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राजस्व विभाग सुधारेगा 1972 में हुई गलती, खाता अनलॉक कर रजिस्टर-2 में दर्ज होगी जमाबंदी

Updated at : 07 Feb 2025 10:34 PM (IST)
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Bihar land Survey

Bihar land Survey

Bihar Land Survey: अनेक रैयतों की जमाबंदी ऑनलाइन नहीं की जा सकी थी. बाद में शिकायत मिली कि अंचलों में ऐसी छूटी हुई जमाबंदियों को गलत तरीके से पंजी-2 में जमाबंदी कायम कर दिया गया, फिर उसे ऑनलाइन कर दिया गया. इस प्रकार की 9.65 हजार जमाबंदी संदेहास्पद हैं.

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Bihar Land Survey: पटना. भूमि जमाबंदी को ऑनलाइन करते समय बड़ा खेल किया जा रहा है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग खुद स्वीकार कर रहा कि डिजिटाइजेशन में कई तरह की त्रुटि सामने आ रही हैं. 1972 में हुए सर्वे के बाद कुछ जमाबंदियों में रैयतों के नाम, खाता, खेसरा, रकवा एवं लगान से संबंधित विवरणों में गलती रह गई थी. लिहाजा अब जब रैयतों की जमाबंदी ऑनलाइन हो रही है तो खाता लॉक बता रहा है. इसके बाद शिकायत मिली कि अंचलों में ऐसी छूटी हुई जमाबंदियों को गलत तरीके से पंजी-2 में जमाबंदी कायम कर दिया गया है. विभाग ने जानकारी दी है कि इस प्रकार की 9.65 हजार जमाबंदियों को छूटा हुआ बताकर ऑनलाइन खाता खोला गया है. अब ऐसे सभी खातों की जांच होगी.

अनलॉक होगा खाता, रैयतों से लिया जायेगा दस्तावेज

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने डिजिटाइजेशन के दौरान हुई कई तरह की त्रुटियों के कारण लॉक की गई जमाबंदी को अनलॉक करने का निर्णय लिया है. इस संबंध में विभाग ने नया दिशा निदेश जारी किया है. जमाबंदी की वैधता की जांच और उसे लॉक/अनलॉक करने की शक्ति अब अंचल अधिकारियों को दे दिया गया है. पहले यह अधिकार भूमि सुधार उप समाहर्ताओं को दिया गया था, लेकिन काम में आशा के अनुरूप प्रगति नहीं होने के कारण विभाग ने यह निर्णय लिया है. इस संबंध में निदेशक, चकबंदी ने सभी समाहर्ताओं को पत्र लिखा है.

अंचल अधिकारियों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की तरफ से बताया गया है कि लॉक जमाबंदी में सरकारी भूमि शामिल होने पर अंचल अधिकारी द्वारा अभिलेख खोलकर उसकी जांच की जाएगी. सरकारी भूमि पाए जाने की स्थिति में संबंधित पक्ष को नोटिस निर्गत किया जायेगा. उसे उचित अवसर प्रदान करते हुए उसे रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी. जांच के क्रम में सरकारी भूमि से अलग अर्थात रैयती स्वरूप की भूमि पाए जाने पर उसे अनलॉक करने की कार्रवाई की जाएगी. विभागीय समीक्षा में यह पाया गया कि लंबे समय से यह प्रक्रिया जारी रहने के बावजूद डिजिटाइजेशन के दौरान छूटी हुई जमाबंदी की वैधता की जांच एवं उसे लॉक/अनलॉक करने की कार्रवाई नहीं की जा रही है.

छूटी हुई जमाबंदियों को गलत तरीके से भरा गया

विभागीय बैठकों में भूमि सुधार उप समाहर्ताओं द्वारा बताया गया कि रैयती भूमि के जमाबंदी सृजन का साक्ष्य अंचलों द्वारा उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण उन्हें निर्णय लेने में परेशानी हो रही है. पूर्व में भी इस संबंध में एक पत्र चकबंदी निदेशक द्वारा सभी जिला पदाधिकारियों को लिखा गया था. पत्र में कहा गया था कि लॉक जमाबंदी की जांच के क्रम में रैयती भूमि का मामला पाया जाता है, तो उसे अनलॉक करने की कार्रवाई करके उसकी सूची मौजावार पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाए. डिजिटाइजेशन के क्रम में कुछ जमाबंदियों रैयतों के नाम, खाता, खेसरा, रकवा एवं लगान से संबंधित विवरणों में अशुद्धियां रह गई थीं.

10 लाख जमाबंदी संदेहास्पद

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि करीब 10 लाख जमाबंदियों को संदेहास्पद पाया गया था. जांच में तेजी लाने के लिए इस काम को भूमि सुधार उप समाहर्ताओं से लेकर अंचल अधिकारियों को दिया गया है. साथ ही उन्हें रैयती भूमि की जांच कर उन जमाबंदियों को शीघ्र अनलॉक करने का निदेश दिया गया है ताकि आमलोगों को दाखिल-खारिज के काम में कोई असुविधा नहीं हो.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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