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सीवरेज प्लांट के रखरखाव में चूक एजेंसी पांच साल के लिए ब्लैकलिस्टेड

Updated at : 04 Jan 2026 12:32 AM (IST)
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सीवरेज प्लांट के रखरखाव में चूक एजेंसी पांच साल के लिए ब्लैकलिस्टेड

बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के संचालन व रखरखाव में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में बड़ी कार्रवाई की है.

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संवाददाता, पटना बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के संचालन व रखरखाव में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में बड़ी कार्रवाई की है. बुडको ने दानापुर, फुलवारीशरीफ और फतुहा में इंसीजन एंड ड्रेनेज (आइ एंड डी) और एसटीपी परियोजना का कार्य कर रही एजेंसी मेसर्स भुगन इन्फ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड को अगले पांच साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है. बता दें कि एजेंसी को 23 नवंबर 2020 को 176.19 करोड़ रुपये की लागत से डिजाइन, निर्माण, संचालन और रखरखाव (डीबीओएम) मॉडल पर परियोजना सौंपी गयी थी. एजेंसी को 22 नवंबर 2021 तक पूरा किया जाना था. एसटीपी के पूरा होने के बाद ठीक से न तो संचालन किया गया न ही देखभाल की गयी. वहीं, बार-बार सीवेज पंपिंग स्टेशन (एसपीएस) से दानापुर एसटीपी तक जाने वाली पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होती रही. इसके कारण गंदे पानी का रिसाव भी होता रहा. स्पष्टीकरण का नहीं मिला जवाब: एसटीपी प्लांट पर तकनीकी व गैर तकनीकी स्टाफ नियम व शर्तों के अनुरूप नहीं था. बुडको ने इस संबंध में एजेंसी को तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देते हुए सभी कमियों को दूर करने का निर्देश दिया था. इसके बावजूद, न तो कमियों का निराकरण किया गया और न ही संतोषजनक जवाब दिया गया. बुडको के परियोजना निदेशक ने बताया कि एजेंसी की लापरवाही से सार्वजनिक स्वास्थ्य व पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है. प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट में भी ट्रीटेड वॉटर निर्धारित मानकों के अनुसार नहीं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने 30 अक्टूबर 2025 को रिपोर्ट दी कि दानापुर और फुलवारीशरीफ एसटीपी का ट्रीटेड वॉटर निर्धारित मानकों के अनुसार नहीं है. इसके अलावा, नई दिल्ली से आयी नमामि गंगे मिशन की टीम द्वारा 19 फरवरी 2025 को 25 एमएलडी दानापुर एसटीपी के निरीक्षण के दौरान प्लांट बंद पाया गया. निरीक्षण में यह भी सामने आया कि एसटीपी में एसबीआर तकनीक आधारित पीएलसी स्काडा सिस्टम कार्यशील नहीं था और तकनीकी मानकों को पूरा नहीं किया जा रहा था. दरअसल, पीएलसी एक हार्डवेयर कंट्रोलर है जो मशीनों को नियंत्रित करता है, जबकि स्काडा एक सॉफ्टवेयर है जो पूरे सिस्टम की निगरानी और डेटा संग्रह करता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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MAHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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