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मुख्यमंत्री पुराने वायदों की समीक्षा करें : मोदी

Updated at : 09 Nov 2016 6:57 AM (IST)
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मुख्यमंत्री पुराने वायदों की समीक्षा करें : मोदी

पटना : भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने 9 नवंबर से मुख्यमंत्री की शुरू हो रही निश्चय यात्रा पर निशाना साधते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री को अपनी यात्रा के दौरान पिछले 10 वर्षों में जिलों में किये गये वायदों, शिलान्यास, घोषणाओं की भी समीक्षा करनी चाहिए. समीक्षा से पता […]

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पटना : भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने 9 नवंबर से मुख्यमंत्री की शुरू हो रही निश्चय यात्रा पर निशाना साधते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री को अपनी यात्रा के दौरान पिछले 10 वर्षों में जिलों में किये गये वायदों, शिलान्यास, घोषणाओं की भी समीक्षा करनी चाहिए. समीक्षा से पता चल सकेगा कि आखिर उन शिलालेखों, घोषणाओं के क्रियान्वयन का क्या हश्र है जिसे मुख्यमंत्री ने अपनी पिछली 9 यात्राओं या अन्य सरकारी दौरो में की थी.
नये निश्चयों की समीक्षा तो होगी परन्तु पुराने निश्चयों का क्या होगा. मोदी ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि हर बार बगहा से यात्रा प्रारम्भ करते वाले मुख्यमंत्री क्या थारूओं को किये गये अधूरे वायदों के डर से बेतिया से यात्रा प्रारंभ कर रहे हैं. थारू बहुल हरनाटांढ़ में आइटीआइ, प्रत्येक थारू परिवार को सोलर लैंप, आदिवासी लड़के-लड़कियों के लिए 10 आवासीय विद्यालय, बगहा में पॉलिटेक्निक, डिग्री कॉलेज, स्टेडियम, आदिवासी महिलाओं के लिए स्वाभिमान बटालियन जैसे वायदों को मुख्यमंत्री भूल गये हैं.
अपराध, अराजकता व अहंकार की भेंट चढ़ा जनादेश : नंदकिशोर
वरिष्ठ भाजपा नेता व लोक लेखा समिति के सभापति नंदकिशोर यादव ने कहा कि बिहार में महागंठबंधन को मिला जनादेश अपराध, अराजकता और अहंकार की भेंट चढ़ गया. साल भर पूर्व राज्य की जिस जनता ने महागंठबंधन को सत्ता की चाभी सौंपी थी, आज वही खुद को ठगा महसूस कर रही है. महागंठबंधन के नेताओं की घोषणाएं भ्रमजाल साबित हो गयीं.
चुनाव पूर्व शुरू हुआ मिशन बढ़ चला बिहार से लेकर अभी तक उद्घाटन और भाषण में सिमटा सात निश्चय, सब के सब हवा- हवाई ही हैं. सात निश्चयों के जिन वायदों को पूरा करने का दावा किया जा रहा है उसका लाभ भी अब तक बिहारवासियों को नहीं मिल पा रहा है. अपराधी और अराजक तत्वों का मनोबल सर चढ़ कर बोल रहा है.
श्री यादव ने कहा कि जनादेश के साल भर ही पूरे हुए हैं, पर बिहार की जनता महागठबंधन सरकार से ऊब चुकी है. नीतीश कुमार जिस सात निश्चय को बिहार के विकास का ब्लू प्रिंट के रूप में प्रचारित कर रहे हैं, साल भर पूरे होने पर भी जमीन पर उतरता नहीं दिख रहा. अभी निश्चयों के लोकार्पण की ही प्रक्रिया चल रही है. सरकार शराबबंदी को उपलब्धि बता ढोल पीट रही है पर तुगलकी कानून की वजह से यह भी पूरी तरह सफल नहीं हो पा रही है.
सीएम भले ही पुराने वायदों को भूल जाएं, लेकिन भाजपा उन्हें पुराने वायदों को याद कराती रहेगी. सीएम को बताना चाहिए कि ‘कृषि रोड मैप’, ‘मिशन मानव विकास’ को क्यों भूल गये. ‘हर भारतीय की थाली में एक बिहारी व्यंजन’, ’बिहारी कहना शर्म नहीं गर्व की बात’, ‘बिहार के किसी कोने से 5 घंटे में पहुंचना केवल जुमला है या जमीन पर भी उतरेगा. ‘थरूहट विकास प्राधिकार’व ‘महादलित विकास मिशन का क्या हुआ.
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