पटना : प्रदेश में जमीन विवाद के 36 हजार मामले लंबित
Updated at : 07 Aug 2019 5:35 AM (IST)
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कोर्ट के अलावा पांच स्तरों पर हो रहा निबटारा, फिर भी कम नहीं हो रहे हैं मामले पटना : राज्य में जमीन विवाद को सुलझाने के लिए सरकार ने अधिकारियों की पांच स्तर की अदालतें गठित की हैं. इसके बावजूद जमीन विवाद के मामले में कमी नहीं आ रही है. सरकार ने भूमि विवाद के […]
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कोर्ट के अलावा पांच स्तरों पर हो रहा निबटारा, फिर भी कम नहीं हो रहे हैं मामले
पटना : राज्य में जमीन विवाद को सुलझाने के लिए सरकार ने अधिकारियों की पांच स्तर की अदालतें गठित की हैं. इसके बावजूद जमीन विवाद के मामले में कमी नहीं आ रही है. सरकार ने भूमि विवाद के निबटारे की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया है. मुख्यमंत्री के स्तर पर कई निर्देश दिये गये हैं.
मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक से लेकर थाना प्रभारी व सीओ तक को इसके लिए जिम्मेदार बनाया है. िफर भी जमीन विवाद से जुड़े 36 हजार 539 मामले लंबित हैं. राजस्व न्यायालयों में विभिन्न स्तर पर इसकी संख्या 25 हजार 390 है. वहीं, लोक शिकायत निवारण अधिनियम के अंतर्गत विभिन्न स्तर पर 11 हजार 149 मामले हैं. जमीन विवाद के भूमि सुधार उपसमाहर्ता कोर्ट में सबसे अधिक 10 हजार 341 मामले लंबित हैं. एडीएम कोर्ट में 9380, डीएम कोर्ट में 5656 लंबित मामले हैं.
प्रमंडलीय आयुक्त के कोर्ट में सीलिंग केस से संबंधित 13 मामले हैं. सरकार ने लोगों की समस्याओं के निष्पादन के लिए लोक शिकायत निवारण अधिनियम बनाया है. इसके तहत विभिन्न स्तरों पर 11 हजार 149 मामले सुनवाई के इंतजार में हैं.
सबसे अधिक अनुमंडल स्तर पर लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के राजस्व न्यायालय में 10 हजार 343 मामले हैं. जिला स्तर पर एडीएम कोर्ट में 717, राजस्व व भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सह द्वितीय अपीलीय प्राधिकार के समक्ष 44, अपर सचिव सह प्रथम अपीलीय प्राधिकार के समक्ष तीन व विभागीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष 42 मामले लंबित हैं.
पांच स्तरों पर समीक्षा की व्यवस्था
जमीन विवाद से संबंधित मामलों के निबटारे के लिए थानेदार से लेकर मुख्य सचिव तक पांच स्तरों पर समीक्षा की व्यवस्था है. हर शनिवार व रविवार को थाना स्तर पर थानेदार व अंचल अधिकारी को एक साथ बैठक कर जमीन से संबंधित वादों की समीक्षा कर निष्पादित करना है.
एसडीओ व डीएसपी स्तर के अधिकारी को महीने के दूसरे सप्ताह में इस तरह के मामलों की समीक्षा अपने स्तर से करना है. हर 15 दिनों पर डीएम व एसपी के स्तर पर जमीन विवाद के मामलों को सुलझाने का प्रयास होगा. महीने के अंत में मुख्य सचिव व डीजीपी को नीचे के अधिकारियों द्वारा किये गये काम की समीक्षा करना है. विभागीय सूत्र ने बताया कि अंचलवार पहले टॉप तीन जमीन विवादों की सूची बना कर उसकी मॉनीटरिंग होगी.
भूदान की जमीन को लेकर हरकत में सरकार : भूदान में मिली जमीन के आवंटन को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं. इसे लेकर भी विवाद होता है. इसकी जांच के लिए पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार चौधरी की अध्यक्षता में भूदान वितरण जांच आयोग का गठन किया गया है.
आयोग का कार्यकाल दो साल है. भूदान की 6़ 48 लाख एकड़ जमीन में से 2़ 56 लाख एकड़ जमीन बांटी गयी है.
सौ रुपये में रजिस्ट्री : सरकार ने जमीन विवाद को कम करने के लिए पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे के बाद उसकी रजिस्ट्री के लिए मात्र सौ रुपये शुल्क लगने की व्यवस्था की है. 50 रुपये निबंधन व 50 रुपये स्टांप ड्यूटी के रूप में शुल्क लगेंगे.
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