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खून बेच कर ड्रग्स लेते थे चार दोस्त, जब एक मरा तो तीनों दोस्तों ने पुलिस को दी पूरे नेटवर्क की जानकारी

पटना के कई युवा ड्रग्स के शिकार हो रहे हैं. कोई ब्राउन शुगर, कोई चरस तो कोई स्मैक का डोज ले रहा है. हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें ड्रग्स के कारण अपने एक दोस्त को खोने के बाद तीन अन्य दोस्त नेटवर्क का भंडाफोड़ करने पत्रकार नगर थाना पहुंच गये.

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
खून बेच कर ड्रग्स लेते थे चार दोस्त
खून बेच कर ड्रग्स लेते थे चार दोस्त
फाइल फोटो

पटना के कई युवा ड्रग्स के शिकार हो रहे हैं. कोई ब्राउन शुगर, कोई चरस तो कोई स्मैक का डोज ले रहा है. हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें ड्रग्स के कारण अपने एक दोस्त को खोने के बाद तीन अन्य दोस्त नेटवर्क का भंडाफोड़ करने पत्रकार नगर थाना पहुंच गये. थानाध्यक्ष मनोरंजन भारती ने बताया कि चार दोस्तों को ड्रग्स की इतनी लत लग गयी थी कि वे खून बेचकर ड्रग्स लेते थे. जब इसी ड्रग्स ने एक दोस्त की जान ले ली, तो तीनों थाना पहुंच कर ड्रग्स के नेटवर्क को तोड़ने की बात कहने लगे. प्रभात खबर ने नशे के खिलाफ व पटना में ड्रग्स के नेटवर्क पर कई खबरें प्रकाशित की हैं.

पेश है यह नयी रिपोर्ट

स्कूल टाइम से ही लग गयी थी ड्रग्स की लत : दरअसल, दो साल पहले एक निजी स्कूल में पढ़ने वाले चार दोस्त आर्यन, अविनाश, गुंजन व दिव्यांशु (सभी काल्पनिक नाम) नशे के दलदल में फंस गये. नशे की लत ऐसी लगी कि जिससे उनके परिवार वाले भी परेशान हो गये. मध्यम वर्ग से आने वाले चारों दोस्तों को जब ड्रग्स खरीदने के लिए पैसे की कमी होने लगी, तो वे मोबाइल झपटमारी करने लगे.

छीने गये फोन को बेच कर चारों दोस्त ड्रग्स खरीदते थे. यह सिलसिला करीब छह महीने तक चला. इस बात की जानकारी न परिवार को थी, न स्कूल के शिक्षकों को. हालांकि, परिवार को यह पता था कि बेटा नशे के दलदल में फंस चुका है.

मोबाइल झपटमारी में गये जेल, तो खून बेचना किया शुरू : थानाध्यक्ष ने बताया कि मोबाइल झपटमारी में चारों दोस्त एक दिन पुलिस के हत्थे चढ़ गये. जब जेल से छूटे, तो मोबाइल झपटमारी छोड़ दी. इसी दौरान वे कंकड़बाग के एक बड़े अस्पताल के स्टाफ के संपर्क में आये. अस्पतालकर्मी ने खून बेच कर पैसा कमाने का उपाय बता दिया. इसके बाद उन्होंने कंकड़बाग के चार अस्पतालों में खून बेचना शुरू कर दिया.

एक हजार रुपये दीजिए, जितना खून लेना है ले लीजिए : खून बेचने पर उन्हें एक हजार रुपये मिलते थे. चारों अस्पताल में जाकर कहते थे कि एक हजार रुपये दे दीजिए और जितना खून लेना है ले लीजिए. एक ही अस्पताल में चारों दोस्त अलग-अलग जाकर खून बेचते थे.

ड्रग्स ने दोस्त छीन लिया सर

थानाध्यक्ष ने बताया कि चार जिगरी दोस्तों में जब ड्रग्स की वजह से एक की मौत हो गयी, तो तीनों दोस्त पूरी तरह डर गये. इस हादसे के बाद अन्य तीन दोस्तों के परिवार वाले भी सहम गये थे. कई दिनों तक तीनों के परिजनों ने उन्हें घर में ही बंद कर दिया. माता-पिता के प्रयास के बाद तीनों दोस्तों ने नशे से अपने को दूर कर लिया.

अब वे इस नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए थाना पहुंच गये और पुलिस से ड्रग्स के धंधेबाज को खत्म करने की गुहार लगाने लगे. थानाध्यक्ष ने बताया कि तीनों दोस्त रो रहे थे. उन्होंने बताया कि कैसे ड्रग्स ने तीनों की जिंदगी को बर्बाद कर दिया.

Posted by: Radheshyam Kushwaha

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Published Date

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