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Bihar Weather: बिहार में मानसून की एंट्री! 24 घंटों में मेघगर्जन के साथ 18 जिलों में होगी जोरदार बारिश

Updated at : 11 Jun 2025 4:28 PM (IST)
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bihar weather news

सांकेतिक तस्वीर

Bihar Weather: बिहार में गर्मी के प्रचंड तेवर से लोगों की बेचैनी बढ़ गयी है. तीखी धूप की तपिश ने लोगों को बेहाल कर दिया है. दिन की सुबह होते ही तेज धूप का सामना करने की हिम्मत लोग नहीं जुटा पा रहे. लेकिन आने वाले 24 घंटे के अंदर लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है. क्योंकि बिहार मौसम सेवा केंद्र ने अगले 24 घंटे के अंदर वज्रपात के साथ बारिश होने का अलर्ट जारी किया है.

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Bihar Weather: बिहार के 18 जिलों में अगले 24 घंटे के अंदर बारिश होगी. वहीं कुछ जगहों पर मेघगर्जन के साथ वज्रपात की संभावना है. इसे लेकर बिहार मौसम सेवा केंद्र ने अलर्ट जारी किया है. बिहार मौसम सेवा केंद्र के अनुसार, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, कटिहार, खगड़िया, लखीसराय, मुंगेर, पटना, पूर्णिया, पश्चिमी चंपारण, मधुबनी, समस्तीपुर, अररिया, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, सुपौल और शिवहर जिले में बारिश और मेघगर्जन के साथ साथ वज्रपात होने की संभावना है. बिहार मौसम सेवा केंद्र के अनुसार अगले 24 घंटों में राज्य के करीब 18 जिलों में बारशि होनी है.

बिहार में कब होगी मानसून की एंट्री?

मौसम विभाग के अनुसार, बिहार में मानसून प्रवेश की तारीख 13 से 15 जून है. 12 जून को अनेक स्थानों पर बारिश की संभावना है. इस बार मानसून की बारिश सामान्य से अधिक होगी. मौसम विभाग ने मानसून में बारिश को लेकर पूर्वानुमान जताया है. इसमें बताया है कि बिहार में मानसून की बारिश सामान्य से 11 प्रतिशत अधिक होगी. अगर सामान्य से अधिक बारिश होती है, तो 2021 के बाद प्रदेश में सामान्य से अधिक बारिश होगी. मौसम विज्ञान केंद्र पटना के अनुसार बीते वर्ष प्रदेश में पांच दिनों की देरी से 20 जून को मानसून आया था.

बिहार में इस बार मानसून रहेगा कमजोर

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार 2025 में बिहार में मानसून की बारिश सामान्य से कम हो सकती है. ये चौथा लगातार साल होगा जब प्रदेश में औसत से कम बारिश होगी. 10-दिवसीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 15 जून से 66% तक बारिश की संभावना है, मगर दीर्घकालिक राहत के लिए किसानों को वैकल्पिक उपाय करने होंगे. ऐसे में रोहतास में भी कम बारीश की संभावना जतायी जा रही है. ऐसे में धान व अन्य वर्षा-निर्भर फसलें प्रभावित हो सकती हैं. पानी की कमी से उपज पर असर पड़ सकता है. इसके लाभ में कम बारिश से कीट-पतंग और रोग का प्रकोप कम होगा. लेकिन इसका फायदा तभी मिलेगा जब सिंचाई की समुचित व्यवस्था होगी.

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Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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