सामूहिक दुष्कर्म कांड: पीड़िता अपनों को भी नहीं पहचान रही है, डॉक्टरों ने पुलिस को भी मिलने से रोका
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 Jan 2024 12:15 PM
राजधानी पटना से सटे फुलवारी शरीफ में सामूहिक दुष्कर्म कांड के आरोपियों की पहचान के लिए डॉग स्क्वायड की मदद ली जा रही है. इसके साथ ही टेक्निकल सेल मोबाइल नंबरों को ट्रेस करने में लगी है.
अजीत, फुलवारी शरीफ
दो मासूम बच्चियों के साथ शैतानों ने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी हैं. बच्चियों का शरीर देख कर ऐसा लग रहा था कि विरोध करने या शोर मचाने पर उनकी बेरहमी से पिटाई की गयी होगी. जिस बच्ची की मौत हो गयी है, उसके हाथ-पांव टूटे हुए थे. दूसरी बच्ची इतनी डर गयी कि वह किसी को भी अपने पास आता देख, चिल्लाने लगती थी. यही कारण है कि डॉक्टरों ने पुलिस को भी पीड़िता से मिलने से मना कर दिया है. प्रत्यक्ष दर्शियों ने बताया कि जब चारदीवारी के पास लोगों ने सबसे पहले दोनों बच्चियों को देखा और उसके करीब जाने का प्रयास किया तो, एक बच्ची जो जिंदा थी, वह थर-थर कांपते हुए रोने-चिल्लाने लगती थी. इतना ही नहीं जब उसके घर वाले भी वहां पहुंचे, तो उन्हें भी वह पहचान नहीं पा रही थी. बाद में वह बेहोश हो गयी. उसके अंदर इतना डर बैठ गया है कि बेहोशी की हालत में भी वह चिल्ला उठती है.
फुलवारी शरीफ के हिंदुनी और आलमपुर के बीच मंगलवार को पुलिस का खोजी कुत्ता इधर- उधर घूम कर सुराग ढूंढने की कोशिश करता रहा. पुलिस कर्मी उसके पीछे-पीछे चल रहे थे. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही थी कि किस इलाके में बच्चियों को छुपा कर रखा गया था और कहां उनके साथ कुकर्म किया गया. पुलिस तनावपूर्ण स्थिति को देख काफी फूंक फूंक कर कदम रख रही थी. उसे आशंका थी कि ग्रामीणों की भीड़ किसी के घर में जाकर तोड़फोड़ और आग न लगा दे. पुलिस को ऐसा इसलिए लग रहा था कि पुलिस का कुत्ता कई लोगों के दरवाजे पर जाकर रुक जा रहा था. कुत्ते के पीछे भारी भीड़ यह कहते हुए चल रही थी कि जिस घर के आगे कुत्ता रुकेगा, उस घर को जला देंगे. उसके बाद पुलिस ने खोजी कुत्ते को वहां और अधिक घुमाना मुनासिब नहीं समझा.
पुलिस को अभी तक के जांच में इतना पता चल गया है कि दरिंदे कहीं और के नहीं हैं, आसपास के ही हैं. खोजी कुत्ते ने उस जगह को खोज निकाला है, जहां बच्चियों को रखा गया है. वहां पुलिस को खून के निशान भी मिले हैं. खोजी कुत्ता गांव की पगडंडी होते हुए आलमपुर गांव और बगीचा में जा रुका जहां खून के निशान मिले, उसके बाद वह एक खलिहान में रुका वहां भी खून के निशान मिले. खोजी कुत्ता ने शव को रखने से लेकर फेंकने तक की दिशा बताते हुए पुलिस को जानकारी दे डाली की दरिंदे इसी गांव के हैं. फिलहाल कई घंटे बाद तक डॉग स्क्वायड और एफएसएल की टीम साक्ष्य एकत्र करने में लगी रही. माैके वारदात से पुलिस ने मासूम के कपड़े के टूकड़े भी बरामद किये हैं.
अब पुलिस मौके से मोबाइल का डंप डाटा निकाल कर जांच करेगी कि कौन सा नंबर सोमवार की सुबह से लेकर मंगवार की सुबह तक यहां पर लगातार चल रहा था. पुलिस ने लोगों को आक्रोश को देख कर तीन थानों की पुलिस को बुला लिया था. मौके पर भाकपा माले की टीम भी मौजूद थी.
जिस बच्ची की मौत हुई है, उसके पिता का निधन पहले ही हो चुका है. मां विकलांग है. वही बच्ची अपनी मां की सहारा थी. पुलिस की नजर इस इलाके में नशे का कारोबार करने वालों पर भी है. इस इलाके में अवैध रूप से देसी-विदेशी शराब के अलावा अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री होती है.
जिस बच्ची की मौत हुई है उसकी विकलांग मां ने बताया कि उसकी बेटी सुबह अपनी सहेली के साथ पड़ोस के गांव में गोइठा लाने गयी थी. जब दोनों काफी देर बाद भी नहीं लौटी तो अपने स्तर से काफी खोजबीन की. देर शाम वह थाना पहुंची तो उसे कहा गया कि आपलोग पहले खुद खोजिए, कल आइयेगा. बताया जाता है कि दोनों बच्चियों का परिवार काफी गरीब है.
फुलवारी शरीफ थाना क्षेत्र में पहले भी ऐसी घटना हो चुकी है. करीब दस साल पहले ईशानगर नहरपुरा इलाके में एक मासूम बच्ची को वहशी दरिंदों ने उसके घर के दरवाजे से उठाकर रात भर दुष्कर्म के बाद उसके शव को पाने की टंकी में डाल दिया था. उस मामले में भी पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आयी थी. इसके बाद तत्कालीन थाना अध्यक्ष मुन्नीलाल राम को सस्पेंड कर लाइन हाजिर कर दिया गया था.
स्थानीय विधायक गोपाल रविदास ने बताया की खबर मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन को सूचित किया और घटना में संलिप्त अपराधियों को जल्द से जल्द हिरासत में लेकर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है. विधायक ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि इसमें स्थानीय पुलिस की लापरवाही की बात भी सामने आ रही है.
कोट
घायल बच्ची के पूरी तरह होश में आने पर उसका बयान लिया जायेगा. हर स्तर पर छानबीन की जा रही है. छानबीन और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकता है. –सफीर आलम, थाना अध्यक्ष, फुलवारी शरीफ
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