Bihar News : जूनियर डॉक्टर्स के हड़ताल से बढ़ी परेशानी, इलाज नहीं मिलने से आक्रोशित हुए मरीज व परिजन

Updated at : 24 Aug 2022 5:31 AM (IST)
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Bihar News : जूनियर डॉक्टर्स के हड़ताल से बढ़ी परेशानी, इलाज नहीं मिलने से आक्रोशित हुए मरीज व परिजन

पटना के पीएमसीएच में जूनियर डॉक्टर्स के हड़ताल की वजह से इलाज नहीं मिलने पर नाराज मरीज व परिजन उग्र हो गये और काउंटर खोलने की मांग करने लगे. घंटों इंतजार के बाद भी जब काउंटर नहीं खुला तो नाराज परिजन व डॉक्टरों के बीच धक्का-मुक्की की नौबत हो गयी.

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पटना. पीएमसीएच में इंटर्न डॉक्टरों के हड़ताल का असर दूसरे दिन भी देखने को मिला. हड़ताल के कारण मंगलवार को पीएमसीएच इलाज करने पहुंचे 2500 मरीजों में से 1500 मरीजों को बगैर इलाज के ही लौटना पड़ा. जैसे ही सुबह रजिस्ट्रेशन काउंटर खुला आक्रोशित इंटर्न डॉक्टरों ने सभी काउंटर बंद करा दिया. इलाज नहीं मिलने से नाराज मरीज व परिजन उग्र हो गये और काउंटर खोलने की मांग करने लगे. घंटों इंतजार के बाद भी जब काउंटर नहीं खुला तो नाराज परिजन व डॉक्टरों के बीच धक्का-मुक्की की नौबत हो गयी. इस दौरान काउंटर के अंदर तोड़फोड़ की गयी, काउंटर नंबर नौ आदि के शीशे तोड़ दिये गये.

फॉलोअप व पुराने पर्चे पर अधिकांश मरीजों का हुआ इलाज

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मंगलवार की सुबह जैसे ही 8:30 बजे काउंटर खुला इंटर्न डॉक्टर पहुंच गये और सभी कर्मियों को बाहर निकाल ताला जड़ दिया. सुबह 8:30 से दोपहर 1:30 बजे कुल पांच घंटे में महज 1050 मरीजों का ही रजिस्ट्रेशन हो पाया. इससे 1500 से अधिक मरीज बिना इलाज के ही लौट गये. कई पुराने मरीजों को डॉक्टरों ने फॉलोअप में देखा तो कुछ मरीजों का इलाज पुराने पर्चे पर किया गया. 500 से ज्यादा लोगों की पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी समेत दूसरे विभागों में जांच नहीं हो सकी. पांच घंटे तक काउंटर पर अफरातफरी का माहौल रहा.

दो बैच के एक साथ आने से संख्या हुई दोगुनी

पीएमसीएच में दो बैच के इंटर्न डॉक्टरों के एक साथ आने से इनकी संख्या अधिक हो गयी है. एक बैच में 160 दोनों बैच में कुल 320 इंटर्न डॉक्टर पीएमसीएच के अलग-अलग विभाग में इंटर्नशिप कर रहे हैं. पिछले साल कोरोना की वजह से सीनियर बैच का इंटर्न नहीं होने की वजह से सीनियर व जूनियर दोनों का एक साथ इंटर्न कराया जा रहा है. वहीं डॉक्टरों की मांग है कि 12 घंटे ड्यूटी के बदले उनको सिर्फ 15 हजार रुपये ही स्टाइपेंट मिलता है. जबकि पटना एम्स में 27 हजार और अन्य राज्यों में 30 हजार से अधिक रुपये मिलते हैं. ऐसे में जब तक एम्स के तर्ज पर उनको भी राशि नहीं दी गयी तो आंदोलन जारी रहेगा.

सर्दी जुकाम व चर्म रोग के अधिक पहुंचे थे मरीज

मेडिसिन विभाग में अधिकांश मरीज सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार जैसी समस्याएं लेकर पहुंचे थे. पेट दर्द जैसी सामान्य समस्याओं को लेकर भी मरीज पहुंचे. न्यूरोलॉजी विभाग में सर्वाधिक सिर दर्द, चक्कर, उलटी जैसी परेशानी लेकर मरीज आएं थे. इसके अलावा चर्म रोग में खासी भीड़ दिखी. चेहरे पर दाने, खुजली, त्वचा में चक्कते समेत दूसरी बीमारी के मरीज अधिक थे.

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सिर्फ ओपीडी में पड़ा है असर

पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ आइएस ठाकुर ने बताया की तोड़फोड़ की सूचना मिलते ही सुरक्षा गार्ड मौके पर पहुंच गये और मामले को शांत कराया. सुरक्षा गार्डों की मौजूदगी में रजिस्ट्रेशन काउंटर फिर से खोला गया और करीब 1050 से अधिक मरीजों का इलाज हुआ. हड़ताल का असर सिर्फ ओपीडी में पड़ा है, वार्ड से लेकर ओटी तक सभी डॉक्टरों को अलर्ट कर दिया गया था. ओपीडी में भी सीनियर व जूनियर डॉक्टरों ने मरीजों का इलाज किया.

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