बिहार में 61 साल पुराने चकबंदी नियम में बदलाव की तैयारी
Updated at : 08 Nov 2019 8:53 AM (IST)
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अनिकेत त्रिवेदी दिसंबर में नये नियम के मसौदे के लिए कार्यशाला पटना : राज्य में लगभग 61 साल पुराने चकबंदी के नियम में बदलाव की तैयारी की जा रही है. राजस्व व भूमि सुधार विभाग बिहार चकबंदी अधिनियम में संशोधन की योजना बना रहा है. राज्य भर में नये सिरे से जमीन की चकबंदी की […]
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अनिकेत त्रिवेदी
दिसंबर में नये नियम के मसौदे के लिए कार्यशाला
पटना : राज्य में लगभग 61 साल पुराने चकबंदी के नियम में बदलाव की तैयारी की जा रही है. राजस्व व भूमि सुधार विभाग बिहार चकबंदी अधिनियम में संशोधन की योजना बना रहा है. राज्य भर में नये सिरे से जमीन की चकबंदी की जायेगी. इसको लेकर दिसंबर में एक कार्यशाला आयोजित की जायेगी.
नये नियम में चकबंदी का काम करने के लिए नयी तकनीक का प्रयोग करने, नियम को पब्लिक फ्रेंडली बनवाने, खेतों तक मुख्य सड़क ले जाने, सामुदायिक भवन के लिए जगह चिह्नित करने से लेकर अन्य कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नियम के साथ जोड़ा जायेगा. साथ ही गैर प्रासंगिक नियमों को हटाया जायेगा.
15 वर्षों में एक भी प्रखंड का पूरा नहीं हुआ काम : दरअसल, चकबंदी का काम राज्य में नये सिरे वर्ष 2004 से शुरू किया गया था. इसमें शाहाबाद क्षेत्र के कुल आठ प्रखंड- नोखा, कुदरा, रामगढ़, बक्सर, आरा, दावत आदि व गोपालगंज के एक प्रखंड कटपा में चकबंदी शुरू हुई थी.
लेकिन, आज तक किसी भी प्रखंड में चकबंदी पूरी नहीं हो सकी है. चकबंदी कार्यालय में कर्मियों की कमी व विभाग स्तर पर पूर्व में लगातार समीक्षा के अभाव में काम पूरा नहीं हो पाया. अब चकबंदी को नये मापक यंत्र, नयी तकनीक व नियमों में संशोधन कर जल्द-से-जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है.
सर्वे के साथ चकबंदी का भी होगा काम
अब राजस्व व भूमि सुधार विभाग सर्वे के साथ चकबंदी के काम को भी पूरा करने की कोशिश कर रहा है. इसके लिए दोनों स्तरों से तैयारी शुरू की जा रही है. फिलहाल बेगूसराय के सदर अंचल व सुपौल के पिपरा अंचल में सर्वे का काम शुरू किया गया है. इसमें बेगूसराय के सदर अंचल में 73 मौजा व पिपरा के 39 मौजा का काम किया जा रहा है.
दोबारा शुरू हुई चकबंदी
दरअसल, राज्य में चकबंदी एक्ट-1956 में बना था. एक्ट के बाद नियमावली 1958 में आयी. इसके बाद संसाधनों की तैयारी पूरी कर 1970-71 में चकबंदी का काम शुरू हुआ था. वर्ष 1992 तक 5200 राजस्व गांवों की चकबंदी पूरी हुई थी. फिर सरकार की ओर से चकबंदी को रोकने के बाद कैमूर किसान संघ सरकार के निर्णय के खिलाफ हाइकोर्ट चला गया था.
फिर वहां से मामला सुप्रीम कोर्ट गया. दोनों जगहों पर सरकार को हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद वर्ष 2004 में सरकार ने दोबारा चकबंदी शुरू की. तब से लेकर अब तक चकबंदी का काम किया जा रहा है. विभाग को हर छह माह में प्रगति रिपोर्ट कोर्ट को देनी होती है.
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