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यूएनओ प्रमुख के सलाहकार ग्रुप में पटना वीमेंस कॉलेज की अर्चना सोरेंग भी शामिल,बिगड़ते जलवायु संकट से निबटने के लिए करेंगी काम

Updated at : 29 Jul 2020 8:50 AM (IST)
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यूएनओ प्रमुख के सलाहकार ग्रुप में पटना वीमेंस कॉलेज की अर्चना सोरेंग भी शामिल,बिगड़ते जलवायु संकट से निबटने के लिए करेंगी काम

पटना: पटना वीमेंस कॉलेज की पूर्व छात्रा अर्चना सोरेंग का चयन संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अपने नये सलाहकार समूह में किया है. इस यूथ एडवाइजरी समूह में युवा नेता शामिल हैं, जो कोरोना के दौरान बिगड़ते जलवायु संकट से निबटने के लिए दृष्टिकोण और समाधान देंगे. यूथ एडवाइसरी ग्रुप ऑन क्लामेट चेंज के अंतर्गत अर्चना के अलावा अलग-अलग देशों से छह युवाओं का चयन किया गया है, जिनकी उम्र 18 से 28 साल है. अर्चना ओड़िशा के सुंदरगढ़ जिले की मूल निवासी हैं.

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पटना: पटना वीमेंस कॉलेज की पूर्व छात्रा अर्चना सोरेंग का चयन संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अपने नये सलाहकार समूह में किया है. इस यूथ एडवाइजरी समूह में युवा नेता शामिल हैं, जो कोरोना के दौरान बिगड़ते जलवायु संकट से निबटने के लिए दृष्टिकोण और समाधान देंगे. यूथ एडवाइसरी ग्रुप ऑन क्लामेट चेंज के अंतर्गत अर्चना के अलावा अलग-अलग देशों से छह युवाओं का चयन किया गया है, जिनकी उम्र 18 से 28 साल है. अर्चना ओड़िशा के सुंदरगढ़ जिले की मूल निवासी हैं.

संयुक्त राष्ट्र संघ ने अर्चना के बारे में कहा

संयुक्त राष्ट्र संघ ने 27 जुलाई को एक बयान में कहा, अर्चना एडवोकेसी और अनुसंधान में अनुभवी हैं और वह स्वदेशी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान, सांस्कृतिक प्रथाओं का दस्तावेज संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए काम कर रही हैं. अपने चयन पर अर्चना कहा कि हमारे पूर्वज अपने पारंपरिक ज्ञान और प्रथाओं के माध्यम से सदियों से जंगल और प्रकृति की रक्षा कर रहे हैं. अब हम पर है कि जलवायु संकट से निबटने में सबसे आगे चलने वाले धावक बनना चाहते हैं या नहीं.

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इनका भी हुआ चयन

क्लाइमेट चेंज ऑन यूथ एडवाइजरी समूह में निसरीन एलसैम(स्पेन), अर्नेस्ट गिबशन (फिजी), अर्चना सोरेंग (इंडिया), व्लैडस्लव कैम (मोलडोवा), सोफिया कैनी(अमेरिका), नथान मेटेनियर( फ्रांस) और पोलोमा कोस्टा (ब्राजील).

मेहनत का फल मिला

अर्चना बताती हैं कि वह 2019 में यूएनओ के यौंगो (यूथ कॉन्सीट्वेंस ऑफ यूएनएफ सीसीसी ) से जुड़ी हुई हैं. तब से अब तक उनका लेख नेशनल और इंटरनेशनल यूथ वेबसाइट पर प्रकाशित होते रहे हैं. वह रिजनल और नेशनल लेवल पर युवा समूहों से जुड़ी हुई हैं. वह समुदाय से पारंपरिक जानकारियों को संरक्षित करने के साथ-साथ उसे प्रमोट करती हैं. पिछले साल अक्तूबर में उन्होंने 66वां सीइएससीआर (कमेटी ऑन इकोनॉमिक, सोशल एंड कल्चरल राइट्स) के डिस्कशन में जिनेवा में अपना प्रेजेंटेशन दिया था. वह भारत से इकलौती प्रतिभागी थीं.जून, 2020 में यूथ एडवाइजरी समूह की चयन की प्रक्रिया शुरू हुई. उस वक्त यौंगो की ओर से 40 प्रतिभागियों में तीन लोगों के नाम प्रस्तावित किये गये, जिनमें अर्चना भी शामिल थीं. फिर यूएनओ की टीम ने उनका नाम सात फाइनलिस्ट में चयन किया, जिसका रिजल्ट 27 जुलाई को जारी किया गया.

पटना वीमेंस कॉलेज की स्टूडेंट्स रह चुकी हैं अर्चना

अर्चना ने अपनी स्कूलिंग राउरकेला के अपोसटोलिक कार्मेल स्कूल से की है. प्लस टू पास करने के बाद उन्होंने पटना वीमेंस कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन 2013-2016 में किया. पीजी की पढ़ाई उन्होंने मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस से की. अभी वह ओड़िशा की वसुंधरा नामक संस्था में रिसर्च ऑफिसर हैं और लगातार क्लाइमेंट चेंज और जमीन अधिकार को लेकर काम कर रही हैं. पटना वीमेंस कॉलेज की प्राचार्या डॉ सिस्टर मारिया रश्मि एसी ने कहा कि यह कॉलेज के लिए गर्व की बात की अर्चाना का चयन यूएनओ के यूथ एडवाइजरी ग्रुप में किया गया है.

(इनपुट : पटना से जूही स्मिता)

Posted By : Thakur Shaktilochan Shandilya

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