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पटना : टाल के खेतों की ड्रोन और रोबोट करेंगे मॉनीटरिंग

Updated at : 30 Nov 2019 7:24 AM (IST)
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पटना : टाल के खेतों की ड्रोन और रोबोट करेंगे मॉनीटरिंग

अनुराग प्रधान पटना : बिहार में रोबोट और ड्रोन की मदद से खेती शुरू हो गयी है. बिहार का पहला किसान सेंटर मोकामा के थाना चौक में शुरू किया गया है. अभी 200 किसान यहां रजिस्टर हो गये हैं. टाल फॉर्मर एसोसिएशन के करीब दो हजार सदस्य भी जल्द किसान स्टेशन से जुड़ जायेंगे. टाल […]

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अनुराग प्रधान
पटना : बिहार में रोबोट और ड्रोन की मदद से खेती शुरू हो गयी है. बिहार का पहला किसान सेंटर मोकामा के थाना चौक में शुरू किया गया है. अभी 200 किसान यहां रजिस्टर हो गये हैं. टाल फॉर्मर एसोसिएशन के करीब दो हजार सदस्य भी जल्द किसान स्टेशन से जुड़ जायेंगे.
टाल क्षेत्र की 10 हजार एकड़ जमीन पर अब ड्रोन की नजर रहेगी. यह ड्रोन रोबोट के माध्यम से किसानों की हर गतिविधियों की जानकारी देगा. फसल खराब होने से पहले ही किसानों को सूचित करेगा. इसके साथ यह मिट्टी में होने वाले हानिकारक तत्वों का भी पता लगाता रहेगा. समय-समय पर रोबोट के माध्यम से किसानों को फसल संबंधित मैसेज भी भेजता रहेगा. इससे फसल को खराब होने से बचाया जा सकता है.
ड्रोन करेगा खेतों में छिड़काव : मधुबनी जिले के 12वीं पास देवेश कुमार झा ने रोबोटिक्स और ड्रोन सिस्टम से खेती करने की पद्धति विकसित की है. देवेश ने कहा कि इससे मजदूरों की कमी दूर हो जायेगी. टाल क्षेत्र के किसानों को काफी फायदा मिलेगा. टाल क्षेत्रों में फसलाें की मॉनीटरिंग होगी. ड्रोन से छिड़काव होने पर कीटनाशक कम लगेगा. जितना जरूरत है, उतना ही छिड़काव होगा.
300 से 400 रुपये छिड़काव का खर्च पड़ेगा. ड्रोन एक दिन में 20 से 30 एकड़ में छिड़काव करता है. ड्रोन से कीटनाशक का छिड़काव इतने सधे हुए तरीके से होती है कि जरा भी नुकसान नहीं होता. वह सीधे पत्ती के रोग वाले स्थान पर ही गिरता है.
चलेगा जागरूकता कार्यक्रम
देवेश ने अपनी कंपनी डेबेस्ट नाम से रजिस्ट्रर्ड करवायी है. इनके साथ कुमार कन्हैया भी जुड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि यह योजना बिहार सरकार के पास प्रस्तुत की गयी थी.
इसे सराहना भी मिली है. किसान सेंटर खोलने की अनुमति भी सरकार ने दे दी है. देवेश ने कहा कि अब किसानों को खेती संबंधी परेशानियां खत्म हो जायेंगी. राज्य के किसानों के साथ हर पंचायत में जागरूकता अभियान चलाया जायेगा. किसान स्टेशन खोला जा रहा है. इसरो, बार्क, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नाबार्ड और अन्य स्टार्टअप्स के साथ एग्रो अवेयरनेस प्रोग्राम भी आयोजित किया जायेगा.
किसानों की फसल सीधे बाजार में पहुंच जायेगी
नयी तकनीक के माध्यम से खेती को ऑनलाइन किया जायेगा. किसानों की फसल सीधे बाजार में पहुंच जायेगी. सेटलाइट व अन्य उन्नत उपकरण द्वारा खेती की जीआइएस मैपिंग, मृदा जांच, ड्रोन द्वारा कीटनाशक छिड़काव व अन्य सभी काम होंगे. ये सभी सुविधाएं किसान को निशुल्क देने पर काम किया जा रहा है. खेती की लागत कम करने के साथ उन्नत सिंचाई तकनीकी भी इसमें शामिल होगी. खासकर छोटे किसानों को आर्थिक मदद और सलाह भी दिया जायेगा. सभी सुविधाएं डेबेस्ट किसान स्टेशन पर उपलब्ध हैं.
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