पुलिस मुख्यालय के सामने आत्मदाह का प्रयास करने वाले व्यक्ति को हिरासत में लिया गया

By Prabhat Khabar Digital Desk
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पटना : राजधानी पटना स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय के सामने मुस्लिम तुष्टिकरण के तहत झूठे मामले में फंसाने का आरोप सरकार पर लगाते हुए आत्मदाह का प्रयास करनेवाले एक व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. बिहार के वैशाली जिला निवासी राजीव ब्रह्मर्षि ने सोशल मीडिया के जरिये गुरुवार को आत्मदाह करने की चेतावनी दी थी. आत्मदाह की आशंका को देखते हुए पुलिस पहले से ही सचेत थी. पटना के पटेल भवन, बिहार पुलिस मुख्यालय, के सामने आत्मदाह का प्रयास करने वाले ब्रह्मर्षि को पुलिस ने हिरासत में लेकर एम्बुलेंस से अस्पताल भेज दिया. घटनास्थल पर मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि इस संबंध में पहले से जानकारी होने से एहतियात के तौर पर पुलिसकर्मी और मजिस्ट्रेट तैनात किये गये थे. व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जायेगी.

ब्रह्मर्षि ने आरोप लगाया है कि फुलवारीशरीफ मामले में नागेश सम्राट पर प्रशासन की तरफ से जो कार्रवाई की गयी है, वो पूरी तरह गलत है. स्वयं को हिंदू पुत्र संगठन का संरक्षक बतानेवाले ब्रह्मर्षि ने अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा था कि वह पटना के पटेल भवन के सामने आत्मदाह करेगा. पिछले साल 21 दिसंबर को सीएए-एनपीआर-एनआरसी के विरोध में आरजेडी के राज्यव्यापी बंद के दौरान फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र के हारून नगर इलाके में हुई हिंसा में 17 वर्षीय अमीर हंजला लापता हो गया था और एक हफ्ते बाद उसका शव जलकुंभी से ढंके पानी से भरे एक गड्ढे से बरामद किया गया था. स्थानीय लोगों ने दावा किया था कि कुछ हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं ने तिरंगा लेकर नारे लगा रहे हंजला को निशाना बनाया था. इस मामले में एक स्वयंभू हिंदू संगठन के कई लोग गिरफ्तार किये गये थे.

ब्रह्मर्षि ने दावा किया कि हाल ही में 'श्री राम सेना' के कुछ शीर्ष पदाधिकारियों के साथ, इस मामले में उच्च स्तर पर हस्तक्षेप के लिए वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी संजय गांधी से मिलने जेडीयू के राज्य मुख्यालय गये थे, लेकिन संजय हिंदू कार्यकर्ताओं को देखकर भड़क गये और हमें उपमुख्यमंत्री व बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी से मिलने को कहा. ब्रह्मर्षि ने आरोप लगाया कि संजय के इस रवैये से हम हैरान थे. ऐसा नहीं था कि हम मुस्लिम विरोधी एजेंडे के साथ वहां गये थे. हम चाहते थे कि निष्पक्ष जांच हो. हमने सांसदों और शीर्ष नौकरशाहों से मुलाकात की, लेकिन कोई रास्ता नहीं निकला, क्योंकि सरकार अपनी मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति में व्यस्त है.

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