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गिरींद्र नाथ झा हले चरण के लिए सोमवार को जब समस्तीपुर , बेगुसराय,खगड़िया,भागलपुर,लखीसराय, शेखपुरा, नवादा, जमुई, मुंगेर और बांका के 49 विधानसभा क्षेत्रों में वोट डाले जा रहे थे तब गाम में बतकही का दौर चरम पर था. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की वजह से लोगबाग पल पल की खबर आंखों से देखने लगे हैं. चैनल के […]

गिरींद्र नाथ झा

हले चरण के लिए सोमवार को जब समस्तीपुर , बेगुसराय,खगड़िया,भागलपुर,लखीसराय, शेखपुरा, नवादा, जमुई, मुंगेर और बांका के 49 विधानसभा क्षेत्रों में वोट डाले जा रहे थे तब गाम में बतकही का दौर चरम पर था. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की वजह से लोगबाग पल पल की खबर आंखों से देखने लगे हैं.

चैनल के रिपोर्टरों को मतदान केंद्र से रिपोर्टिंग करते देखते हुए सुदेश उरांव ने कहा- लगता है आज ही रजिल्ट भी दिखा देगा ई सब! हवा का रुख किधर है इस चीज को भांपने में पॉलिटिकल पंडितों के पसीने छूट रहे हैं. गांव के इरशाद भाई ने बड़ा वाजिब सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि चुनाव से पहले जो सर्वे होता है उसमें कौन-कौन लोग शामिल होते हैं. मतदान से तीन -चार दिन पहले ही उसे क्यों सार्वजनिक किया जाता है.

इरशाद युवा हैं और यह बात उठाते हुए उनका गुस्सा सामने आ गया. इरशाद से बात हो ही रही थी कि एक निजी चैनल पर एक मतदान केंद्र की फुटेज दिख जाती है. संवाददाता लाइन में खड़े मतदाताओं में से एक भाजपा के गिरिराज सिंह से बात करने लगते हैं. गिरिराज लाइन में खड़े होकर भाषण देने लगते हैं. टेलिविजन पर इस तरह के दृश्य दिखाने का असर बतकही में महसूस होने लगा है. लोगबाग इस पर तीखी प्रतिक्रि या दे रहे थे.

गाम के महादलित टोले में एक सामुदायिक भवन बना है. सोमवार को दोपहर में टोल-पड़ोस के लोग वहां इकट्ठा थे. अकलू काका ने कहा कि चुनाव में हमलोगों को खूब प्यार-दुलार मिलता है लेकिन उसके बाद फिर वही. उसने बताया कि इस बार एक पार्टी ने कहा है कि जीतेंगे तो रंगीन टेलीविजन टोला को मिलेगा. पिछली बार नितीश कुमार ने हमको रेडियो दिया था.

रेडियो पर बात छिड़ी तो अकलू काका के आंगन से आवाज आई कि बहुत लोगों ने रेडियो मिलते ही उसे बेच दिया , चायपत्ती-चीनी के लिए. इन सभी लोगों की बातों को सुनकर लगा कि राजनीति को आप कई कोणों से देख सकते हैं. सरकारी तंत्र का जाल किस तरह से बुना जाता है यह भी एक कहानी है.

महादलित टोले में लालू-नितीश के साथ-साथ नरेंद्र मोदी की चर्चा हुई. सलेमपुर वाली काकी ने पूछा-नरेंद्र मोदी क देखने छी अहां? सुनैत छिये कि बड़ जोर से गरज गरज कर बजैत छै.. लालू क हम देखने छिये लेकिन ऊ खाली हंसबे छै. नीतीश कुमार बढ़िया बाजैत छै.

विकास, स्वाभिमान जैसे मुद्दों के संग चुनाव की तैयारी शुरू करने वाली पार्टियां अब जाति के दलदल में फंस चुकी है. अब तो पहला चरण भी हो चुका है. लोगबाग इस पर बात करने लगे हैं. हाजीपुर में हमारे एक मित्र अरविन्द शेखर बताते हैं कि इस चरण में चाहे आप किसी मुद्दे की कोई बात करें लेकिन यहां तेजस्वी और तेजप्रताप की उम्र पर ही लोगबाग बतकही करते रहे. अन्य दल के लोग एक दुसरे को कोसते रहे. कोसने का यह सिलिसला अंतिम चरण तक चलता ही रहेगा.

चुनाव ड्यूटी में लगने वाले हमारे एक मित्र बताते हैं कि ट्रैक्टर और टार्च के बिना कोई भी चुनाव कर्मी का चुनावी जीवन अधूरा लगता है. वहीं दियारा के इलाके में नाव और घोड़े के बिना पुलिस कर्मी का काम अधूरा होता है. इन लोगों की बातचीत के बीच मुङो अपने मास्टर साहब रामजी शर्मा की एक बात याद आती है. वे अक्सर कहते थे कि चुनाव के वक्त नेताओं का आपा खोता ही है साथ ही राजनीति में शुचिता का कोई स्थान नहीं है , आज से नहीं बल्कि सदियों से ऐसा होता आ रहा है.

लेकिन इन सबके बावजूद मतदाताओं को धैर्य रखना चाहिए. मास्टर साहब की बात और इस बार के चुनाव में नेताओं की वाणी बहुत कुछ मुङो समझा रही है. बाद बांकी जो है सो तो हइये है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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