संवाददाता,पटना बिहार में कालाजार उन्मूलन को लेकर डोसियर तैयार किया जा रहा है. इसमें कालाजार से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी शामिल की जायेगी. वर्ष 2022 में राज्य कालाजार उन्मूलन का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है. यह स्थिति राज्य को प्रति 10 हजार की आबादी पर एक से कम कालाजार रोगी मिलने के कारण प्राप्त हुई है. अब तीन साल के बाद उसकी वैधता की जांच डब्लूएचओ के टीम द्वारा किया जायेगा. डोजियर में राज्य सरकार द्वारा एक विस्तृत आंकड़ा होगा जिसमें अभी तक कालाजार उन्मूलन के लिए किये गये कार्यों का साक्ष्य पेश किया जायेगा. इसमें दवा का छिड़काव, घर-घर रोगी की खोज, उसका जांच, इलाज, त्वचा के कालाजार रोगियों की पहचान जैसे आंकड़े दर्ज किये जाने हैं. डोजियर में वर्ष 2018 से लेकर 2025 तक किये गये सभी कार्यों का आंकड़ों को दर्ज किया जायेगा. डोजियर तैयार करने को लेकर मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग और पिरामल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में राजेंद्र स्मारक चिकित्सा विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आरएमआरआइ) में एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया. पहले दिन राज्य के 14 जिलों बक्सर, दरभंगा, जहानाबाद, मधेपुरा, लखीसराय, नालंदा, नवादा, पटना, समस्तीपुर, सहरसा, शेखपुरा, सीवान, वैशाली और शिवहर के अधिकारियों ने भाग लिया. साथ ही आरएमआरआइ, पटना और मेडिसिन्स सांस फ्रंटियर्स के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे. इसका उद्घाटन अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम, डा एनके सिन्हा और आरएमआरआई के निदेशक डा कृष्णा पांडेय ने संयुक्त रूप से किया. बुधवार को बैठक के दूसरे दिन अररिया, अरवल, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, पूर्वी एवं पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, मुंगेर, पूर्णिया, सारण, सीतामढ़ी और केएएमआरसी , मुजफ्फरपुर के प्रतिनिधि शामिल होंगे.
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