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Bihar Weather, Flood Updates : राज्य में अभी कोई मॉनसून सिस्टम प्रभावी नहीं, दक्षिणी बिहार में कुछ दिन ड्राइ स्पैल

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
बिहार में दो-चार दिन गर्मी और उमस भरा रहेगा वातावरण
बिहार में दो-चार दिन गर्मी और उमस भरा रहेगा वातावरण
प्रभात खबर

Bihar Weather Alert, forecast, IMD report, News LIVE Updates :पूरे प्रदेश में बुधवार से अगले 72 घंटे तक कोई खास मॉनसूनी सिस्टम दिखायी नहीं दे रहा है़ इसकी वजह से केवल तापमान बढ़ने से हल्की फुल्की बारिश होगी़ पुरवैया हवा के साथ आ रही नमी के चलते कुछ एक जगहों में ठनका गिर सकता है. फिलहाल गुरुवार से तापमान में कुछ इजाफा हो सकता है. मौसम विभाग ने बताया है कि कुछ इलाकों में गरज के साथ बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है.

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बिहार में अभी कोई मॉनसून सिस्टम प्रभावी नहीं

बिहार में इन दिनों कोई भी मॉनसूनी सिस्टम प्रभावी नहीं है. ट्रफ लाइन भी बिहार और उसके पड़ोसी राज्यों मसलन उत्तरप्रदेश और झारखंड से दूर जा चुकी है. इस परिवेश में दक्षिणी बिहार में अगले कुछ दिन ड्राय स्पैल हो सकता है. दरअसल, यहां नमी का अभाव है. जबकि, उत्तरी बिहार में बंगाल की खाड़ी से नमी की आपूर्ति पुरवैया की वजह से लगातार बनी हुई है. यहां गर्मी भी पड़ेगी. ऐसी दशा में इस इलाके में छिटपुट बारिश होती रहेगी. जहां तक मध्य बिहार का सवाल है, यहां मिली-जुली स्थिति रहेगी. इस तरह बिहार में मॉनसून की शानदार दस्तक के बाद दो-चार दिन के लिए गर्मी और उमस भरा वातावरण लगातार बना रहेगा. मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अगला मानसूनी सिस्टम पछिया हवा के चालू होते ही शुरू हो सकता है. दरअसल, अभी ट्रफ लाइन मध्यप्रदेश, राजस्थान के कुछ इलाके से होते हुए जमशेदपुर और दीघा होते हुए बंगाल की खाड़ी तक पहुंच रही है. इसके नीचे खिसकने के बाद ही बिहार में बारिश होगी.

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कोसी और कमला बलान का बढ़ा जलस्तर, बाढ़ से घिरी लाखों की आबादी

लगातार बारिश और बराज से नियमित डिस्चार्ज के कारण कोसी और कमला बलान का जलस्तर बढ़ने से लाखों की आबादी बाढ़ से घिर चुकी है. सहरसा के ग्राम पंचायत बघवा, बीरगांव, भेलाही, कुंदह, तेलवा पूर्वी व पश्चिमी, घोंघेपुर, मनोवर, झारा, ऐना व आरा पट्टी के सभी गांव का सड़क संपर्क बाधित होने से आवागमन ठप पर गया है. कोसी व कमला के बीच अवस्थित दर्जनों गांव के लोग अपने घरों में कैद हैं. खेतों में लगी धान का फसल और बिचड़ा बर्बाद हो चुका है. घोंघेपुर पंचायत के कई गांव के दर्जनों परिवार अपने घरों को छोड़ पश्चिमी कोसी तटबंध पर विस्थापित हो भगवान भरोसे जीवन जीने को विवश हैं.

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तटबंध से रिसाव शुरू, कोठिया गांव के खेतों में फैला नदी का पानी

दरभंगा के केवटी प्रखंड के पश्चिम भाग पिणडारूच कोठिया गांव में नदी का पानी खेत में तेजी से फैलना शुरू हो गया है. पिछले वर्ष तटबंध जहां टूटा था, वहीं निर्मित तटबंध में पानी का रिसाव हो रहा है. वहीं, जिले के बाढ़ प्रभावित इलाके के लोगों को आवागमन में असुविधा हो रही है. नाव का परिचालन नहीं होने से लोगों को दैनिक कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है. मजबूरन घरों में रहने को लोग बेबस हैं.

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बागमती नदी में आयी बाढ़ में डूबे शुभम का शव गोताखोरों की मदद से निकाला गया 

सीतामढ़ी के जिले के पुपरी प्रखंड क्षेत्र की बुढ़नद और मरहा नदी के जलस्तर में कमी आयी है. हालांकि, क्षेत्र में बाढ़ का पानी स्थिर है. वहीं, रून्नीसैदपुर की मधौलशानी पंचायत के वार्ड संख्या-5 निवासी शुभम का शव गुरुवार को बरामद कर लिया गया. मालूम हो कि बुधवार की शाम को बागमती नदी की बाढ‍़ के पानी में डूबने से शुभम की मौत हो गयी थी. ग्रामीणों और स्थानीय गोताखोरों की मदद से शव को पानी से निकाला गया.

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कटिहार के निचले इलाकों में पानी

कटिहार में आधा दर्जन प्रखंड के निचले इलाके में बाढ़ का पानी फैल गया है. खेतों में लगी धान की फसल डूब चुकी है. बाढ़ का पानी आ जाने से कदवा, आजमनगर, बारसोई, बलरामपुर, प्राणपुर, डंडखोरा आदि प्रखंडों के लोगों का आवागमन बाधित हो गया है. अमदाबाद प्रखंड की जंगला टाल पंचायत के सिंघिया गांव जानेवाली मुख्य सड़क की पुलिया पर बाढ़ के पानी चढ़ गया है. इससे ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

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खगड़िया में कटाव तेज

बेलदौर (खगड़िया)खगड़िया के बेलदौर प्रखंड की आधी आबादी कोसी नदी की चपेट में आ गयी है. तेलिहार के कामा थान मुसहरी, आनंदी सिंह बासा, तिरासी टोला, बलैठा का पचाठ, डाढी, नववटोलिया, डुमरी आदि गांवों में कटाव तेज हो गया है. साथ ही निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने से धान की फसल डूब गयी है. जानकारी के अनुसार, पचाठ गांव में पिछले एक पखवारे पहले से 50 मीटर में कटाव हो रहा है, जिससे गांव पर बाढ़ का खतरा मड़राने लगा है.

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सत्तर घाट पुरी तरह सुरक्षित : डीएम

गोपालगंज : सत्तर घाट पुलिया का अप्रोच रोड ध्वस्त होने के मामले में डीएम अरशद अजीज का बयान आया है. डीएम ने कहा है कि 264 करोड़ की लागत से बना सत्तर घाट महासेतु पूरी तरह सुरक्षित है. उसका अप्रोच रोड पानी के दबाव से ध्वस्त हुआ है. पानी घटने के बाद किया जाएगा रोड को मोटरेबल बनाया जायेगा.

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सारण रिंग बांध में रिसाव, ग्रामीणों ने शुरु की मरम्मत

गोपालगंज. सारण रिंग बांध में रिसाव की खबर हे. मांझागढ़ के भैसही में रिसाव शुरू हुआ है. बांध की मरम्मत में ग्रामीण जुटे हुए है. जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी गयी.

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सीतामढ़ी की कई बस्तियों में घुसा पानी

सीतामढ़ी. बारिश का सिलसिला थमने के साथ ही जिले की लाखों आबादी ने राहत की सांस ली है. बारिश रुकने के बाद से सबकुछ बहाकर ले जाने पर आमदा बागमती, लखनदेई व अधवारा समूह की विभिन्न नदियों के जलस्तर में वृद्धि का सिलसिला फिलहाल थम गया है. हालांकि, अभी भी सभी नदियां उफान पर है. जिले के सैकड़ों गांवों में इन नदियों का पानी प्रवेश कर गया है, जिससे सोनबरसा, बथनाहा, मेजरगंज, सुप्पी, बैरगनिया, रीगा, चोरौत, पुपरी व रुन्नीसैदपुर प्रखंड के सैकड़ों गांवों की लाखों आबादी बाढ़ से प्रभावित है.

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दरभंगा शहर में फैला बागमती का पानी

दरभंगा. बागमती नदी का जलस्तर पिछले 24 घंटे में तीन फीट से अधिक बढ़ गया है. शहरी क्षेत्र में लगातार पानी प्रवेश कर रहा है. वार्ड आठ, नौ एवं 23 के नालों को भरने के बाद अब यह मैदानी हिस्से में भी फैल रहा है. इससे मोहल्लावासियों की चिंता के साथ उनमें दहशत गहराने लगा है. नदी घाटों की तीन और सीढ़ी बुधवार को पानी में डूब गयी. मुरलीमनोहर घाट में मात्र एक सीढ़ी शाम में नजर आ रहा था. शुभकंरपुर मोहल्ला के ड्योढ़ी के मैदानी भाग में बागमती का पानी फैल रहा है.

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बागमती, लखनदेई व मनुषमारा नदी के जलस्तर में कमी

औराई: बागमती, लखनदेई व मनुषमारा नदी के जलस्तर में कमी हो रही है. बागमती नदी के जलस्तर में बुधवार को दो फुट तक की कमी दर्ज की गयी. बागमती परियोजना उत्तरी और दक्षिणी बांध के बीच स्थित एक दर्जन गांव में व बाढ़ पीड़ितों के अधिकतर घरों से बाढ़ का पानी निकल गया है. आवागमन के लिए अभी लोगों को नाव का ही सहारा है. दोनों बांध के बीच स्थित मधुवनप्रताप, पटोरी टोला, बभनगामा पश्चिमी, बड़ा बुजुर्ग, बड़ा खुर्द, चौनपुर, महेशवारा समेत अन्य गांव के बाढ़ पीड़ितों ने जलस्तर मे कमी होने से राहत की सांस ली है.

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कटरा में बागमती के जलस्तर में डेढ़ फीट की कमी

कटरा : प्रखंड की प्रमुख नदी बागमती के जलस्तर में लगभग एक से डेढ़ फुट कमी होने से लोगों ने राहत की सांस ली है. वहीं लोगों की समस्या ज्यों का त्यों है. बसघट्टा बेनीबाद सड़क पर तीन से पांच फुट पानी का बहाव जारी है. चौथे दिन भी बिजली की आपूर्ति बंद रही. बिजली सब स्टेशन के जेई नीतीश कुमार ने कहा कि जलस्तर में कमी जारी रहा तो गुरुवार को विद्युत आपूर्ति हो सकती है. बाढ़ प्रभावित गावों में कच्चे घरों का गिरना शुरू हो गया है. बकुची निवासी धर्मेन्द्र कमती, रामसकल भगत, हंशराज भगत सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से अविलंब राहत देने की मांग की है.

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खतरे के निशान के निकट पहुंची बूढ़ी गंडक, लाल निशान के पार बागमती

मुजफ्फरपुर : बूढ़ी गंडक व बागमती नदी के जलस्तर में इजाफा जारी है. वाल्मीकि नगर बाराज से पिछले तीन दिनों से लगातार पानी छोड़ने से नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है. बूढ़ी गंडक नदी खतरे के निशान से एक मीटर कम है. वहीं बागमती खतरे के निशान एक मीटर से अधिक ऊपर में बह रही है. बूढ़ी गंडक का पानी पेटी व निचले इलाकों में बसे घरों में घुस गया है. वहां से लोग अपने जरूरत के सामानों के साथ सुरक्षित स्थान पर जाने लगे हैं. औराई व कटरा की स्थिति गंभीर बनी हुई है. करीब चालीस वार्ड में बाढ़ का पानी अब तक प्रवेश कर चुका है. जहां से लोग पलायन कर सुरक्षित स्थान पर जा चुके हैं. बांध के अंदर आने वाले इलाकों में धान की फसल डूब गयी है.

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बलुआहा नदी का बढ़ा जलस्तर, कटाव शुरू

मुरलीगंज : प्रखंड अंतर्गत बलुआहा नदी के जलस्तर में वृद्धि व नदी के दिशा परिवर्तन कारण बस्ती में हो रहे कटाव से ग्रामीणों में दहशत है. कटाव पीड़ितों ने मिलने आये सीओ से कहा कि नदी यहां से सीधे रेलवे पुल के सामने से बहा करती थी, लेकिन वर्ष 2008 के पहले रेलवे पुल के ठीक सामने से बहा करती थी, लेकिन प्रलयंकारी बाढ़ के बाद नदी रफ्ता रफ्ता पूरब की ओर खिसकने लगी है. जब तक रेलवे पुल के सामने से नदी का रास्ता नहीं निकाला जायेगा तो हमलोगों की बस्ती कटाव के कारण खत्म हो जायेगी. लोगों ने बताया कि इस नदी के कहर से बचने का जल्द कोई उपाय नहीं किया गया तो लगभग दो सौ की आबादी वाले इस गांव का अस्तित्व खत्म हो जायेगा. उन्होंने कहा कि जल्द ही कटाव निरोधात्मक कार्य करवा कर बस्ती को सुरक्षित बचाने का प्रयास किया जायेगा.

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बैंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि

मुरलीगंज : शहर के पश्चिमी हिस्से में बह रही बैंगा नदी के जलस्तर में भी वृद्धि हुई है. नदी के जलस्तर में भी वृद्धि के कारण नदी के कछार बसे लोगों में भय का माहौल है जो कहे तो शहर की आबादी बढ़ने के कारण लोगों ने नदी का अतिक्रमण दोनों ही किनारे पर करना शुरू कर दिया है. नदी के तट पर अपने आशियाने बनाने शुरू कर दिये. पिछले दिनों कोसी के जलस्तर में भारी वृद्धि के बाद नदी के जल स्तर में भी वृद्धि हुई. जिला पदाधिकारी ने हालात का जायजा लेने के लिए अंचलाधिकारी शशि भूषण कुमार को भेजा.

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सोहासी गांव में पुलिया टूटा

औराई: सोहासी गांव में सड़क व पुलिया टूट जाने व नाव की सुविधा नहीं रहने से ग्रामीणों में त्राहिमाम है. सैकड़ों घर चारों तरफ से पानी से घिर गये हैं. इधर साहेबगंज में गंडक नदी का जल स्तर बढ़ने से माधोपुर हजारी, बंगरा निजामत, देवसर असली, हुस्सेपुर नयाटोला व हुस्सेपुर पंचरुखिया में बाढ़ की स्थिति भयावह दिखने लगी है. बाढ़ पीड़ितों में कुछ ने तिरहुत तटबंध पर शरण लेना शुरू कर दिया है.

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मानसी-सहरसा रेलखंड के फनगो हॉल्ट पर रेलवे की विशेष नजर

समस्तीपुर. समस्तीपुर रेल मंडल के मानसी-सहरसा रेलखंड के फनगो हॉल्ट पर रेलवे की विशेष नजर है. यहां पानी के दवाब पर नजर रखने के लिये लगातार चौकसी की जा रही है. रात में भी पेट्रॉलिंग की व्यवस्था की गयी है. समस्तीपुर रेल मंडल के एइएन हरगोविंद राय की मानें तो यहां स्थानीय बारिश से ज्यादा नेपाल से आने वाले पानी से समस्या हैं. फिलहाल यहां पर कोसी नदी खतरे के निशान से 1.25 मीटर नीचे बह रही है.

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महानंदा व घाघरा खतरे के निशान से ऊपर

महानंदा नदी ढंगारा घाट में खतरे के निशान से 79 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी. घाघरा नदी दरौली में खतरे के निशान से 16 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी, इसमें बढ़ोतरी का रुख है. इधर, गंगा नदी का जल स्तर पटना के दीघा घाट पर मंगलवार को 48.27 मीटर था यह बुधवार को नौ सेंटीमीटर बढ़ कर 48.36 मीटर हो गया. पटना के गांधी घाट पर 47.36 मीटर था इसमें आठ सेंटीमीटर की बढ़ोतरी के साथ 47.44 मीटर हो गया.

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गंडक नदी के जलस्तर मे लगातार हो रही बढ़ोतरी

धरफरी व चांदकेवारी पंचायत में बाढ़ ने कोहराम मचाना शुरू कर दिया गया है. जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश व गंडक नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. बांध के पश्चिमी ईलाके में बसे सैकड़ों ग्रामीण सहमे हैं. कई वार्डो में बाढ़ का पानी घुस गया है. बाढ़ के पानी से घिरे 20 हजार की आबादी को नाव की व्यवस्था नहीं होने से लोगों के आवागमन की स्थिति बेहद खराब है.

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पूरे प्रदेश में कहीं भी सूखे की स्थिति नहीं

फिलहाल मॉनसून प्रदेश को तरबतर कर दिया है़ कटिहार,सहरसा और शेखुपरा अपवाद दो ऐसे जिले हैं, जहां सामान्य से कम बारिश हुई है़ कटिहार में तीन फीसदी कम बारिश हुई है़ यहां भी 400 मिलीमीटर की तुलना में केवल 390 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गयी है़ सबसे कम बारिश शेखपुरा में हुई है, जहां सामान्य से 38% कम 190 िममी बारिश हुई है़ सहरसा में सामान्य से 26 फीसदी कम बारिश हुई है़ हालांकि पूरे प्रदेश में सूखे की कहीं स्थिति नहीं है़ खेती योग्य बारिश सभी जगह हो चुकी है़

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45 दिनों में सालाना औसत की 50% बारिश दर्ज

चालू मॉनसूनी सीजन 2020 में एक जून से 15 जुलाई तक प्रदेश में सालाना औसत की तुलना में करीब 50 फीसदी बारिश दर्ज हो चुकी है़ यह अपने आप में रिकार्ड है़ प्रदेश में 15 जुलाई तक 514.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है़ अगर बात 15 जुलाई तक होने वाली सामान्य बारिश की बात करें तो उससे 50 फीसदी अधिक बारिश हुई है़ 15 जुलाई तक सामान्य तौर पर बेहद अच्छे परिदृश्य में बारिश की मात्रा केवल 342 मिलीमीटर है़ प्रदेश के वे जिले जहां सामान्य की तुलना में सौ फीसदी अधिक या उसके आसपास बारिश हुई है, उनमें दरभंगा,इस्ट चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर,सुपौल और सारण हैं.

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अगले 72 घंटे भारी बारिश से राहत पूरे प्रदेश में

पूरे प्रदेश में बुधवार से अगले 72 घंटे तक कोई खास मॉनसूनी सिस्टम दिखायी नहीं दे रहा है़ इसकी वजह से केवल तापमान बढ़ने से हल्की फुल्की बारिश होगी़ पुरवैया हवा के साथ आ रही नमी के चलते कुछ एक जगहों में ठनका गिर सकता है. फिलहाल गुरुवार से तापमान में कुछ इजाफा हो सकता है.

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