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बिना पहचान जांचे नहीं जारी होगा मोबाइल सिम

Updated at : 23 May 2015 6:17 AM (IST)
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बिना पहचान जांचे नहीं जारी होगा मोबाइल सिम

पटना : अब बिहार में कोई भी व्यक्ति फर्जी नाम व पते पर मोबाइल सिम का उपयोग नहीं कर सकेगा. पटना हाइकोर्ट ने मोबाइल कंपनियों को उपभोक्ताओं की पहचान की सत्यता बिना जांचे किसी भी हालत में मोबाइल सिम जारी नहीं करने का आदेश दिया है. न्यायाधीश वीएन सिन्हा और ए अमानुल्लाह के खंडपीठ ने […]

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पटना : अब बिहार में कोई भी व्यक्ति फर्जी नाम व पते पर मोबाइल सिम का उपयोग नहीं कर सकेगा. पटना हाइकोर्ट ने मोबाइल कंपनियों को उपभोक्ताओं की पहचान की सत्यता बिना जांचे किसी भी हालत में मोबाइल सिम जारी नहीं करने का आदेश दिया है. न्यायाधीश वीएन सिन्हा और ए अमानुल्लाह के खंडपीठ ने शुक्रवार को इस मामले में फैसला सुनाया है.
खंडपीठ ने केंद्र सरकार को कहा है कि वह तीन माह में इस संबंध में नयी गाइडलाइन तैयार कर ले. कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की कि किसी को भी देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने नहीं दिया जायेगा. मोबाइल कपंनियां बिना जांचे-परखे किसी को भी सिम उपलब्ध करा दे रही हैं. खंडपीठ ने औरंगाबाद जिले के निवासी बलींद्र सिंह की हेवियस कारपस के मामले में जनवरी में फैसला सुरक्षित रखा था.
कोर्ट के फैसले के अनुसार अब कोई भी व्यक्ति मोबाइल सिम लेने के समय अपनी जो भी पहचान देगा, उसकी सत्यता की जांच के लिए संबंधित कार्यालय को लिखा जायेगा. संबंधित कार्यालय पूरी तरह तहकीकात करने के बाद पहचान की सत्यता की रिपोर्ट मोबाइल कपंनियों को उपलब्ध करायेगा. यदि पहचान सही पायी गयी, तभी सिम जारी किया जायेगा.
दरअसल बलींद्र सिंह ने 2013 में याचिका दायर कर कोर्ट को बताया था कि मोबाइल कंपनियां बिना पहचान किये फर्जी पते पर सिम जारी कर दे रही हैं, जिससे आपराधिक वारदातें बढ़ रही हैं और पुलिस अपराधी तक नहीं पहुंच पा रही हैं. बलींद्र सिंह का बेटा विजय कुमार की शादी तय होनेवाली थी. वह 15 मार्च, 2011 को बेंगलुरु से ट्रेने से हावड़ा होते हुए औरंगाबाद के लिए रवाना हुआ था. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि एक दिन बाद विजय कुमार ने अपने पिता को बताया कि मैं हावड़ा पहुंच गया हूं और पुरुषोत्तम एक्सप्रेस से औरंगाबाद पहुंच जाऊंगा. लेकिन, तीन दिन बीत गये, विजय कुमार नहीं आया.
इस दौरान एक मोबाइल नंबर से बलींद्र सिह को कॉल आया, जिसमें कॉल करनेवाले ने अपना नाम अर्जुन कुमार बताते हुए कहा कि उसका बेटा मेरे कब्जे में है. याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि आज तक विजय कुमार घर नहीं लौटा. जब पुलिस ने उस नंबर की तहकीकात की, तो अर्जुन कुमार नाम का व्यक्ति नहीं मिला और उस नंबर की कोई पहचान नहीं मिल पायी.
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