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Bihar: जीरो फिगर की चाहत कर रहा बिहार की आधी आबादी को बीमार, पांच वर्षों में बढ़े दोगुने मामले

Updated at : 10 Jun 2024 9:53 AM (IST)
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Bihar: जीरो फिगर की चाहत कर रहा बिहार की आधी आबादी को बीमार, पांच वर्षों में बढ़े दोगुने मामले

Bihar: अपने आप को स्लिम दिखाने की चाह में आधी आवादी क्रश डाइटिंग कर रही हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट रही है. इस तरह महिलाएं खुद को टीबी का शिकार बना रही हैं.

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Bihar: पटना. जीरो फिगर की चाहत बिहार की आधी आबादी को बीमार कर रहा है. अब तक कुपोषण के शिकार बच्चों को ही टीबी की बीमारी होने की बात कही जा रही थी, लेकिन हाल के वर्षों में में टीबी की बीमारी आधी आबादी को अपनी चपेट में ले चुकी है. किशोरियों से लेकर शादीशुदा महिलाएं तेजी से बीमार हो रही है. मध्यम वर्ग हो या उच्च मध्य वर्ग या फिर उच्च वर्ग सभी वर्गों में यह बीमारी जीरो फिगर की चाहत में होने की बात सामने आ रही है. जीरो फिगर (31-23-32) का मतलब शरीर का ऊपरी हिस्सा लगभग 31 इंच, कमर 23 इंच और कूल्हे का आकार 32 इंच होता है. महिलाओं के लिए जीरो फिगर का यही अर्थहोता है, लेकिन इस फिगर को पाना पहली बात तो आसान नहीं है और दूसरी बात इसके लिए भोजन छोड़ देना तो कतई ठीक नहीं हैं.

पांच वर्षों में दोगुने हुए मामले

आंकड़े बताते हैं कि संपन्न घरों में रहनेवाली आधी आबादी के टीबी के शिकार होने की रफ्तार बीते पांच वर्षों में दोगुनी हुई है. अकेले भागलपुर जिले में ही हर माह औसतन 200 से 250 टीबी के नये मामले जांच में पाए जा रहे हैं. साल 2017 में ये संख्या चार से पांच महिलाएं प्रतिमाह की दर से मिल रही थीं. इनकी उम्र 17 से लेकर 40 साल तक की होती हैं. इनमें से संपन्न घरों की तीन से चार की संख्या में ऐसी महिलाएं (किशोरियां, युवती व विवाहित महिलाएं) हैं, जो कि टीबी की शिकार होती हैं. संपन्न परिवार की बच्चियां टीबी की चपेट में आ रही हैं. सभी की केस हिस्ट्री में पता चल रहा है कि उनमें वजन कम करने का जबरदस्त चाह है. कई मामले तो ऐसे पाए जा रहे हैं, जो कि 15 से 20 किलो तक वजन कम कर रहे हैं. बिना पौष्टिक आहार को भोजन में शामिल किए बिना सिर्फ क्रश डाइटिंग से वजन कम करने का प्रयास होगा तो तय है कि उसकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होगी तो वह कुपोषण, टीबी समेत अन्य प्रकार की बीमारियों का शिकार हो जाएंगी.

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रोग प्रतिरोधक क्षमता हो रही कमजोर

वरीय फिजिशियन डॉ. विनय कुमार झा मीडिया से बात करते हुए कहते हैं कि काउंसिलिंग में पता चलता है कि वे वजन घटाने या यूं कह लें कि क्रश डाइटिंग यानी भोजन की मात्रा एकदम से कम कर देती हैं. जिससे उनमें भोजन न पचने की शिकायत होती है. ऐसे में जब वे कुछ खाती भी हैं तो उन्हें उल्टी आ जाती है. यहां तक कि वे कुपोषण की शिकार हो जाती हैं. उनकी जब टीबी जांच करायी जाती है तो वे टीबी की शिकार मिलती हैं. जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के टीबी एंड चेस्ट विभाग के अध्यक्ष डॉ. शांतनु कुमार घोष ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कम समय में वजन घटाने की महिलाओं में होड़ मची हुई है. एक या दो महीने में तीन से चार किलो वजन घटाने के चक्कर में ये महिलाएं डाइटिंग करने के साथ हार्ड एक्सरसाइज भी करती हैं. इससे इनका शरीर पतला हो जाता है, लेकिन ऐसा करने से उनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जा रही है. इस कारण आसानी से टीबी का संक्रमण इन्हें घेर लेता है.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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