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तेजस्वी-राजश्री एक ही घर में,पर वोटर लिस्ट में अलग-अलग मकान नंबर

Updated at : 10 Aug 2025 1:04 AM (IST)
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तेजस्वी-राजश्री एक ही घर में,पर वोटर लिस्ट में अलग-अलग मकान नंबर

मतदाता सूची में गड़बड़ी से राज्यभर के बड़ी संख्या में मतदाता परेशान, बीएलओ भी असहाय

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मतदाता सूची में गड़बड़ी से राज्यभर के बड़ी संख्या में मतदाता परेशान, बीएलओ भी असहाय शशिभूषण कुंवर, पटना बिहार की नयी ड्राफ्ट मतदाता सूची में अजब-गजब विसंगतियां सामने आ रही हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विरोधी दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राजश्री यादव जो एक ही घर में रहते हैं, उन्हें वोटर लिस्ट में अलग-अलग मकान नंबरों में दिखाया गया है. तेजस्वी का मकान नंबर 110, जबकि राजश्री का मकान नंबर 208 दर्ज है, जबकि दोनों एक ही पते पर रहते हैं. यह मामला सिर्फ एक मशहूर नाम तक सीमित नहीं है. दरअसल, पूरे बिहार में लाखों मतदाताओं के साथ ऐसा हुआ है. जहां एक ही परिवार के सदस्य होने के बावजूद उनकी वोटरलिस्ट में अलग-अलग मकान नंबर दिखाये गये हैं. कहीं पति-पत्नी अलग-अलग बूथ में दर्ज हैं, तो कहीं सास-बहू की गृह संख्या ही मेल नहीं खा रही. तेजस्वी और राजश्री बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के पुस्तकालय भवन में बने बूथ संख्या 204 के मतदाता हैं. तेजस्वी का नाम क्रम संख्या 416 पर दर्ज है, वहीं राजश्री का नाम क्रम संख्या 445 पर. परंतु मकान नंबर दोनों के अलग-अलग. ये गड़बड़ी सिर्फ नामी चेहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर विधानसभा क्षेत्र हर बूथ पर देखने को मिल रहा है. चौंकाने वाली बात यह है कि इस गंभीर विसंगति पर न तो निर्वाचन आयोग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब दिया गया है और न ही बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को इसकी कोई ठोस जानकारी दी गयी है. बीएलओ खुद भी इस बात को लेकर भ्रम में हैं कि मकान संख्या तय करने का आधार क्या है. अब जब ड्राफ्ट लिस्ट के आधार पर दावा-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तब मतदाताओं को यह जानकर निराशा हो रही है कि आवेदन फॉर्म में नाम, लिंग, पता इत्यादि बदलवाने का विकल्प तो है लेकिन मकान संख्या में संशोधन का कोई प्रावधान ही नहीं है. जानकारों का कहना है कि मकान संख्या का निर्धारण आयोग द्वारा उत्तर-पश्चिम दिशा से शुरू कर दक्षिण-पूर्व तक करने की पद्धति पर आधारित है जो वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती. यानी यह पूरी प्रक्रिया एक तरह से काल्पनिक नक्शे पर आधारित है. इस भ्रम और असुविधा के चलते न सिर्फ मतदाता परेशान हैं, बल्कि यह भी सवाल उठ रहा है कि विधानसभा चुनाव में क्या इसके कारण एक परिवार के लोग अलग-अलग बूथों पर मतदान करने जायेंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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By RAKESH RANJAN

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