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नालों पर खड़ा हो गया अतिक्रमण का महल, कब होगी जिम्मेदारों पर कार्रवाई

Updated at : 17 Nov 2019 6:17 AM (IST)
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नालों पर खड़ा हो गया अतिक्रमण का महल, कब होगी जिम्मेदारों पर कार्रवाई

पटना : शहर में हुए भीषण जलजमाव के बाद शहर में नालों की खोज तेजी से चल रही है. पूरा प्रशासनिक अमला सड़क पर उतर गया है. नालों पर बनाये गये मकानों पर बुलडोजर चल रहा है, नाला कहां है? कहां नहीं है? अंचल अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं है. किसी के पास नक्शा […]

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पटना : शहर में हुए भीषण जलजमाव के बाद शहर में नालों की खोज तेजी से चल रही है. पूरा प्रशासनिक अमला सड़क पर उतर गया है. नालों पर बनाये गये मकानों पर बुलडोजर चल रहा है, नाला कहां है? कहां नहीं है? अंचल अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं है. किसी के पास नक्शा नहीं है, तो किसी के पास जानकारी ही नहीं है.

हालत यह है कि खेमनीचक, संपतचक, नंदलाल छपरा जैसे इलाकों में नाले मुहल्लों में ही कहीं गुम हो गये हैं. कहीं-कहीं तो ऐसा लग रहा है कि नाला है या घर की नाली. अौसतन 66 फुट का चौड़ा नाला अब 20 फुट और 5 फुट चौड़ा ही रह गया है. बड़ी बात यह है कि जो भी अवैध निर्माण हुए हैं, वह कोई छह महीने के अंदर नहीं हुए हैं. यह सिलसिला पिछले करीब 10 वर्षों से चला आ रहा है.
पक्के मकान बन गये हैं. एक ने कब्जा किया, तो मुहल्ले के कई लोग कब्जे में जुट गये. नाले के आगे से, बगल से कब्जा किया गया है. लेकिन सवाल यह है कि यह सब होता रहा और पुलिस-शासनिक अधिकारी खामोश रहे. अवैध निर्माण के लिए मकान का नक्शा पास कर दिया गया.
बिजली कनेक्शन दे दिया गया. सारी सरकारी सुविधाएं मिल गयीं, लेकिन किसी ने यह जांच नहीं की कि निर्माण वाली जमीन सरकारी तो नहीं. नाला कहां हैं, इसकी खोज नहीं हुई. नाला कब्जा हो जायेगा, तो शहर का पानी कहां से निकलेगा? जब खामोशी और लापरवाही की इंतहा हो गयी, तब बारिश के पानी से शहर डूब गया. अब युद्ध स्तर पर अतिक्रमण हटाया जा रहा है. लेकिन उन लापरवाह पदाधिकारियों पर कब कार्रवाई होगी, जो इस अवैध निर्माण के जिम्मेदार हैं.
डूबा शहर तो खुली आंख, तोड़ने लगे आशियाना
10 साल के कब्जे को पहले क्यों नहीं हटाया
अवैध निर्माण की बाढ़ में खो गये नाले
अब तक टूट चुके हैं कई मकान
प्रशासन के इस अभियान में अब करीब 50 मकानों पर बुलडोजर चल चुका है. लोगों ने अतिक्रमण जरूर किया था, लेकिन जो निर्माण किया था, उसमें उनकी गाढ़ी कमाई लगी थी. वह अब मिट्टी में मिल गयी. जमीनी हकीकत यह है कि निचले क्रम के पदाधिकारी खामाेशी से सारा तमाशा देखते रहे, नाले की खोज खबर नहीं ली. कागजों में नाले की उड़ाही होती रही और बरसात में शहर डूबता रहा, लेकिन किसी ने खोज खबर नहीं ली. अब जब बड़े पैमाने पर तबाही आयी, तो प्रशासन हरकत में दिख रहा है.
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