सीएम बनने से अच्छा चुनाव मैदान में जाएं नीतीश : मोदी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Feb 2015 4:10 AM

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मांझी के इस्तीफे के बाद सुशील मोदी ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस मीसा डिप्टी सीएम बनती हैं या नहीं, राजद-कांग्रेस के कौन-कौन नेता मंत्री बनते हैं, भाजपा रख रही है नजर मांझी, तो हार कर भी जीत गये, जबकि नीतीश जीत कर भी हार गय जदयू अंदर से पूरी तरह विभाजित है, राजद-कांग्रेस भी अंदर-ही-अंदर बिखरी […]

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मांझी के इस्तीफे के बाद सुशील मोदी ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस
मीसा डिप्टी सीएम बनती हैं या नहीं, राजद-कांग्रेस के कौन-कौन नेता मंत्री बनते हैं, भाजपा रख रही है नजर
मांझी, तो हार कर भी जीत गये, जबकि नीतीश जीत कर भी हार गय
जदयू अंदर से पूरी तरह विभाजित है, राजद-कांग्रेस भी अंदर-ही-अंदर बिखरी है
नीतीश कुमार को तो पांच-पांच बार जनता से कान पकड़ कर माफी मांगनी होगी
पटना : नीतीश कुमार छह माह के लिए मुख्यमंत्री बनने के बजाय चुनाव मैदान में जाये. नीतीश कुमार से उक्त मांग शुक्रवार को पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने की. मांझी सरकार के इस्तीफे के बाद प्रदेश कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि जीतन राम मांझी को सीएम बनाते वक्त नीतीश कुमार ने घोषणा की थी कि वे पुन: जनादेश मिलने के बाद ही सीएम बनेंगे. उन्होंने नीतीश कुमार के साथ-साथ जदयू को भी चुनाव मैदान में जाने के लिए पुनर्विचार करने की अपील की है.
उन्होंने कहा कि मांझी को सीएम बनाने से दलित-महा दलित मतदाता बड़ी संख्या में नीतीश कुमार से जुड़े थे, किंतु आज वे उनके खिलाफ गुस्से में हैं. उन्होंने साफ-साफ कहा कि भाजपा कमजोर वर्ग, पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित और महा दलित वर्ग के समर्थन और उनके हितों के लिए सदैव लड़ती रही है, आगे भी भाजपा उनके समर्थन में खड़ी रहेगी. उन्होंने कहा कि पहले तो जीतन राम मांझी को नीतीश कुमार ने रिमोट कंट्रोल से चलाने की कोशिश की, फिर विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी को चलाया.
उन्होंने नीतीश कुमार द्वारा बिहार की मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेवार ठहराये जाने को सरासर गलत करार दिया. उन्होंने नीतीश कुमार से पूछा है कि क्या उन्होंने नरेंद्र मोदी से पूछ कर मांझी जी को सीएम बनाया था? क्या बिहार भाजपा से भी उन्होंने इसके लिए पूछा था? बिहार की ताजा राजनीति की पटकथा खुद नीतीश कुमार ने लिखी थी. अपने स्क्रिप्ट से उन्होंने जीतन राम मांझी को आउट कर दिया था. उन्होंने कहा कि भाजपा महादलित के साथ खड़ी थी. भाजपा नीतीश कुमार को महा दलित की राजनीति करनेवाले नीतीश कुमार को भाजपा बेनकाब करना चाहती थी, भाजपा इसमें सफल हुई.
जीतन राम मांझी, तो हार कर भी जीत गये, जबकि नीतीश जीत कर भी हार गये.
उन्होंने कहा कि राज्यपाल महोदय को जल्द-से-जल्द बहुमत सिद्ध्र करने का अवसर प्रदान करना चाहिए. जदयू अंदर से पूरी तरह विभाजित है. राजद-कांग्रेस भी अंदर-ही-अंदर बिखरी हुई है. बिहार में 20-22 माह में तीन-तीन सीएम देखे हैं. सूबे की जनता जल्दी-जल्दी मुख्यमंत्री देखने से ऊब चुकी है. उन्होंने कहा कि इन दिनों नीतीश कुमार केजरीवाल की नकल कर रहे हैं. वे जनता से अपनी गलतियों के लिए माफी मांग रहे हैं.
उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने तो एक बार अपनी गलती के लिए माफी मांगी और दिल्ली की जनता ने माफ भी कर दिया. नीतीश कुमार को तो पांच-पांच बार जनता से कान पकड़ कर माफी मांगनी होगी. उन्होंने कहा कि भाजपा बिहार में सरकार बनाने का दावा नहीं कर रही. भाजपा सूबे की राजनीतिक स्थिति पर नजरें गड़ाये हैं. नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में मीसा भारती उपमुख्यमंत्री बनती है या नहीं, राजद-कांग्रेस के कौन-कौन नेता मंत्रिमंडल में शामिल होंगे, इस पर भाजपा नजर रख रही है. संवाददाता सम्मेलन में नंद किशोर यादव और मंगल पांडेय भी मौजूद थे.
नीतीश का नाम आते ही घबरा जाते हैं भाजपा नेता : संजय
पटना : जदयू के प्रदेश प्रवक्ता और विधान पार्षद संजय सिंह ने कहा कि भाजपा नीतीश कुमार के नाम से घबरा जाती है. नीतीश कुमार का नाम आने से दिल्ली से बिहार तक के भाजपा नेताओं में बेचैनी हो जाती है. अब तो भाजपा नेताओं की रात की नींद और दिन का आराम गायब हो जायेगा. जीतन राम मांझी रणछोड़ पहलवान निकले.भाजपा ने जो शतरंज का खेल खेला है, उसमें मांझी और भाजपा दोनों को मुंह की खानी पड़ी है. सुशील मोदी जदयू पर निराधार आरोप लगा रहे हैं कि विधायकों को डराया-धमकाया जाता रहा था. यह खेल तो मांझी से मिल कर सुशील मोदी अपने सरकारी आवास पर खेल रहे थे.
सुशील मोदी और जीतन राम मांझी ने हॉर्स ट्रेडिंग की पराकाष्ठा पार कर दी थी. वे पैसों के साथ-साथ मंत्री बनाने और पॉलिटिकल सेटलमेंट की भी लालच दे रहे थे, लेकिन जदयू विधायकों के चट्टानी एकता के सामने यह तमाम नतमस्तक हो गये. संजय सिंह ने कहा कि सुशील मोदी के बहकावे में आये जीतन राम मांझी ने मुंह छिपाये हुए हैं. सुशील मोदी और भाजपा जीतन राम मांझी की मार्केटिंग कर रही है, तो मांझी के उन सभी बयानों का समर्थन करना चाहिए, जो जीतन राम मांझी ने दिये हैं. भाजपा को मांझी के मुताबिक यह भी कह देना चाहिए कि सवर्ण विदेशी हैं, उनको यहां रहने का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि सुशील मोदी कह रहे हैं कि नये जनादेश में जाना चाहिए तो जदयू इसके लिए अकसर तैयार है, लेकिन सुशील मोदी छह-सात महीने के लिए बेचैनी क्यों हो रही है. सुशील मोदी ने जनता का सर्वे नहीं देखा है. बिहार की जनता आज भी नीतीश कुमार को खूब पसंद करती है. इसका सबूत सर्वे ने दे दिया है.
जीतन राम मांझी ने किया विधवा विलाप: नंद किशोर
पटना : पूर्व विधान परिषद सदस्य नंद किशोर राम ने जीतन राम मांझी की प्रेस वार्ता को विधवा विलाप बताया है. श्री राम ने कहा है कि मांझी ने भाजपा के तोता के रूप में बहुत ही मार्मिक विधवा विलाप किया है. इनके संकेत से लगता है कि नयी पार्टी का गठन करेंगे और भाजपा से तालमेल कर आनेवाले बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ कर सामाजिक न्याय के साथ विश्वासघात करेंगे.
उन्होंने राज्यपाल से मांग करते हुए कहा है कि श्री मांझी के लगाये गये आरोपों की जांच होनी चाहिए. इसके साथ ही उनकी घोषणाएं, जिन्होंने गुमराह करने का काम किया है. उसका कोई मायने नहीं है.
‘अभिमन्यु’ को घेर कर मारने की ‘कौरवों’ ने की कोशिश : नंद किशोर
पटना : विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता नंदकिशोर यादव ने कहा कि कौरवों ने महादलित समाज के ‘अभिमन्यु’ जीतन राम मांझी को मारने की कोशिश की. भले ही वे अपनी पहली कोशिश में सफल हो गये हों, किंतु इतिहास उन्हें माफ नहीं करेगा. विधानसभा स्थित अपने कक्ष में पत्रकारों से नंदकिशोर यादव ने कहा कि भाजपा ‘पांडवों’ की भूमिका में थी. हमारे साथ श्रीकृष्ण के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं और रहेंगे. श्रीकृष्ण ने हमेशा न्याय का साथ दिया है.
अहंकार में भरे नीतीश : शिवानंद
पटना : सम्राट चौधरी के आवास पर गुरुवार को शिवानंद तिवारी ने कहा कि नीतीश कुमार अहंकार में भरे हुए हैं. नीतीश कुमार का एक लक्ष्य हो गया था कि वे मुख्यमंत्री से अब प्रधानमंत्री भी बन सकते हैं. उन्हें भ्रम हो गया था, लेकिन जीतन राम मांझी का एक ही ऑब्जेक्टिव था कि जो समय उन्हें मिला है वह गरीबों के लिए काम में लगा दें. वह अपने अनुभव के आधार पर बयान भी देते हैं.
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