बिहार में गांव की 37 हजार किमी सड़क हुई चकाचक, इस जिले में हुआ सबसे ज्यादा काम

Author Ashish jha
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New Road in Bihar More than three lakh people benefit

सांकेतिक तस्वीर

Bihar Road: गांव के लोगों के लिए यह सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि बाज़ार, अस्पताल, स्कूल और रोज़गार तक आसान पहुंच का रास्ता है. इस योजना के तहत अब तक 16,167 सड़कों की मरम्मत को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है.

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Bihar Road: पटना. गांव की गलियों से लेकर खेत-खलिहानों तक जाने वाली पक्की सड़कों का चेहरा अब बदल रहा है. बिहार ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति 2018 के तहत राज्य के ग्रामीण इलाकों में 40,252 किलोमीटर से अधिक लंबाई की सड़कों की मरम्मती और रखरखाव का काम तय किया गया था. इसमें से अब तक 37,026 किलोमीटर से ज्यादा सड़कों चकाचक करने का काम पूरा हो चुका है.

15,404 किलोमीटर की सड़कों का काम पूरा

गांव के लोगों के लिए यह सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि बाज़ार, अस्पताल, स्कूल और रोज़गार तक आसान पहुंच का रास्ता है. इस योजना के तहत अब तक 16,167 सड़कों की मरम्मत को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है. जिनकी कुल लंबाई 40,252 किलोमीटर से अधिक है. इन पर 20 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा खर्च किया जा रहा है. इनमें से 15,404 सड़कों की मरम्मती पहले ही पूरी हो चुकी है, जिनकी लंबाई 36,574 किलोमीटर से अधिक है.

कौन सा जिला सबसे आगे?

अनुरक्षण यानी सड़कों की मरम्‍मत के मामले में पूर्वी चंपारण सबसे आगे है। यहां 2,370 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सड़कों चकाचक किया गया है। इसके बाद दूसरे नंबर पर पश्चिम चंपारण है। यहां 1,979 किलोमीटर सड़कों को सुदृढ़ बनाया गया है। वहीं, मुजफ्फरपुर के गांवों की भी 1,644.85 किलोमीटर सड़कों को मजबूत किया गया है। इसके अलावा सारण में 1,570.11 किलोमीटर, समस्तीपुर में 1,399.11 किलोमीटर, गयाजी में 1,364.88 किमी और वैशाली 1,351 किलोमीटर सड़के चकाचक हो गईं हैं.

बदल रही है गांव की सड़कें

मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के दिशा निर्देश के तहत अब बिहार ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति 2018 का मकसद सिर्फ सड़क बनाना नहीं, बल्कि उन्हें लंबे सम��� तक दुरुस्त रखना भी है. इसमें ग्रामीण सड़कों और पुलों का नियमित रख-रखाव किया जाता है, ताकि बरसात, गर्मी या सर्दी, किसी भी मौसम में गांव के लोग इन रास्‍तों पर आसान सफर कर सकें, जिसका लाभ गांव के किसानों से लेकर स्‍कूल जाने वाले बच्‍चों तक को मिल रहा है. किसानों के लिए फसल मंडी तक पहुंचा आसाना हुआ है. स्कूल जाने वाले बच्‍चों को सुविधा होगी और बीमार लोगों को पक्‍के रास्‍तों से अस्‍पतालों तक पहुंचाना आसान होगा. अब गांव की सड़कों चेहरा बदल रहा है. लोगों के जीवन में सुधार आ रहा है.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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