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नेपाल में सप्तकोसी पर 122 वर्षों में नहीं बना बांध, अब बन रही डीपीआर

Updated at : 05 Sep 2019 7:51 AM (IST)
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नेपाल में सप्तकोसी पर 122 वर्षों में नहीं बना बांध, अब बन रही डीपीआर

पटना : बिहार में हर साल कोसी नदी की बाढ़ से होने वाली तबाही रोकने के लिए नेपाल के बराह क्षेत्र से 1.6 किमी उत्तर में सप्तकोसी नदी पर बांध बनाने की योजना 122 साल पहले बनी थी. लेकिन 1897 में हुई इस पहल के बाद अब तक फाइनल डीपीआर नहीं बन पायी है. जल […]

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पटना : बिहार में हर साल कोसी नदी की बाढ़ से होने वाली तबाही रोकने के लिए नेपाल के बराह क्षेत्र से 1.6 किमी उत्तर में सप्तकोसी नदी पर बांध बनाने की योजना 122 साल पहले बनी थी. लेकिन 1897 में हुई इस पहल के बाद अब तक फाइनल डीपीआर नहीं बन पायी है. जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने कहा कि उत्तर बिहार को बाढ़ से राहत दिलाने के लिए भारत और नेपाल सरकार के बीच लगातार बातचीत हो रही है.
सप्तकोसी नदी पर बांध बनाने के लिए डीपीआर बनायी जा रही है. डीपीआर में नेपाल की सप्तकोसी और बिहार में कोसी नदी के पानी का उपयोग सिंचाई के लिए करने सहित 3300 मेगावाट बिजली उत्पादन को भी शामिल करने की संभावना है. सिंचाई विभाग के सूत्रों का कहना है कि 1897 से ही भारत और नेपाल की सरकारों के बीच सप्तकोसी नदी पर बांध बनाने की योजना पर बात हो रही है.
कई स्तर पर बातचीत हुई है. 1991 में दोनों देशों के बीच इसे लेकर एक समझौता भी हुआ. 2004 में प्रस्तावित बांध की संभावनाओं को तलाशने के लिए नेपाल के धरान में एक संयुक्त परियोजना कार्यालय भी बना, जिसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि बैठते हैं. हाल ही में केंद्रीय जल आयोग के अधिकारियों के साथ नेपाल सरकार के प्रतिनिधियों की पटना में बैठक हुई थी, जिसमें कई मुद्दों पर सहमति बनी है.
बिहार का शोक
हर साल कोसी नदी की बाढ़ से बिहार में औसतन 12-13 लाख हेक्टेयर में फसलों की क्षति होती है, इसलिए इसे बिहार का शोक कहा जाता है. वहीं इस पर बांध बनने से यह क्षति रुकने की संभावना है. साथ ही करीब साढ़े नौ लाख हेक्टेयर इलाके में सिंचाई की सुविधा मिलने की संभावना है.
कुल लंबाई 724 किमी, बिहार में 260 किमी
कोसी नदी का नेपाल में नाम सप्तकोसी है. यह हिमालय से निकलती है. इसमें भारत-नेपाल सीमा से करीब 48 किमी उत्तर में कई प्रमुख सहायक नदियां मिलती हैं. यह शिवालिक की पहाड़ियों से होकर भीमनगर के पास बिहार में प्रवेश करती है. इसकी कुल लंबाई करीब 724 किमी है. बिहार के क्षेत्र में 260 किमी चलकर यह कुरसेला के पास गंगा नदी में मिल जाती है.
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