नीतीश ने कहा, धर्म बदल सकता है, पर जाति का ‘डीएनए’ नहीं

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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार को फिर डीएनए के मुद्दे पर मुखर रहे. बोले- बिहार के डीएनए में जातिवाद है, ऐसा बोलनेवाले पहले अपने गिरेबां में देखें. अकेला बिहार ही नहीं, देश के हर राज्य में जातिवाद है, इसे नकारने वाले झूठ बोलते हैं. नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार का गौरव इसका इतिहास […]

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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार को फिर डीएनए के मुद्दे पर मुखर रहे. बोले- बिहार के डीएनए में जातिवाद है, ऐसा बोलनेवाले पहले अपने गिरेबां में देखें. अकेला बिहार ही नहीं, देश के हर राज्य में जातिवाद है, इसे नकारने वाले झूठ बोलते हैं. नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार का गौरव इसका इतिहास और समृद्ध विरासत है. हमें इस पर नाज है. मैं स्वीकारता हूं कि बिहार में जातिवाद है, यह अच्छी बात नहीं. मैं जातिवाद मुक्त समाज में भरोसा रखता हूं, पर हकीकत यह है कि हमारी राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था ही जाति आधारित है. कोई भी व्यक्ति धर्म बदल सकता है, पर धर्म परिवर्तन के बाद भी जातिगत डीएनए आसानी से नहीं छोड़ सकेगा.

मुख्यमंत्री डीएनएवाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर अपने ‘शब्द वापसी’ अभियान को आसानी से छोड़ने के मूड में नहीं दिखे. उन्होंने नरेंद्र मोदी का नाम लिये बगैर कहा कि हम पर सवाल उठाने के पहले वे अपने गृह राज्य को देखें. वहां भी पाटीदार और पटेल समाज ने बड़ा आंदोलन छेड़ रखा है. क्या यह जातिवाद नहीं है? पहले वे अपना घर सुधारें, फिर हम पर अंगुली उठाएं. उन्होंने कहा इसके पहले उनके एक मंत्री बिहार के डीएनए पर सवाल उठा गये थे. जिसका मन होता है, बिहार को कुछ भी कह कर चला जाता है. इसका कारण हमारी सहिष्णुता है. हम बुद्ध व महावीर की धरती से हैं. हमारे अंदर वही संस्कार और गुण हैं. ये सवाल उठानेवाले इस संस्कार को हमारी कमजोरी समझ रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हमने रिएक्ट किया, तो कह रहे हैं कि रिएक्ट करते हैं. बताइए, सही बात को सही कहना भी गुनाह हो गया. मुख्यमंत्री ने रविवार को बढ़ चला बिहार अभियान पर मुख्य रूप से वे 2025 के विजन पर मीिडया से चर्चा कर रहे थे.
‘ब्रेकफास्ट विथ सीएम’ के तहत यह आयोजन हुआ. मुख्यमंत्री अपनी चर्चित संकोची व दूरी बना कर रखने वाली शैली के विपरीत आज मुखर और उत्साह से भरे दिखे. जब पत्रकारों ने कहा कि ऐन चुनाव के वक्त यह अभियान क्यों? नीतीश कुमार ने कहा कि पहले करते, तो आप लोग कहते, अभी तो काम का वक्त है, बीच में सुझाव क्यों? क्या मध्यावधि चुनाव होने जा रहा है? सीएम जो भी लोग बिहार के डीएनए पर सवाल उठाते हैं, वे पहले अपने राज्य पर ध्यान दें जाति आधारित समाज ठीक नहीं, पर राजनीतिक व्यवस्था में जाति शामिल, इसे नकार नहीं सकते ने बिजली, शौचालयों, शिक्षा जैसे कई मुद्दों पर अपनी योजनाओं को बताया. करीब दो घंटे तक सवालों का सिलसिला चला, कुछ सवाल बाकी थे, पर वक्त कम पड़ गया. सीएम को नये राज्यपाल के शपथ समारोह में जाना था, वे बोले- अब विमर्श ब्रेक के बाद करेंगे. वहां शपथ में अगर मैं लेट पंहुचा, तो आप ही कलम उलटी चलाने लगेंगे.
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