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गया एयरपोर्ट को कारगो हब के रूप में विकसित करे केंद्र

Updated at : 31 Dec 2014 6:05 AM (IST)
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गया एयरपोर्ट को कारगो हब के रूप में विकसित करे केंद्र

राज्य सरकार ने केंद्र से की मांग पटना : राज्य सरकार ने केंद्र से गया हवाई अड्डा को कारगो हब के रूप में विकसित करने की मांग की है. यदि गया हवाई अड्डा कारगो हब के रूप में विकसित होगा,तो इसका लाभ बिहार के साथ उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड, मध्यप्रदेश व पश्चिम बंगाल समेत अन्य […]

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राज्य सरकार ने केंद्र से की मांग
पटना : राज्य सरकार ने केंद्र से गया हवाई अड्डा को कारगो हब के रूप में विकसित करने की मांग की है. यदि गया हवाई अड्डा कारगो हब के रूप में विकसित होगा,तो इसका लाभ बिहार के साथ उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड, मध्यप्रदेश व पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों को मिलेगा. गया के फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ने की संभावना है.
राज्यों में हवाई अड्डा को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए राज्यों से मांगे गये सुझाव में बिहार सरकार ने केंद्र से कहा है कि गया को सालों भर विदेशी उड़ान की अनुमति दी जाये. फिलहाल यहां सितंबर से मार्च तक ही उड़ान भरने की अनुमति दी गयी है.
कैबिनेट विभाग से मिली जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने सुझाव में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विदेशी कारगो या हवाई जहाज को लगने वाला पार्किग शुल्क नहीं ले. इससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए विदेशी विमानों को राहत मिलेगी. फिलहाल विदेशी विमानों को पार्किग शुल्क के नाम पर राशि का भुगतान करना पता है. राज्यों में हवाई अड्डों की स्थिति को लेकर दिल्ली में मंगलवार को राज्यों के मुख्यमंत्री की बैठक हुई.
राज्य सरकार की ओर से बैठक में मंत्री विजय कुमार चौधरी ने भाग लिया. केंद्र को दिये सुझाव के बारे में बताया गया कि बिहार में एयर ट्रैफिक में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. उड़ान की संख्या पांच हजार से बढ़ कर नौ हजार हो गयी है. यात्रा ियों की संख्या 35 हजार से बढ़ कर एक लाख पहुंच गयी है. गया को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और कारगो हब के रूप में विकसित करने का सुझाव देते हुए केंद्र से कहा गया है कि पटना हवाई अड्डा का विस्तार अब संभव नहीं है. ऐसे में केंद्र सरकार को बिहटा, पुनपुन और नालंदा में हवाई अड्डा बनाने पर विमर्श करना चाहिए.
पुनपुन के बारे में कहा गया कि यह पटना महानगर के मास्टर प्लान में शामिल है, लेकिन निचली जमीन होने के कारण इसे हवाई अड्डा के लिए उपयुक्त नहीं कहा जा रहा है. बिहटा के लिए सिर्फ एक हजार एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी. बताया गया है कि नालंदा में हवाई अड्डा के लिए केंद्र सरकार द्वारा 4800 एकड़ जमीन की मांग की गयी है जबकि राज्य सरकार का कहना है कि दो हजार एकड़ में हवाई अड्डा बन सकता है. राज्य सरकार ने केंद्र से पटना हवाई अड्डा को भी घरेलू उड़ान के लिए बनाये रखने का सुझाव दिया है.
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