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Bihar News: 422 करोड़ का फ्लाईओवर उद्घाटन के दो महीने बाद ही धंसा, बिहार की विकास योजनाओं पर फिर उठे सवाल

Updated at : 04 Aug 2025 12:32 PM (IST)
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डबल डेक फ्लाईओवर.

डबल डेक फ्लाईओवर.

Bihar News: पटना के अशोक राजपथ पर बना डबल डेक फ्लाईओवर भारी बारिश में धंस गया—और साथ ही धंस गई विकास कार्यों की साख और सिस्टम की जवाबदेही.

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Bihar News: बिहार की राजधानी पटना में दो महीने पहले ही बड़े शोर-शराबे और सियासी दावों के बीच उद्घाटन किए गए राज्य के पहले डबल डेक फ्लाईओवर का एक हिस्सा भारी बारिश के बीच धंस गया. इस फ्लाईओवर को ₹422 करोड़ की लागत से जामग्रस्त अशोक राजपथ की राहत के तौर पर प्रस्तुत किया गया था. लेकिन अब इसका एक हिस्सा धंसने से निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

पटना में बीते दो दिनों से लगातार हो रही बारिश ने एक ओर जहां शहर की सड़कें डुबो दी हैं, वहीं दूसरी ओर विकास कार्यों की मजबूती की परतें भी उधेड़ दी हैं. राज्य के पहले डबल-डेकर फ्लाईओवर का एक हिस्सा रविवार को धंस गया, जिसका उद्घाटन 11 जून को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था.

यह फ्लाईओवर गांधी मैदान के पास कारगिल चौक से लेकर पीएमसीएच और साइंस कॉलेज तक बनाया गया था, ताकि व्यस्त अशोक राजपथ पर ट्रैफिक का दबाव कम किया जा सके. लेकिन बारिश के बाद फ्लाईओवर की सतह पर गड्ढा बन गया, जिससे आने-जाने वाले लोगों में दहशत फैल गई.

वीडियो वायरल, सवाल बेहिसाब

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा एक्स (पूर्व ट्विटर) पर शेयर किए गए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एलिवेटेड कॉरिडोर पर पानी जमा हो गया है और एक बड़ा हिस्सा धंस चुका है, जबकि उसी पर अब भी वाहन चल रहे हैं. वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने कंस्ट्रक्शन क्वालिटी और सरकारी निगरानी प्रणाली को लेकर तीखे सवाल दागने शुरू कर दिए.

https://twitter.com/ANI/status/1952035910318473567

कई इलाकों में जलभराव, जनजीवन बेहाल

पटना के कंकड़बाग, राजेंद्र नगर, एग्ज़िबिशन रोड और गांधी मैदान जैसे इलाकों में घरों, स्कूलों और अस्पतालों तक में पानी भर गया है. सड़कों पर जलभराव के कारण ट्रैफिक जाम, बीमार लोगों की आवाजाही और बच्चों की पढ़ाई सब ठप हो गई है.

यह पहली बार नहीं है जब बिहार में भारी भरकम बजट से तैयार कोई प्रोजेक्ट कुछ ही महीनों में सवालों के घेरे में आ गया हो. डबल डेक फ्लाईओवर को लेकर अब यह बहस छिड़ गई है कि क्या इसे जल्दबाज़ी में उद्घाटित किया गया था? क्या इसकी गुणवत्ता की ठीक से जांच हुई थी? और क्या जनता के टैक्स के पैसे का इस तरह इस्तेमाल जिम्मेदार शासन की मिसाल है?

बिहार में इस वक्त सवाल सिर्फ एक फ्लाईओवर के धंसने का नहीं, बल्कि विकास की नींव में कितनी सच्चाई है—इसका है. क्या ₹422 करोड़ की लागत पर बने फ्लाईओवर का दो महीने में ही इस तरह कमजोर हो जाना महज प्राकृतिक आपदा का असर है? या यह सिस्टम की एक बड़ी चूक है? जवाबदेही अब जरूरी है

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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