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आठवीं तक के बच्चों को सता रहा अंग्रेजी का डर

Updated at : 17 Oct 2019 7:27 AM (IST)
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आठवीं तक के बच्चों को सता रहा अंग्रेजी का डर

पटना : प्रदेश में प्राथमिक व मध्य स्कूलों में अच्छी अंग्रेजी पढ़ने वाले बच्चों की संख्या उत्साहजनक नहीं है. स्कूलों में मासिक टेस्ट देने वाले बच्चों में 40 फीसदी बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें उनके क्लास के हिसाब से अंग्रेजी नहीं आती है. मासिक टेस्ट न देने वाले बच्चों में 58.7 फीसदी बच्चों की अंग्रेजी क्लास […]

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पटना : प्रदेश में प्राथमिक व मध्य स्कूलों में अच्छी अंग्रेजी पढ़ने वाले बच्चों की संख्या उत्साहजनक नहीं है. स्कूलों में मासिक टेस्ट देने वाले बच्चों में 40 फीसदी बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें उनके क्लास के हिसाब से अंग्रेजी नहीं आती है. मासिक टेस्ट न देने वाले बच्चों में 58.7 फीसदी बच्चों की अंग्रेजी क्लास के स्टेंडर्ड के हिसाब से दयनीय है. कुल मिलाकर बिहार में कक्षा एक से आठ तक के बच्चे अंग्रेजी फोबिया से ग्रसित हैं.

दूसरी तरफ अंग्रेजी की तुलना में गणित की समझ बिहार के बच्चों में ज्यादा है. यह अध्ययन बिहार के नौ जिलों- भागलपुर, दरभंगा, गया, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, पटना,पूर्णिया, सहरसा व सारण के स्कूलों पर आधारित है.
एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज के प्रो डॉ बिप्लब ढाक ने यह असेसमेंट रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट अगस्त 2019 में बिहार शिक्षा परियोजना परिषद को सौंपी गयी है. रिपोर्ट में बताया गया है कि बिहार में प्रत्येक स्कूल में मासिक,तिमाही, छमाही व अन्य मूल्यांकन नियमित होते हैं. स्कूल इसकी बाकायदा स्टेटस रिपोर्ट भी रखते हैं.
मासिक टेस्ट देने वाले 76% बच्चे अंग्रेजी की तुलना में गणित में अच्छे
अंग्रेजी का टेस्ट न देने वाले बच्चों की सर्वाधिक संख्या कक्षा एक से तीन तक में है. प्राथमिक कक्षाओं में अंग्रेजी की पढ़ाई कमजोर रहने की वजह से अगली कक्षाओं में उनकी अंग्रेजी कमजोर रह जाती है. कक्षा एक,दो और तीन में क्रमश: 64.4,64.3 और 62 फीसदी बच्चे टेस्ट नहीं देते हैं. यही वजह है कि कक्षा 6,7,8 में मासिक टेस्ट में इनकी भागीदारी प्रभावित होती है.
कक्षा 6 में मासिक टेस्ट न देने वाले बच्चों की संख्या 60 फीसदी, कक्षा 7 में 52 और कक्षा 8 में 48 फीसदी रहती है. जहां तक हिंदी का सवाल है, टेस्ट देने वाले बच्चों में केवल 18.9 फीसदी बच्चों की हिंदी कमजोर है. जबकि मासिक टेस्ट का एक तरह से बायकॉट करने वाले विद्यार्थियों की 71 फीसदी हिंदी अच्छी थी. केवल 29 फीसदी बच्चे कमजोर मिले.
गणित में बच्चों की कुशलता अंग्रेजी की तुलना में बेहद उत्साहजनक कही जा सकती है. यह देखते हुए कि मासिक टेस्ट देने वाले बच्चों में 76 फीसदी बच्चों को गणित की समझ अंग्रेजी की तुलना में अच्छी मिली. टेस्ट न देने वाले बच्चों में भी 65 फीसदी बच्चों की स्थिति गणित में अच्छी मिली.
नोट- आकलन करने वाले विशेषज्ञ डॉ ढक ने बच्चों के दो ग्रुपों का समानांतर अध्ययन किया है, इसमें एक ग्रुप उन बच्चों का था, जिन्होंने मासिक टेस्ट दिये और एक ग्रुप ऐसे बच्चों का रहा जो मासिक टेस्ट देने नहीं आये.
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