महाशिवरात्रि : बिहार के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में पूजा करने से होंगी सभी मुरादें पूरी

By Prabhat Khabar Digital Desk
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पटना : भगवान शिव की भक्ति का सबसे बड़ा दिन महाशिवरात्रि इस साल 21 फरवरी को मनायी जायेगी. इस मौके पर पूरे देश में शिवमंदिरों पर दर्शन करने के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं. बिहार में भी भगवान शिव के ऐसे कई ऐतिहासिक मंदिर हैं जहां उनके दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता हैं, इस शिवरात्रि आप बिहार के इन शिवालयों में जा कर भगवान शिव की कृपा पा सकते हैं. आइए जानें इन शिवमंदिरों के बारे में.....

हरगौरी मंदिर, ठाकुरगंज - 117 साल पुराने किशनगंज जिले के हरगौरी मंदिर में भक्तों की आस्था इतनी ज्यादा है कि यहां सालों भर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है और बाबा भक्तों की हर कामना को पूरी करते है. वहीं, शिवरात्रि और सावन में भक्तों का उत्साह चरम पर रहता है. इस मंदिर की विशेषता यहां मां पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा एक ही साथ है. यह शिवलिंग दुर्लभ माना गया है.
कुशेश्वरनाथ, बांका - बांका जिले के बाराहाट प्रखंड के अंतर्गत लबोखर गांव के करीब प्रसिद्ध पौराणिक कुशेश्वर नाथ महादेव का मंदिर स्थित है. ऐसी मान्यता है कि इस शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही मनुष्य का दुख दूर हो जाता है. इसका इतिहास भी सैकड़ों वर्ष पुराना है. यहां कई पीढ़ी से ग्वाला समुदाय के लोग कुशेश्वर नाथ के पुजारी होते है.
बैकटपुर धाम, पटना - राजधानी पटना से नजदीक बैकटपुर गांव में भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर बैकटपुर धाम है. इस मंदिर को गौरीशंकर बैकुण्ठधाम के नाम से भी जाना जाता है. यहां शिवलिंग के साथ माता पार्वती भी विराजमान हैं. इस मंदिर में सबसे खास बात यह है कि यहां स्थापित शिवलिंग पर 108 छोटे-छोटे शिवलिंग भी स्थापित हैं. ऐसा माना जाता है कि बैकटपुर जैसा शिवलिंग पूरी दुनिया में और कहीं नहीं है.
सोहगरा धाम, सीवान - भगवान शिव शंकर की कृपा के लिए बिहार में एक और धाम है जिसका नाम सोहगरा धाम है. बिहार के सीवान में स्थित इस धाम में एक विशाल शिवलिंग स्थित है, जिसके बारे में ऐसी मान्यता है कि इनकी पूजा और जलाभिषेक करने से मनचाही मुरादें पूरी होती हैं. सोहगरा धाम में भक्त सुयोग्य वर और संतान की प्राप्ति के लिए भी पूजा अर्चना करने आते हैं.
बाबा गरीबनाथ मंदिर, मुजफ्फरपुर - बाबा गरीबनाथ मंदिर बिहार में सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक है. इस मंदिर परिसर में एक विशाल बरगद का पेड़ है जो भक्तों के आकर्षण का केन्द्र है, मान्यता के अनुसार यहां पूजा करने से भक्तों के सारे दुख दूर होते हैं. इस मंदिर को दूसरा बैद्यनाथ भी कहा जाता है.
प्रपिता महेश्वर मंदिर, गया - मृत रिश्तदारों को प्रसाद देने के लिए प्रसिद्ध प्रपिता महादेव बिहार के गया में स्थित है. यह गया के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है. इस मंदिर में स्थापित भगवान शिव का त्रिशूल टूटा हुआ है, जो यहां की विशेषता है.
दशशीशा नाथ, नौहट्टा - तीन नदियों के संगम पर स्थित दशशीशा नाथ मंदिर की सुंदरता देखने लायक है. मान्यता है कि दशशीशा नाथ में रावण ने त्रेता युग में रावण ने भगवान शिव की पूजा की थी. महाशिवरात्री के अवसर पर यहां सोन नदी के किनारे भव्य मेला लगता है.
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