पटना: तारेगना टोक को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल बनाने की मांग, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन

Author Monu kumar|Edited by Nikhil Anurag
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ज्ञापन सौंपते भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ता

ज्ञापन सौंपते भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ता

Bihar Tourism : बिहटा प्रखंड के तारेगना टोक (अहिल्या स्थान) को ऐतिहासिक, धार्मिक और वैज्ञानिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग जोर पकड़ रही है. भारतीय किसान यूनियन ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर डिजिटल विज्ञान पार्क, इको-टूरिज्म और फोरलेन से एप्रोच रोड बनाने की मांग की है.

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Bihar Tourism : बिहटा प्रखंड क्षेत्र स्थित तारेगना टोक (अहिल्या स्थान) को ऐतिहासिक, धार्मिक और वैज्ञानिक विरासत के रूप में विकसित कर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल का दर्जा देने की मांग तेज हो गई है. भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने मुख्यमंत्री के नाम अंचलाधिकारी राकेश कुमार सिंह के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए इस स्थल के समग्र विकास की मांग की है.

डिजिटल विज्ञान पार्क और इको टूरिज्म विकसित करने की मांग

प्रदेश अध्यक्ष अंजनी कुमार और प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि तारेगना टोक को स्थानीय परंपराओं में महान गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री महर्षि आर्यभट्ट की तपोस्थली माना जाता है. यह स्थल अहिल्या स्थान के रूप में भी धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है. इसके बावजूद आधारभूत सुविधाओं के अभाव में यह पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान नहीं बना सका है.

संगठन ने तारेगना टोक में डिजिटल विज्ञान पार्क की स्थापना की मांग करते हुए कहा कि इससे महर्षि आर्यभट्ट की वैज्ञानिक विरासत को नई पहचान मिलेगी और विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं तथा पर्यटकों के लिए यह महत्वपूर्ण आकर्षण का केंद्र बन सकेगा.

पर्यटन के जरिए रोजगार बढ़ाने पर जोर

ज्ञापन में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने, जैविक खेती को प्रोत्साहित करने और पर्यटन आधारित गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय किसानों एवं युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने की भी मांग की गई है. संगठन का कहना है कि इससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी.

फोरलेन से जोड़ने के लिए एप्रोच रोड की मांग

भाकियू-भानु ने निर्माणाधीन पटना–सदीसोपुर–गोनवा–सासाराम फोरलेन मार्ग से तारेगना टोक को जोड़ने के लिए विशेष एप्रोच रोड अथवा एलिवेटेड ब्रिज निर्माण की मांग भी उठाई है. संगठन का कहना है कि बेहतर सड़क संपर्क होने से पर्यटकों की आवाजाही आसान होगी और यह स्थल बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकेगा.

प्रदेश अध्यक्ष अंजनी कुमार ने कहा कि यदि सरकार तारेगना टोक के विकास की दिशा में ठोस पहल करती है तो यह क्षेत्र धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है. वहीं प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह ने कहा कि संगठन किसानों, युवाओं और क्षेत्र के समग्र विकास से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाता रहेगा.

ज्ञापन सौंपने वालों में श्याम किशोर सिंह, गोपाल यादव, सुगौली पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि उपाध्याय जी, अरुण कुमार सिंह सहित संगठन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल रहे.

तारेगना टोक का ऐतिहासिक महत्व

तारेगना टोक बिहटा क्षेत्र में सोन और तारगना नदी के संगम के निकट स्थित एक प्राचीन स्थल माना जाता है. स्थानीय लोकमान्यताओं के अनुसार यह स्थान महर्षि आर्यभट्ट की तपोस्थली तथा अहिल्या स्थान के रूप में प्रसिद्ध है. साथ ही ग्रामीण परंपराओं में यह भी माना जाता है कि महाभारत काल में पांडवों ने वनवास के दौरान इस क्षेत्र में कुछ समय बिताया था. हालांकि इन मान्यताओं के स्पष्ट ऐतिहासिक या पुरातात्विक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन स्थानीय लोगों में इनकी गहरी आस्था है. प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक महत्व और सांस्कृतिक विरासत के कारण तारेगना टोक को पर्यटन की दृष्टि से संभावनाशील स्थल माना जाता है.

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