पांच करोड़ रुपये से बना ड्रेनेज सिस्टम पांच साल में ही बर्बाद

Updated at : 13 Aug 2019 4:48 AM (IST)
विज्ञापन
पांच करोड़ रुपये से बना ड्रेनेज सिस्टम पांच साल में ही बर्बाद

पटना : 100 साल का गौरवशाली इतिहास और बेहतर भविष्य की कार्ययोजना बनाने में जुटे पटना हाइस्कूल का खेल मैदान अब तक करोड़ों लील चुका है. बेशक स्कूल के खिलाड़ी इस मैदान पर कुछ खास खेल न पाये हो. लेकिन, इस मैदान पर पैसा बनाने का खेल खूब खेला गया है. पैसा बनाने के खेल […]

विज्ञापन

पटना : 100 साल का गौरवशाली इतिहास और बेहतर भविष्य की कार्ययोजना बनाने में जुटे पटना हाइस्कूल का खेल मैदान अब तक करोड़ों लील चुका है. बेशक स्कूल के खिलाड़ी इस मैदान पर कुछ खास खेल न पाये हो. लेकिन, इस मैदान पर पैसा बनाने का खेल खूब खेला गया है.

पैसा बनाने के खेल का जीता-जागता उदाहरण इस मैदान का ड्रेनेज सिस्टम है. वर्ष 2013-14 में इस मैदान से पानी निकासी (ड्रेनेज) का सिस्टम पांच करोड़ में तैयार किया गया. गजब की बात यह है कि पानी अभी भी मैदान में जस-का-तस भरा रहता है. लेकिन, सरकारी खजाने से पांच करोड़ की राशि जरूर पानी में बह गया.
बारिश में खेल मैदान बन जाता है तालाब
पटना हाइस्कूल के इस खेल मैदान का क्षेत्रफल करीब 4 हेक्टेयर (40 हजार स्क्वायर मीटर) है. 2013-14 में जल निकासी के लिए मैदान के चारों तरफ नाली बनायी गयी. यह ड्रेनेज सिस्टम मैदान के धरातल से कुछ ऊंचा है. नाली में मैदान का पानी कहां से प्रवेश करेगा, इसका प्रबंध नहीं किया गया.
इस तरह तमाम तकनीकी खामी के चलते इस बरसात के मौसम में नाली सूखी हुई है और मैदान आज भी तालाब बना हुआ है. जानकारों के मुताबिक इस खेल मैदान में अचानक ड्रेनेज सिस्टम जानबूझ कर बनाया गया था.
दरअसल खेल मैदान के नॉर्म्स के हिसाब से मैदान के धरातल समानांतर या कुछ नीचे ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाना चाहिए था. इस तरह के ड्रेनेज सिस्टम में कंक्रीट का इस्तेमाल न होकर बल्कि लोहे की जालियां लगायी जाती हैं, ताकि खिलाड़ी टकराकर चोटिल न हो.
गौरतलब है कि ऐसा परंपरागत ड्रेनेज सिस्टम पहले से था. उसे उखाड़ कर स्पोर्टस ग्राउंड मैन्युअल के विपरीत नया ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया गया था. मैदान के चारों तरफ उससे ऊंची कंक्रीट की नाली खेल के मैदान में नहीं बनायी जाती हैं. तत्कालीन समय में स्कूल के कर्ताधर्ताओं ने इस ओर आंखें फेर रखी थीं.
तकनीकी तौर पर गलत
मैदान के चारों तरफ बनाये गये कंक्रीट का ड्रेनेज सिस्टम काफी हद तक उखड़ चुका है. सिस्टम में कंक्रीट का इस्तेमाल भी नाम मात्र के लिए किया गया. इसमें कई जगह ईंट का भी इस्तेमाल किया गया है. स्कूल के प्राचार्य रवि रंजन ने बताया कि इस मैदान का ड्रेनेज सिस्टम मेरे पदस्थ होने से काफी समय पहले का है. इसलिए मैं इस संदर्भ में कुछ भी नहीं बता सकता हूं. हालांकि, अब यहां राज्य सरकार आधुनिक स्पोर्ट्स स्टेडियम बनवाने जा रही है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन