राज्य में आयुष डिस्पेंसरियां 173, पर पर्याप्त चिकित्सक नहीं

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 06 Jul 2024 1:24 AM

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राज्य में आयुष माध्यम से इलाज करानेवाले मरीजों लाचार हैं. उनको इस विधा से इलाज का लाभ नहीं मिल रहा है.

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वर्ष 2013-14 के बाद आयुष की दवाओं का खरीद भी नहीं की गयी है,सिर्फ होमियोपैथी की कुछ दवाएं खरीदी गयी हैं

आयुष दवाओं के अभाव में आयुष चिकित्सक बुखार में पारासिटामोल जैसी दवाएं दे रहे हैं

संवाददाता,पटना

राज्य में आयुष माध्यम से इलाज करानेवाले मरीजों लाचार हैं. उनको इस विधा से इलाज का लाभ नहीं मिल रहा है. राज्य में 173 सरकारी औषधालय स्थापित किये गये हैं. स्थिति यह है कि यहां पर न तो पर्याप्त चिकित्सक हैं और न ही दवाएं उपलब्ध हैं. वर्ष 2013-14 के बाद आयुष की दवाओं का खरीद भी नहीं की गयी है. सिर्फ होमियोपैथी की कुछ दवाएं खरीदी गयी हैं. चिकित्सकों के नहीं रहने से मरीज एलोपैथ पद्धति से ही इलाज करा रहे हैं. इधर, बिहार तकनीकी सेवा आयोग द्वारा अनुशंसित 2901 आयुष चिकित्सकों की अनुशंसा मिल गयी है, पर महीनों से ये लोग पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं.

स्वास्थ्य विभाग की ओर से अगस्त 2020 में 3270 आयुष चिकित्सकों की नियुक्ति का विज्ञापन जारी किया गया था. अब इनकी होने वाली नियुक्ति में आयुर्वेद के डॉक्टरों के हिस्से में 1635 सीटें, होमियोपैथ के डॉक्टरों के हिस्से 981 सीटें और यूनानी डॉक्टरों के हिस्से 654 सीटें प्राप्त होंगी. इनमें से 2901 सफल आयुष चिकित्सकों का मेधा सूची बिहार तकनीकी सेवा आयोग द्वारा जारी कर दी गयी है. राज्य सरकार को इन चिकित्सकों का पदस्थापन का इंतजार है. कुल चिकित्सकों में 50 प्रतिशत आयुर्वेदिक, 30 प्रतिशत होमियोपैथिक और 20 प्रतिशत पदों पर यूनानी चिकित्सकों की नियुक्ति होनी है. राज्य में आयुर्वेद के सिर्फ 92 चिकित्सक हैं, जो विभिन्न आयुर्वेदिक कॉलेज अस्पतालों से लेकर औषधालयों तक अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

राज्य में आयुष औषधालयों की स्थिति

राज्य के 38 जिला अस्पतालों में आयुष चिकित्सक तैनात हैं. इसके अलावा 25 अनुमंडलीय अस्पतालों में दो-दो आयुष चिकित्सकों के पद हैं. राज्य के करीब 1300 एपीएचसी में आयुष चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं. राज्य के 38 जिलों में संयुक्त औषधालय हैं, जहां पर एक आयुर्वेद, एक होमियोपैथ व एक यूनानी चिकित्सक का पद है. राज्य में स्वतंत्र रूप से 69 आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी, 29 होमियोपैथ डिस्पेंसरी और 30 यूनानी डिस्पेंसरी है.

आयुष दवाओं से खाली हैं डिस्पेंसरियां, आयुर्वेद व तिब्बी के डॉक्टर दे रहे एलोपैथी दवाएं

राज्य की आयुष डिस्पेंसरी दवाओं से खाली पड़ी हुई हैं. दवाओं के अभाव में आयुर्वेदिक, होमियोपैथी और यूनानी के चिकित्सक एलोपैथ की दवाओं का परामर्श दे रहे हैं. ऐसे चिकित्सकों ने अर्क, चूर्ण, बटी, गुगुल, भष्म और लौह से इलाज करने की शिक्षा आयुर्वेदिक कॉलेजों में प्राप्त की है. तिब्बी वाले चिकित्सक भी अर्कियत, अकरास, खुस्तजात, इतरीफलात, जवारिसात, खामिराजात, लौकात एवं लुबुब, मरहम, मजूनात, शर्बत जैसी दवाओं से बीमारियों के इलाज की शिक्षा प्राप्त की है. इसी प्रकार से होमियोपैथ में आर्सेनिक, डलकामारा, रस्टक, बोरेक्स, बेलाडोना जैसी दवाओं से रोगों के इलाज की व्यवस्था है. आयुष के चिकित्सकों को सरकारी अस्पतालों में प्रभारी से लेकर इमरजेंसी तक की ड्यूटी करनी पड़ रही है. ऐसे में आयुष दवाओं के अभाव में आयुष चिकित्सक बुखार में पारासिटामोल जैसी दवाएं दे रहे हैं.

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