बिना लोगों की राय के बनाया गया था फरक्का बैराज, पाकिस्तान ने भी किया था विरोध
Author Prabhat khabar digital desk
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मुख्यमंत्री द्वारा सवाल उठाये जाने के बाद फरक्का बैराज को लेकर बहस तेज विशेषज्ञों ने पहले ही दी थी बाढ़ की चेतावनी विशेषज्ञों ने गाद की समस्या की पूर्व में भी दी थी चेतावनी बहस के बाद केंद्र सरकार के राष्ट्रीय जल मार्ग भी सवालों के घेरे में नमािम गंगे कार्यक्रम के तहत गंगा नदी […]
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मुख्यमंत्री द्वारा सवाल उठाये जाने के बाद फरक्का बैराज को लेकर बहस तेज
विशेषज्ञों ने पहले ही दी थी बाढ़ की चेतावनी
विशेषज्ञों ने गाद की समस्या की पूर्व में भी दी थी चेतावनी
बहस के बाद केंद्र सरकार के राष्ट्रीय जल मार्ग भी सवालों के घेरे में
नमािम गंगे कार्यक्रम के तहत गंगा नदी में प्रति एक सौ किलोमीटर पर डैम बनाने की घोषणा हो चुकी है
पटना : बाढ़ और नदियों पर शोध करने वाले विशेषज्ञों की टीम ने माना है कि फरक्का बैराज के कारण गंगा नदी में बाढ़ का प्रकोप बना हुआ है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा इस संबंध में सवाल उठाये जाने के बाद एक बार फिर फरक्का बैराज को लेकर बहस तेज हो गयी है. बिहार सरकार की मांग पर केंद्र सरकार की टीम ने गंगा नदी का बक्सर से फरक्का तक का हवाई सर्वेक्षण भी किया है.
अब लोगाें को कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है. बिहार सरकार भी कई बार कह चुकी है कि बराज की वजह से गंगा नदी में गाद भर गया है. गाद की सफाई नहीं होने के कारण गंगा का बेड ऊंचा हो गया है. इसी वजह से बिहार को बाढ़ के खतरा का सामना करना पड़ रहा है. बाढ़ विशेषज्ञों के अनुसार इसके पूर्व भी गंगा नदी में बराज के कारण गाद की समस्या और बाढ़ की खतरा की चेतावनी दी थी.
बराज पर शुरू हुई बहस के बाद केंद्र सरकार के राष्ट्रीय जल मार्ग भी सवालों के घेरे में है. केंद्र सरकार ने गंगा नदी में 1620 किमी का जल परिवहन विकसित करने की योजना पर काम कर रही है. साथ ही नमामी गंगे कार्यक्रम के तहत गंगा नदी में प्रति एक सौ किलोमीटर पर डैम बनाने की घोषणा हो चुकी है. डैम पर बने विश्व आयोग की एक रिपोर्ट में भी बराज की वजह से गंगा नदी में पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद से मालदा जिले और बिहार-यूपी के जिलों में बाढ़ का खतरा बताया गया था. डैम की अध्ययन के लिए बने विश्व आयोग को 1999 में सौंपी रिपोर्ट में कहा गया था कि गंगा नदी में बराज की वजह से गाद भरेगा.
शोधकर्ता मनीषा बनर्जी ने आशंका व्यक्त की थी कि फरक्का डैम से गंगा नदी में गाद भरेगा और लोगों को बाढ़ की खतरा का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने भविष्य के लिए सुझाव में कहा था कि भविष्य की सुरक्षा के लिए गंगा नदी में जल प्रबंधन के साथ-साथ गाद प्रबंधन की योजना बनानी चाहिए. इस रिपोर्ट को तत्कालीन सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया. विश्व आयोग काे सौंपे गये रिपोर्ट में कहा गया कि बराज बनाने के लिए आम लोगों से सुझाव नहीं लिये गये. अपने रिपोर्ट में उन्होंने लिखा है कि गंगा बेसिन के लिए सरकार को समेकित योजना बनाना चाहिए. 1853 में एक ब्रिटिश इंजीनियर के सुझाव पर आजादी के बाद फरक्का में बराज बनाने के सुझाव का विरोध करने वाले मुख्य अभियंता कपिल भट्टाचार्य ने बराज के विरोध में सरकार को ज्ञापन भी सौंपा था, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे अनसुना कर दिया था. उन्होंने कहा था कि हुगली नदी में गाद के लिए हुगली नदी की सहायक नदियां दामोदर और रूपनारायण नदी के कारण हुगली में गाद जमा हो रहा है.
इसे डैम बनाकर इस समस्या को दूर नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा था कि यदि डैम बना तो आने वाले समय में बंगाल समेत बिहार और यूपी के लोगों को बाढ़ की भयानक समस्या का सामना करना पड़ेगा. गर्मी के दिनों में डैम पर आधी पानी रह जायेगी.
पाकिस्तान ने भी किया था विरोध
बराज की वजह से बांगलादेश (उस समय यह हिस्सा पाकिस्ता न में था ) की ओर बहने वाली पद्मा नदी को भी प्रभावित होने रिपोर्ट में चर्चा थी. तत्कालीन पाकिस्तान सरकार ने 1962 में बराज से पाकि स्ता न यानी बांग्लादेश को होने वाली क्षति के अध्ययन के लिए दो विशेषज्ञ भी नियुक्त किये. कपिल भट्टाचार्य को गद्दार तक कहा गया और बराज पर इनकी सख्त विरोध के कारण उन्हें नौकरी से हटना पड़ा था.
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