प्रशांत किशोर ने की घोषणा, दो मार्च से शुरू करेंगे ''बात बिहार की'', 10 लाख युवाओं को जोड़ेंगे

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 18 Feb 2020 12:52 PM

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पटना : जेडीयू द्वारा पार्टी से निकाले जाने के बाद पहली बार राजधानी पटना पहुंचने पर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पिता तुल्य बताया. साथ ही उन्होंने कहा कि मैं किसी भी विचारधारा से प्रभावित नहीं हूं. मैं सिर्फ गांधी की विचारधारा से प्रभावित हूं. गांधी और गोडसे की विचारधारा साथ-साथ […]

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पटना : जेडीयू द्वारा पार्टी से निकाले जाने के बाद पहली बार राजधानी पटना पहुंचने पर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पिता तुल्य बताया. साथ ही उन्होंने कहा कि मैं किसी भी विचारधारा से प्रभावित नहीं हूं. मैं सिर्फ गांधी की विचारधारा से प्रभावित हूं. गांधी और गोडसे की विचारधारा साथ-साथ नहीं चल सकती. प्रशांत किशोर ने घोषणा की कि दो मार्च से ‘बात बिहार की’ कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे. उन्होंने दावा किया कि उनके पास करीब सवा लाख सक्रिय सदस्य हैं. आनेवाले दिनों में वह करीब 10 लाख लोगों को अपनी मुहिम में जोड़ेंगे.

संवाददाता सम्मेलन में प्रशांत किशोर ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुझसे पहली बार नवंबर 2014 में मिले थे. नीतीश जी से सिर्फ मेरा राजनीति संबंध नहीं रहा है. वह पिता तुल्य हैं. मैं उनके बेटे जैसा रहा हूं. उन्होंने मुझे अब तक यानी पार्टी छोड़ने के बाद भी अपने बेटे जैसा रखा. मैं भी कई मायने में उन्हें पिता तुल्य ही माना है. उनके फैसले को सहृदय स्वीकार करता हूं. मुझे पार्टी से निकाल दिया, इसे भी मैं स्वीकार करता हूं. मेरे मन में नीतीश जी के लिए हमेशा सम्मान रहेगा.

प्रशांत किशोर ने कहा कि मेरा नीतीश जी से कुछ मुद्दों पर मतभेद रहे हैं. वे कहते हैं कि वे गांधी, लोहिया और जेपी (जयप्रकाश नारायण) के विचारों को मानते हैं. फिर ‘गोडसे’ के लोगों के साथ वे कैसे हैं? उन्होंने कहा कि कोई दूसरा नीतीश जी के बारे में फैसला करे, यह संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि राजनीति में कंप्रोमाइज करना पड़ता है. वे कहते हैं कि बिहार का विकास हो रहा हो, तो झुकने में हर्ज नहीं है. साथ ही उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इससे जेडीयू को क्या फायदा मिला? क्या बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिला? क्या पटना यूनिवर्सिटी को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला?

प्रशांत किशोर ने माना कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासन काल में विकास हुआ है. लेकिन, विकास की गति और आयाम ऐसे नहीं हैं कि बिहार की तुलना महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक जैसे राज्यों से की जा सके. उन्होंने कहा कि विकास के मानकों पर बिहार दूसरे राज्य से पीछे है.

उन्होंने घोषणा की कि दो मार्च को ‘बात बिहार की’ कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे. इस कार्यक्रम के तहत बिहार के युवाओं को जोड़ा जायेगा. बिहार के विकास की बात की जायेगी. साथ ही उन्होंने कहा कि कार्यक्रम से नीतीश जी जुड़ना चाहे तो स्वागत है. उन्होंने बताया कि ‘मेरे पास करीब सवा लाख सक्रिय सदस्य हैं. आनेवाले दिनों में करीब 10 लाख लोगों को जोड़ेंगे.

प्रशांत किशोर ने कहा कि राजनीतिक पार्टी या गठबंधन बनाने का विचार नहीं है. बिहार में भाकपा नेता व जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की मुहिम पर प्रशांत किशोर ने कहा कि ‘कन्हैया मुझसे मिले हैं. बिहार के लड़के हैं, वह अपना काम कर रहे हैं. मैं अपना काम कर रहा हूं.

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