मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल का हुआ आयोजन, वक्ताओं ने कहा- सामाजिक सद्भाव की भाषा है मैथिली

Updated at : 14 Dec 2019 6:32 PM (IST)
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मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल का हुआ आयोजन, वक्ताओं ने कहा- सामाजिक सद्भाव की भाषा है मैथिली

नयी दिल्ली : मिथिला, मैथिली भाषा, कला और संस्कृति को लेकर मैथिल पत्रकार ग्रुप की ओर से मिथिला महोत्सव और लिटरेचर फेस्टिवल पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें शामिल सभी वक्ताओं ने मैथिली भाषा की मधुरता का जिक्र करते हुए इसे जोड़ने वाली भाषा बताया. मैथिली भाषा बोलने वाले बिहार, झारखंड और नेपाल […]

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नयी दिल्ली : मिथिला, मैथिली भाषा, कला और संस्कृति को लेकर मैथिल पत्रकार ग्रुप की ओर से मिथिला महोत्सव और लिटरेचर फेस्टिवल पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें शामिल सभी वक्ताओं ने मैथिली भाषा की मधुरता का जिक्र करते हुए इसे जोड़ने वाली भाषा बताया. मैथिली भाषा बोलने वाले बिहार, झारखंड और नेपाल में 1.3 करोड़ लोग हैं और इसकी लिपि त्रिहुता है.

इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सांसद प्रभात झा ने कहा कि बिहार का विकास तभी होगा, जब वहां रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. इस दिशा में मैथिली भाषा का विशेष महत्व है. केंद्र और राज्य सरकार मैथिली के संरक्षण और संवर्द्धन की दिशा में काम कर रही है. लेकिन, इस ओर और अधिक ध्यान देने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि दरभंगा एयरपोर्ट का काम जल्द शुरू होगा. इससे वहां पर आवागमन और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.

वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता प्रणव झा ने कहा कि मैथिली जन की भाषा है. मिठास की भाषा है. इसे बोलने वाले सिर्फ मिथिलांचल में ही नहीं, बल्कि देश और विदेशों में भी बड़ी संख्या में रहते हैं. इस मौके पर मैथिली भोजपुरी के उपाध्यक्ष नीरज पाठक, बुराड़ी से विधायक संजीव झा सहित मिथिलांचल के कई विधायक और सांसद मौजूद थे. मैथिली भाषा के जानकार बीरबल झा ने कहा कि यह सबसे मीठी भाषा है. मां सीता की भाषा मैथिली का महत्व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी द्वारा संविधान की 8वीं अनुसूची में डालने से हुआ. यही कारण है कि आज देश ही नहीं विदेशों में रहने वाले मैथिली भाषी लोग इस भाषा के जरिये एक दूसरे से जुड़े हैं.

सांस्कृतिक कार्यक्रम ने लोगों को किया मंत्रमुग्ध

मिथिला महोत्सव का खास आकर्षण अयोध्या घराने के मानस महाराज का भजन-गीत गायन रहा. सीता-राम के संबंध पर अपने गीत से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया. इसके साथ ही डहकन का मंचन भी आकर्षण का केंद्र रहा. डहकन में समधी के आने पर घर की महिलाएं 56 प्रकार का व्यंजन खिलाती हैं तो दूसरी ओर उसी समय लोकगीतों के जरिये से तरह-तरह की गालियां दी जाती है. इस अवसर मैलोरंग के निर्देशक प्रकाश झा के निर्देशन में रंगारंग नृत्य नाटिका झिझिया का भी प्रदर्शन किया गया. इस अवसर पर कई किताबों का भी विमोचन किया गया.

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