है.राज्य सरकार की आरे से किये गये जाति आधारित गणना में बिहार की जनसंख्या बढ़ कर 13 करोड़ हो गया है,इस आधार पर ही बिहार के लिए फंडिंग की व्यवस्था होनी चाहिए. सेस और सरचार्ज में भी मिले हिस्सेदारी डॉ अस्मिता गुप्ता ने सेस और सरचार्ज में भी बिहार समेत दूसरे राज्यों को हिस्सेदारी देने की मांग की वित्त आयोग से की.फिलहाल सेस और सरचार्ज से मिलने वाली राशि केंद्र सरकार के खजाने में भी रह जाती है.उन्होंने कहा कि बिहार को परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए विशेष मदद मिलनी चाहिए.बिहार जैसे पिछड़े राज्य में विशेष पूंजी का निवेश, आधारभूत संरचना के विकास पर जोर, परिसंपत्तियों के निर्माण, विकसित राज्यों के साथ समानीकरण को लेकर जोर दिया जाएगा.उन्होंने कहा कि राजस्व बंटवारे को लेकर वर्तमान फॉर्मूले से इतर विशेष उपाय किये जाने की जरूरत है. आपदा से निबटने के लिए विशेष प्रावधान हो आइआइटी पटना के प्रो नलिन भारती ने कहा कि बिहार एक ऐसा राज्य है जिसे विभिन्न प्रकार की आपदा का सामना करना पड़ता है.जलवायु परिवर्तन के कारण बिहार को नयी आपदा जैसे हीट वेव व सूखा आदि का सामना करना पड़ रहा है. वित्त आयोग को नयी आपदा से निबटने के लिए विशेष प्रावधान करना चाहिए. हालांकि बिहार ने अपने स्तर पर इससे निबटने के प्रत्यन किये हैं.प्राकृतिक आपदा के अलावा सड़क हादसा व आगजनी जैसी घटनाओं के लिए स्थानीय आपदा के लिए एसडीआरएफ में आवंटित राशि से केवल 10% खर्च करने का कैप आयोग ने लगाया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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